दूसरे धर्मों एवम् धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना ही इंसानियत है और यदि कोई गलती करे तो उसे नोटिस लेना वहां की सरकार की तारीफ करने लायक है।

एक नूर से सब जग उपज्यों, कौं भले कौ मंदे का दर्शन मानने वाले धन गुरु नानक देव जी के विश्राम स्थल पाकिस्तानी पंजाब के गुरुद्वारा करतार पुर साहिब में मॉडलिंग करना विवादों के घेरे में आ गया और पाकिस्तानी सिविल सोसायटी तथा सरकार द्वारा कड़ी आलोचना के बाद मॉडल एवम् फैशन कम्पनी ने सार्वजनिक माफी मांग ली।

पाकिस्तान की कपड़ा कम्पनी मन्नत क्लॉथिंग ने सोचा होगा कि लेडीज सूट्स की बिक्री में बढ़ावा हो सकता है यदि उसकी मॉडलिंग श्री करतारपुर साहिब गुरूद्वारे की पृष्ठभूमि को दिखाते हुए की जाए।

क्योंकि आमतौर पर पंजाबी महिलाए ही सूट सलवार/ ट्राउज़र पहनती है और विश्व के सभी बड़े देशों में पंजाबी रहते भी है तो व्यापारिक दृष्टिकोण से उनका फैसला समझदारी भरा था लेकिन जब फोटो प्रकाशित हुए तो पाकिस्तान में विवाद खड़ा हो गया।

विवाद का कारण यह था कि गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के प्रांगण में मॉडल ने नंगे सिर फोटो शूट कराया और नंगे सिर वाले फोटो गुरुद्वारा भवन के साथ प्रकाशित कर दिए।

सोशल मीडिया पर जैसे ही किसी ने ये फोटो शेयर किए इसे सरकार एवम् सिविल सोसायटी द्वारा गम्भीरता से लिया गया तथा विवाद खड़ा हो गया।

प्रधान मंत्री इमरान खान के विशेष सहायक डॉ शाहबाज गिल ने मॉडल तथा कम्पनी के विरूद्ध अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के अपराध में कार्यवाही के आदेश जारी कर दिए गए।

इसके अतिरिक्त पाकिस्तानी सिख संगत ने भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है हालांकि मॉडल तथा मॉडलिंग कराने वाली कम्पनी ने सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगी है।

इसके अतिरिक्त यदि देखा जाए तो दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब एवम् अन्य बड़े गुरुद्वारों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हाजरी के समय या लंगर प्रसाद के समय जरूर मर्यादा का पालन करते हुए सभी सिर ढक कर जाते है लेकिन बाहर प्रांगण में अक्सर नंगे सिर भी घूमते हैं और कोई आपत्ती नहीं करता।

क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा साहिब के अहाते में भी नंगे सिर फोटो शूट कराना अपराध समझा है तो इनके विरूद्ध कार्यवाही सम्भव है ।

कुछ सिख विद्वानों का मानना है कि पाकिस्तान की सिख संगत या गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को इन्हे माफ कर देना चाहिए अथवा सेवा, प्रसाद की धार्मिक सजा सुना कर विवाद खत्म कर देना चाहिए क्योंकि यदि वहां अदालत में केस दर्ज हो गया तो पाकिस्तान के कानून के तहत इन्हे सख्त सजा मिलना निश्चित है।

टाटा, बिरला से लेकर अंबानी तक धनकुबेर होने के बदलते प्रतीक चिंह !

देश की आज़ादी से पहले भी नगर सेठ होते थे और दिल्ली में लाला छुन्नामाल जैसे बहुत से नाम इज्जत से इतिहास का हिस्सा हैं जो मुगलिया तख्त को भी पैसा उधार देने की कुव्वत रखते थे। ...