ਯੂਪੀ, ਪੰਜਾਬ ਦੀਆ ਚੋਣਾਂ ਜਾ ਕਿਸੀ ਵੱਡੀ ਸਾਜ਼ਿਸ਼ ਦੀ ਆਹਟ ! ਸਿਆਸੀ ਪਾਰਟੀਆਂ ਤੇ ਕਿੰਨਾ ਕ ਭਰੋਸਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ?

और इस प्रकार उत्त प्रदेश एवम् पंजाब की सड़को, गली, चौराहों पर चुनावी बिगुल बज चुका है जिसमे दो ऐसे बिंदु है जिन्हे नजरंदाज करना ऐसी ही भूल हो सकती हैं जैसी सावरकर और जिन्ना के उदय के समय हिंदुस्तान ने की थी।

किसी भी संस्कृति को बनने या पनपने में सदियां लगती हैं उसी प्रकार देश और राजनीति भी साल, महीनों का न होकर पीढ़ियों का खेल होता है। हिंदुस्तान में लगभग सौ साल पहले आरएसएस की विचारधारा सामने लाई गई जिसे बहुमत से सरकार बनाने लायक स्थिति में आते आते 90 साल लगे।

इतने लंबे इंतजार के बाद भी यदि अब आरएसएस अपनी सोच वाला भारत नहीं बना सकी तो यह न केवल उसकी नाकामयाबी होगी अपितु नाज़ी पार्टी की तरह वो इतिहास बन जाएगी।

भारत के हिंदी भाषी या Cow belt वाले क्षेत्रों में जय श्री राम से तो उन्हे लगता है कि एक हद तक वो कामयाबी की तरफ बढ़े हैं लेकिन पंजाब में उन्हे जरूर चुनौती मिलती रही है और किसान आंदोलन के बाद तो हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी उनकी योजनाएं या सोच ( साज़िश लिखना उचित नहीं होगा ) को बड़ा झटका लगा है।

लेकिन चुनाव और चुनावी प्रचार का समय ऐसा होता है जब प्रचार की आड़ में कुछ भी किया जा सकता है जिसमे मुख्य रूप से जनता की मानसिकता बदलना है।

क्योंकि इस बार चुनावी प्रक्रिया सर्दियों के मौसम में शुरू हुई है तो यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सर्दियों में बाहरी परिंदे दाना चूगने और अपना परिवार बढ़ाने यहां आते है फिर मौसम बदलते ही निकल जाते है।

अब थोड़ा गहराई से पंजाब और उत्त प्रदेश में हो रही चुनावी हलचल का विश्लेषण किया जाए तो दोनों राज्यों में दो विशेष चेहरे नजर आ रहे हैं जिनका उन क्षेत्रों से कोई सम्बन्ध नहीं है। हालांकि संवैधानिक रूप से उनका या किसी भी रजिस्टर्ड पार्टी का अधिकार है कि वो चुनावी राजनीति में हिस्सा ले सके और इसका सम्मान भी करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में जनाब असदुद्दीन ओवैसी साहब की एंट्री से ऐसा लगता है जैसे बीजेपी को चुनौती देने के लिए एक पढ़ा लिखा व्यक्ति संविधान के भरोसे राजनीति सुधारने आया है लेकिन उनकी पार्टी और उनके लोकप्रिय तार्किक भाषण अहसास कराते हैं कि वो एक खास समुदाय के लिए राजनीति करने आए हैं जिससे उनके समाज को कोई लाभ हो या ना हो किन्तु बीजेपी को अपने हिन्दुत्व वादी वोटर को ध्रुवीकरण करने का अवसर जरूर मिलता हैं।

यही धर्म आधारित ध्रुवीकरण भविष्य में कितना बड़ा खतरा बन सकता है इसका अहसास अभी से कर लेना चाहिए लेकिन दुखद है कि कांग्रेस सहित समाजवादी पार्टी भी इसी ट्रैप में फंसकर व्यवहार कर रही हैं जिसमे मुख्य रूप से खुद को पक्का हिन्दू सिद्ध करना है।

पंजाब में जोर शोर से सरकारी मीडिया जिस राजनीतिक हलचल को सबसे ज्यादा प्रसारित कर रहा है वो है दिल्ली के मुख्य मंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल। 

उनकी सभाओं और भाषणों का विश्लेषण करे तो साफ साफ दीवार पर लिखी इबारत पढ़ी जा सकती है कि वो पंजाब की मानसिकता को यूपी बिहार वाली सोच की तरफ धकेल रहे है और यहां भी अकाली दल तथा कांग्रेस भी उसके ट्रैप में फंसकर उसी जाल में उलझ गई है जिसमे संघ चाहता था।

