रूस यूक्रेनिया विवाद युद्ध के रास्ते पर, क्या अगली कड़ी में ताइवान या दक्षिण एशिया भी आ सकता हैं ?

पूर्व सोवियत राज्य और 1991 में स्वतंत्र देश बने यूक्रेन के दो राज्यों को स्वतंत्र देश घोषित करने के साथ ही मध्य एशिया में फिलहाल युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वेस्टर्न पावर फिलहाल रूस को कोई बड़ी चुनौती देने में सक्षम हैं।

भारतीय समयानुसार बीती रात हुई हलचल की मॉस्को से अनिल जनविजय की ग्राउंड रिपोर्ट के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा किया गया संबोधन एवम दक्षिण एशिया पर इसके संभावित प्रभाव।

उक्रअईनी सेना ने लुगांस्क की बस्तियों पर भारी तोपों से गोलाबारी शुरू की।

उक्रअईनी सेना पिछले सात घण्टे से यानी भारतीय समय के अनुसार २३ फ़रवरी की शाम के साढ़े पाँच बजे से लुगांस्क की बस्तियों पर भारी तोपों से लगातार गोलीबारी कर रही है।

हालाँकि रूस ने उक्रअईना की सेना के निकटवर्ती इलाकों से ज़्यादातर लोगों को हटा लिया है, फिर भी अभी बड़ी संख्या में लोग इन बस्तियों में रह रहे हैं। तोपों के गोले और राकेट आम निवासियों के मकानों पर गिर रहे हैं और इन बस्तियों को नष्ट कर रहे हैं।

लुगांस्क और दनेत्स्क नामक दोनों नए देशों के प्रमुखों ने व्लदीमिर पूतिन को पत्र लिखकर सैन्य सहायता माँगी है ताकि उनके नागरिकों और निवासियों को बचाया जा सके। 

दूसरी तरफ़ उक्रअईना ने अपने पूरे इलाके में आगामी एक महीने के लिए आपात्काल लगाने की घोषणा कर दी है। इसका मतलब यह है कि उक्रअईना से उसका ऐसा कोई भी नागरिक (१८ से ६० वर्ष के पुरुष) देश छोड़कर नहीं जा सकेगा, जिसे सेना में सेवा करने के लिए बुलाया जा सकता है।

इस बीच रूस ने अपने सभी राजनयिकों को स्वदेश बुलाने की घोषणा की है। रूसी दूतावास और तीन कौन्सुलर कार्यालयों के सभी कर्मचारी कल सुबह तक उक्रअईना से वापिस घर लौट जाएँगे। दूसरे देशों के राजनयिकों और दूतावासों के अन्य कर्मचारियों ने भी उक्रअईना छोड़कर अन्य देशों में जाना या स्वदेश जाना शुरू कर दिया है।

रूस के राष्ट्रपति पूतिन ने उक्रअईना से अनुरोध किया है कि वह युद्ध करने की जगह बातचीत से समस्याओं को निपटाने का रास्ता अपनाए। व्लदीमिर पूतिन ने कहा है कि अगर एक बार युद्ध शुरू हो गया तो फिर रूसी सेना अन्तिम विजय तक लड़ेगी। इस युद्ध में नुक़सान उक्रअईना का ही होगा।

अमेरिका ने पन्द्रह एफ़-३५ लड़ाकू विमान और आठ सौ अमेरिकी सैनिक उक्रअईना भेजने की घोषणा की है। उक्रअईना का कहना है कि यदि रूस को उक्रअईना से लड़ने की छूट दी गई तो इसका मतलब होगा कि विश्व में जो व्यवस्था अभी तक चल रही थी, वह नष्ट हो चुकी है।

जर्मनी की विदेशमन्त्री का कहना है कि हमारी तरफ़ से वार्ता का रास्ता खुला हुआ है। लेकिन वार्ता करने के लिए रूस को हमारी मेज़ पर आना होगा। हम रूस नहीं जाएँगे। दूसरी तरफ़ जर्मनी और फ़्रांस के नेताओं ने रूस के विदेशमन्त्री से मुलाक़ात करने से मना कर दिया है। रूस के विदेशमन्त्री इनसे मुलाक़ात करने के लिए इनके देशों में जाना चाहते थे।

