किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैत ने अपने चुनावी क्षेत्र से वोट कास्ट करने के बाद बोला था कि वोट कोको ले गई। इसे बड़े कैनवास में समझने की कोशिश करे।

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि दक्षिण एशिया की नस्ले भावनात्मक पक्ष को ज्यादा तरजीह देती हैं और कल्पनाओ के घोड़ों पर सवार होकर आसमानों की सैर करना पसंद करती हैं।

इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं लेकिन सत्य तो यही है कि यहां की कौमें सत्य से ही दूर रहती हैं।

राकेश टिकैत ने कहा था कि बीजेपी के वोट कोको ले गई, कोको पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बच्चे को बहकाने के लिए किसी काल्पनिक पक्षी या जीव के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। एक ऐसा ही मुहावरा प्रचलित है कि कौवा कान ले गया और सुनने वाला अपना कान न देखकर कौवे के पीछे दौड़ना शुरू कर देता है।

वास्तव में समाज को ऐसा बुद्धिहीन या तर्कहीन बनाया जाता है और शायद पिछले सौ सवा सौ साल से यह साजिश रची जा रही है।

निसंदेह आज के युग में इस प्रकार से मानसिकता/मूड बदलने की साजिशों में मीडिया की अहम भूमिका होती हैं जो आज भारत में दिखाई पड़ रही है।

यूक्रेन और रूस के बीच विवाद को युद्ध घोषित कर दिया गया है तथा साथ ही छठी पीढ़ी का मीडिया तथा प्रोपोगैंडा वार भी जारी है, यदि विभिन्न वैश्विक चैनलों का विश्लेषण किया जाए तो सिर्फ विरोधाभास नज़र आएगा। 

बहरहाल भारतीय मीडिया जोर शोर से युद्ध का आंखों देखा हाल सुना रहा है और वो भी "सूत्रों" के हवाले से, किसी चैनल पर यदि कोई सार्थक चर्चा हुई हो तो वो दर्शको का सौभाग्य होगा।

यूक्रेन और रूस की चिंता में भारत के आंतरिक हालात किस स्थिति तक पहुंचा दिए गए हैं अभी इसके समाचार भारतीयों को भारत से बाहर से ही मिलेंगे, ऐसा ही लगता है।

गत दिनों कर्नाटक प्रोविंस में स्कूली बच्चियों के हिजाब बांधने पर बहुत बड़ा प्रायोजित नाटक किया गया जिसको अदालत से लेकर समाज तक आग लगाने तक हवा दी गई। हालांकि उसका वैश्विक स्तर पर बहुत नकारात्मक असर पड़ा और कुवैत सहित कई देशों में भारत के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन हुए।

हिजाब विवाद के शुरुआती दौर में ही NewsNumber.Com पर यह आशंका जाहिर कर दी गई थी कि इसकी आंच सिख समुदाय और पंजाब पर जरूर पड़ेगी क्योंकि शायद वर्तमान सरकार की इंटेंशन ही देश का माहौल बिगाड कर अशांति पैदा करना है।

कर्नाटक में ही कल एक सिख बच्चे को स्कूल में दाखिला देने से केवल इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उसने केश सजा कर पटका बांधा हुआ था और दूसरी बच्ची को स्कूल में घुसने की इजाजत नहीं दी गई क्योंकि अमृतधारी होने के कारण उसने केश सजाए हुए थे ( गैर सिख इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अमृत छकने के बाद लडकियां भी अपने केश उपर की ओर बांधकर पगड़ी नुमा पटका बांधती हैं फिर उसके ऊपर दुपट्टा ओढ़ती है )

इसके अलावा सिख बच्चे से किए गए दुर्व्यवहार की टाइमिंग पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

आज भारतीय पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में दीप सिद्धू की अंतिम अरदास का कार्यक्रम है और उसमे लाखो लोग इकट्ठा हुए है। क्योंकि दीप सिद्धू के चलाने से पहले वो सिख अस्मिता का विषय जोर शोर से उठा रहा था फिर उसमे उसकी मृत्यु दुर्घटना या हत्या के विवादों में घिर गई तो संभावना जताई जा सकती है कि वहां कुछ गर्म बयान भी दिए जायेंगे।

क्या ऐसा संदेह किया जा सकता है कि  सरकार या किसी एजेंसी या किसी देशद्रोही गैंग द्वारा जानबूझकर समय अनुसार ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया और क्या पंजाब को फिर से किसी बुरे ख्वाब लगने वाले हालात में धकेलने की साजिश रची जा रही है ?

सोच आपकी अपनी है। यूक्रेन की चिंता करनी है या भारत की !

भारत के एक प्रॉविंस कर्नाटक से राजनीतिक लाभ के लिए शुरू किया गया हिजाब विवाद अब भारत सरकार और भारतीय समाज के गले की हड्डी बनता जा रहा है।

बदलते विश्व और शैक्षिक विकास के बावजूद अभी भी भारतीय राजनीति में एक वर्ग ऐसा है जिसका पाषाण युग से बाहर निकलना और विकसित होना जरूरी हैं। ...

भारत के भविष्य को लेकर खतरनाक संकेत ! यही समय है जब विचारकों और बुद्धिजीवियों को खुलकर सामने आना चाहिए।

भारत के कर्नाटक राज्य में कुंडूपुर कॉलेज के प्रिंसिपल ने अचानक कुछ हिजाब पहनकर आने वाली मुस्लिम छात्राओं को कॉलेज में आने से मना कर दिया गया। जिसके विरोध में छात्राओं ने स्कूल के गेट पर बैठकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी लेकिन प्रशासन ने इसे धार्मिक मुद्दा बना दिया और इस आग में घी डालने का प्रयत्न किया स्थानीय घिनौनी राजनीति ने ...