सुखबीर सिंह बादल ने एक ओर तो मुफ्त मुफ़्त की घोषणाएं शुरू कर दी दूसरी ओर पंजाब का व्यापार , व्यापारियों के हवाले करने की समझ ना आने वाली घोषणा की है बेशक व्यापारी वो खुद ही क्यों ना हो।

कांग्रेस के चन्नी साहब भी मुफ्त तथा एक के साथ एक वाली स्कीमें लेकर सामने आ रहे हैं।

इन सबसे बड़ी और अफसोसनाक घोषणाएं जाति धर्म को लेकर की जा रही जिसका पंजाबियों को पुरजोर विरोध अभी से करना चाहिए अन्यथा पंजाब और पंजाबियत इतिहास के किस्से कहानियां बन जाएंगे।

इसकी शुरुआत झाड़ू वालो ने दलित उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा के साथ की थी जिसकी तर्ज पर अब कांग्रेस दलित मुख्यमंत्री का ढोल पीट रही है जो पंजाब के लिए बहुत शर्मनाक है क्योंकि जिस संस्कृति में रंग रेटा ( महा दलित ) गुरु का बेटा कहलाता हो वहां जाति धर्म की राजनीति की बात करना किसी महापाप से कम नहीं माना जाना चाहिए।

तो क्या यह समझा जाए कि पंजाब में यदि बीजेपी का वजूद नहीं है तो आरएसएस ने अपनी बी टीम आम आदमी पार्टी को उतार कर एक राष्ट्र, हिंदी, हिन्दू, हिन्दुस्तान फैलाने की साज़िश की है ? 

यदि आज राजनीतिक पार्टियां जाति के आधार पर उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर रही हैं तो हो सकता है कि कल यूपी बिहार से आकर बसे भैय्यों के लिए कुछ सीट या मंत्री पद रिजर्व करने की घोषणा करने लगे ! हो सकता है कि मलेर कोटला को विशेष दर्जा देने की घोषणा करे।

और इसी तरह की घोषणाओं से अलगाव वाद के बीज बोए जाते है जिनका अंत याद करने के लिए पंजाबियों को 1940 से 1947 तक का इतिहास खंगालना पड़ेगा।

कैरों से लेकर बादल और कैप्टन तक बेशक नेताओ पर कितने भी आरोप लगे हो लेकिन पंजाब में विघटनकारी और धार्मिक उन्माद का आरोप कभी नहीं लगा, 80 के दशक के घोर आपत्तिकाल में भी एक भी अल्पसंख्यक को भीड़ द्वारा विरोध या आपत्तिजनक नारेबाजी का सामना नहीं करना पड़ा यदि किसी गांव में कोई शरारती पर्चा लगा भी दिया गया था तो पूरा गांव उस गैर सिख ( हिन्दू हो या दलित या मुस्लिम ) की सुरक्षा के लिए खड़ा हो गया।

इसलिए वर्तमान चुनावों में बेशक अपनी अपनी सोच के अनुसार अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट करे लेकिन उत्त प्रदेश में वहां की गंगा जमुनी तहजीब और पंजाब की पंजाबियत को चोट पहुंचाने वाले नेताओ को जरूर आइना दिखाए जिससे भारत रूपी खूबसूरत गुलदस्ते को बिखरने से बचाया जा सके ( हालांकि पंजाबी विरोध नहीं करते, छित्रौल करते हैं )

घिनौनी सियासी साजिशों का शिकार होता पंजाब और पंजाबियत आज भी जिंदा क्यों है और कब तक रहेगी ?

रूहें जमीन पर दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप का एक हिस्सा जिसे पंजाब के नाम से जाना जाता है निसंदेह सबसे खूबसूरत और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। ...

वृहत हिंदुस्तान के टूटने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है और हमेशा इस टूट के पीछे हिटलर जैसी सोच रही है कि वो ही सर्वश्रेष्ठ है।

कहते है जब बाबर हिंदुस्तान में आया तो उसने लिखा कि धरती पर यदि कुदरत ने अपना सबसे ज्यादा खजाना लुटाया है तो वो हिंदुस्तान की सरजमीं है। बेशक उसके बाद शाहजहां ने कश्मीर को देखकर बोला था कि यदि कहीं स्वर्ग है तो वो यहीं है, यहीं है। ...