ब्रिटिश सरकार ने और जर्मन सरकार ने रूसी टीवी चैनल ’आरटी’ का प्रसारण बन्द कर दिया है और उसका लायसेंस कैंसल कर दिया है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि रूसी टीवी चैनल रूस का प्रोपोगण्डा-चैनल है। लेकिन अगर ब्रिटिश जनता चाहेगी तो हम इस चैनल के प्रसारण को फिर से शुरू करने पर विचार कर सकते हैं।

अमेरिका ने रूस के दो बैंकों और ३५१ अफ़सरों पर प्रतिबन्ध लगाने और यूरोप व अमेरिका में इनकी सम्पत्तियों को जब्त करने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने तीन रूसी अरबपतियों पर प्रतिबन्ध लगाए हैं।

रूस द्वारा दोनों नए देशों की आम जनता को बचाकर रूस पहुँचाने का काम जारी है। अब तक क़रीब सवा लाख लोग रूस पहुँच चुके हैं। इन लोगों को सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। दोनों नए देशों से आने वाले शरणार्थियों का कई जत्थे मास्को और मास्को अंचल के शहरों में भी पहुँचने शुरू हो गए हैं। इस तरह इन शरणार्थियों को पूरे रूस के विभिन्न शहरों में रखा जा रहा है।

हर शरणार्थी का नाम विशेष शरणार्थी-सूची में पंजीकृत किया जा रहा है। इसके बाद उस शरणार्थी से जुड़ी सारी सूचनाएँ एक विशेष वेबसाइट पर उसके पन्ने पर जोड़ी जा रही हैं। रूस पहुँचने वाले हर शरणार्थी (व्यक्ति) को दस हज़ार रुपए प्रति व्यक्ति की एकमुश्त सहायता दी जा रही है। इसके अलावा प्रत्येक शरणार्थी को ऊपरी खर्चों के लिए प्रति सप्ताह आठ सौ रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। उन्हें मुफ़्त आवास, गरम कपड़े, बिस्तर और मुफ़्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

भारतीय समय के अनुसार रात तीन बजे तक की परिस्थिति 

इस समय भारतीय समयानुसार सुबह के नौ बजे है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को वर्चुअली संबोधित कर रहे हैं। जिसमे उनके इरादे साफ नज़र आ रहे हैं कि वो अपने निर्णयों से पीछे नहीं हटेंगे।

पश्चिमी शक्तियों द्वारा भी अपने हितों को देखते हुए ऐसी कोई संभावना नहीं लगती जिससे रूस प्रभावित हो। भारत के संदर्भ में एक ओर तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस समय मॉस्को के दौरे पर हैं दूसरी ओर भारत स्थित रूसी राजदूत ने भारत और रूस के पुराने मैत्री तथा सामरिक संबंधों का हवाला देते हुए सुरक्षा परिषद में भारत के रुख की प्रशंसा की है क्योंकि भारत ने बेशक रूस का विरोध नही किया था लेकिन यूक्रेन का भी साथ नहीं दिया था।

पुतिन द्वारा यूक्रेन के राष्ट्रपति को बातचीत से समाधान निकालने का आमंत्रण दिया है और अमेरिका द्वारा भी आशानुकूल प्रतिरोध नहीं किया गया।

यदि रूस अपनी योजना में सफल हो जाता है और अलग किए गए राज्यों को पहले स्वतंत्र देश स्थापित करने के बाद उनका रूस में विलय या कोई संघ बनाने में सफल हो जाता है तो निश्चित रूप से अगला कदम चीन द्वारा ताइवान के विरुद्ध उठाया जा सकता है।

इसी संदर्भ में जापान में होने वाली इंडो पैसिफिक क्वाड बैठक में भारत को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

आशा की जानी चाहिए कि विश्व किसी बड़े युद्ध की ओर नही बढ़ेगा लेकिन शायद आने वाले समय में कई क्षेत्रों के नक्शे जरूर बदलेंगे !