भारत का दुर्भाग्य है या राजनेताओं की साज़िश कि यहां साम्प्रदायिकता और व्यर्थ की बहस ज्यादा होती है, शिक्षा, स्वास्थ्य की नहीं।

इसे एक राजनीतिक साज़िश ही मानना चाहिए कि भारत में आमतौर पर बहस के विषय हिन्दू मुस्लिम सिख या स्वर्ण जाति और दलित पिछड़े होते है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई बात नही करना चाहता, युवाओं के रोजगार और बेहतर भविष्य भी मन्दिर मस्जिद की आड मे भुला दिए जाते है। इसी विषय पर महक सिंह तरार की कलम से।

यूनिवर्सिटी : नई इकोनॉमी की फैक्टरियां ⁉️

देश की मजबूत नींव के लिए अच्छे कॉलेज-विश्वविद्यालयों के महत्व पर लिखना तो सूरज को दिया दिखाना होगा। क्या अपनी नई पीढ़ियों को बेहतर नागरिक बनाने के लिए अच्छे इंस्टीट्यूटूशन्स खड़ा करना किसी आधुनिक देश के लिए उद्योग हो सकता है? इस सवाल को खोजते हुए मैं इंग्लैंड पहुंचा।

सब जानते है यूरोपीय यूनियन से विच्छेद के बाद इंग्लैंड की इकोनॉमी थोड़ी गड़बड़ रही है। वैसे भी उस देश के पास प्राकर्तिक संसाधनों की प्रचुरता नही है। एक्सपोर्ट्स भी दसवें नंबर पर आता है। तो क्या क्लीन, ग्रीन, साफ सुथरी पढ़ाई का माहौल देकर देश की इकॉनमी बढाई जा सकती है? पढिये ओर बताइये...

भारत जैसे कई देशों की सरकारों ने यूनिवर्सिटीज पर ध्यान ना देकर बस प्राकर्तिक संसाधनों को बेच कर पैसा बनाने, या पढ़ाई को प्राथमिकता देने से बचते हुए मंदिर मस्जिद जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया। अभी चुनावो के दौरान 20 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि CM द्वारा एजुकेशन के बजाए मंदिर, जिन्नाह, दंगे, गर्मी निकाल दूंगा वाले ट्वीट देख रहा हूँ ।

ऐसे मे इन देशों के अच्छी पढ़ाई के इच्छुक बच्चे पढ़ने कहीं तो जाएंगे। पढ़े लिखे मां बाप जानते है कि भारत जैसे देश मे एक भी यूनिवर्सिटी दुनिया के टॉप 100 विश्विद्यालयों मे नही आती तो बच्चो का भविष्य यहां खराब करने से बेहतर है बाहर पढ़ने भेज दो। इस साल अपने अपने देश से बाहर पढ़ने वाले छात्रों की बढ़ोतरी कुछ इस प्रकार हुई।

बांग्लादेश 410%

नाइजीरिया 347%

पाकिस्तान 270%

चीन 157%

भारत 102%

UK ने इस साल दशकों बाद सबसे ज्यादा स्टडी वीसा दिए है। USA के बाद विदेशी छात्रों को एडमिशन देने वाला UK सबसे बड़ा देश है। एक Non-EU विद्यार्थी इंग्लैंड की इकॉनमी मे 109000 पाउंड का योगदान देता है। अब आपसे सवाल है कि अगर इंग्लैंड ने 4,28,428 छात्रों को वीसा दिया और एक छात्र 109000 पाउंड का योगदान इंग्लैंड की इकोनॉमी मे दे रहा है तथा एक पौंड का रेट 100 रुपये हो तो इंग्लैंड ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से कुल कितने रुपये (शब्दो मे) कमाए, कमेंट करें।

ये भी सोचे कि क्या हमारा अगली पीढ़ी की अमानत देश के खनिज पदार्थ (जैसे अभ्रक, लोह अयस्क, एलुमिना, क्रोमाइट, बॉक्साइट इत्यादि) बेचकर ही पैसा कमाना उचित है? या अच्छे इंस्टीट्यूटूशन्स बनाकर देश की अगली पीढ़ियों को सुधारना व देश के लिए आर्थिक तरक्की का रास्ता पक्का करना उचित है?

आज भारत मे 500 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये तक के कई दर्जन नये चर्च, मंदिर, मस्जिद, मूर्तिया बन रहे है। सोचिएगा क्या इनके बजाये यूनिवर्सिटीज स्थापित करना बेहतर समाधान होता, जैसे दुबई भी बड़े पैमाने पर कर रहा है?