बुरांश से महक उठे पहाड़

हिमालयी क्षेत्र में बुरांश के फूल काफ़ी मात्रा में खिलते हैं। बसंत के मौसम में इसके फूल खिलना भी शुरू हो गये हैं। लगभग 1500 मीटर से 2500 मीटर की उँचाई वाले क्षेत्रों में इसके पेड़ उगते हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इसके जंगल पाए जाते हैं। बुरांश एक औषधीय पौधा है और इसके फूल जहाँ सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, तो कई बीमारियों से बचाते भी हैं। इसीलिए प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में बुरांश को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बुरांश के फूल का रस हृदय रोग, किडनी, लिवर के अलावा रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने और हड्डियों के सामान्य दर्द के लिए बहुत लाभदायी होता है।

मौसम की मेहरबानी से पहाड़ के जंगल बुरांश के फूलों से लकदक हैं। बुरांश के फूलों से तैयार जूस व अन्य उत्पादों के सेवन से हृदय रोग नियंत्रण, खून बढ़ने के साथ शारीरिक विकास होता है। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर बुरांश के फूलों का अपेक्षा के अनुरूप उपयोग नहीं किया जा रहा है। प्राचीन काल से ही बुरांश को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। रोडोडेन्ड्रोन प्रजाति के इस पेड़ में सीज़नल बुरांश के लाल, सफेद, नीले फूल लगते हैं। लाल फूल औषधीय गुणों से भरपूर हैं। खास कर हृदय रोग से पीड़ित लोग यदि प्रतिदिन एक गिलास बुरांश का जूस पिएं तो रोग जड़मुक्त हो जाएगा। जबकि शारीरिक विकास व खून की कमी में बुरांश का जूस व इससे तैयार उत्पाद अचूक औषधि का काम करती है।

खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में भी बुरांश का जूस दवा का काम करता है। बुरांश के जूस की मांग अन्य प्रदेशों में भी बहुत है। बुरांश का जूस लौह तत्त्वों का संपूर्ण पोषक है। यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है और शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की पूर्ति करता है। इस बार जमकर हुई बर्फबारी व बारिश ने बुरांश के जंगलों में वर्षों पुरानी रौनक लौटा दी है। फूलों से जंगल लद गये हैं, प्रकृति का यह ख़ज़ाना बेशक अधिकतर लोगों की पहुँच से दूर है, लेकिन यह जीवन के लिए अमृत के समान है। हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, शिमला और सिरमौर में यह काफ़ी मात्रा में पाया जाता है।