जिन्ना की चर्चा और बाहर से अंदर तक तनाव ही तनाव है। कारण सिर्फ एक और वो यूपी का चुनाव है।।

इसमें कोई शक नहीं है कि यदि राजनीति के घटिया स्तर और सियासी साजिशों को छोड़ दिया जाए तो हिंदुस्तान से बेहतर मुल्क कुर्रा ए अर्श पर दूसरा नहीं है। उसमे भी बहुल संस्कृति और सभ्यताओं वाला भारत लेकिन ..... ...

पंजाब चुनाव प्रचार या पंजाबियत को खत्म करने की साज़िश ?

कुल पांच राज्यों के चुनावों में भारत के सभी बड़े राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण उत्त प्रदेश एवम् पंजाब ही है क्योंकि बीजेपी की केंद्र सरकार के लिए भी अलग अलग कारणों से इनकी महत्ता समझी जा रही है। ...

Candles in the wind ! तरक्की और समृद्धि के लिए दी गई कुर्बानियों की कहानी।

हिन्दी सिनेमा का एक यादगार सीन था जिसमे गांव वाले रेल गाड़ी का विरोध करते है और रेल गाड़ी तथा तांगे के बीच दौड़ का आयोजन किया जाता हैं कि परम्परागत मानव श्रम और मशीनी युग मे प्रतियोगता से किसे विजेता घोषित किया जाए। ...

भारतीय पंजाब को कश्मीर बनाने की साज़िश या किसी अनहोनी की आशंका !

अचानक लिए गए निर्णय के अनुसार भारतीय पंजाब के सीमा से 50 किमी रेडियस में बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देते हुए अधिकार दिए गए हैं जिसके अनुसार बीएसएफ कर्मी/अधिकारी किसी को भी गिरफ्तार कर सकते है, तलाशी ले सकते हैं और जांच पड़ताल कर सकते है। ...

भारत की बिगड़ती कानून व्यवस्था एवम् मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन होने के बावजूद बीजेपी सरकार तथा नौकरशाही द्वारा किया जा रहा अमानवीय व्यवहार।

यद्धपि News Number आमतौर पर सनसनी फैलाने वाली या अपराधिक घटनाओं की विवेचना से परहेज़ करता है लेकिन कभी कभी कुछ वाकयात जब दिल दिमाग को झिंझोड़ते हैं तो साझा करना पत्रकारिता का धर्म बन जाता हैं। ...

पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान और सिद्धू साहब की रहस्यमय समानता !

पंजाब दो हिस्सों में बटा हुआ है और दोनों ओर के पंजाबी दिलखुश तो है ही साथ भी प्रत्येक हलचल तथा घटनाओं के प्रति सचेत भी रहते है। 3 साल पुरानी इमरान खान की तब्दीली हकूमत का विश्लेषण वहां की जनता ने शुरू कर दिया है लेकिन इस बार आइने के दूसरी ओर नवजोत सिंह सिद्धू को दिखाया जा रहा। बेशक यह ऐतिहासिक तथ्य है या नहीं लेकिन निसंदेह अर्थपूर्ण तो है ही। ...

कनाडा और भारत दुनियां के दो ऐसे देश है जहां बहुत सी सभ्यताएं बसती हैं और साथ साथ चलती हैं दूसरी समानता यह है कि पंजाबियों ने अपने खान पान से सबको प्रभावित किया है।

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प्राईवेट स्कूलों में हो रही बच्चों के माता पिता की लूट के खिलाफ मानव अधिकार मंच पंजाब मोर्चा ने मोर्चा खोल दिया है। ...

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19 नवम्बर, मानसा: पंजाब सरकार ने एस.वाई.एल के मुद्दे पर जो पंजाब हित में स्टैंड लिया है, भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) उसका समर्थन करती है और पंजाब सरकार किसी भी कीमत पर पानी की बूंद दूसरों को देने की इजाज़त नहीं देगी। ...

भूतपूर्व मुख्यमंत्री बीबी भट्ठल अकाली सरकार और मुख्यमंत्री बादल पर बरसी

पंजाब की भूतपूर्व मुख्यमंत्री बीबी राजिंदर कौर भट्ठल ने पंजाब की बादल सरकार पर निशाना साधा है। भट्ठल ने कहा है कि अपनी हार को देखते हुए बोख्लाहट में पंजाब सरकार केंद्र की मदद से पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रो में दहशत का माहौल पैदा कर रही है। सरकार का मकसद सियासी फायदा उठाना है। भट्ठल आज पंजाब कॉंग्रेस द्वारा शुरू की गई कांग्रेस लाओ पंजाब बचाओ मुहिम के तहत जिला संगरूर के गाँव घाबदां में पंजाब एक्सप्रेस बस के जरिये प्रचार करने पहुंची थी। ...