पंजाबियों की शान वखरी और गुजरातियों के कारनामे !

एक कहावत है कि पंजाबियों की शान अलग होती हैं और इसी में अगर जोड़ दिया जाए कि गुजरातियों के कारनामे अलग तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

यदि आप सोच रहे हो कि यह भारत के प्रधान मंत्री या गुरहा मंत्री के सन्दर्भ मे कोई रिपोर्ट है तो ऐसा नहीं है बेशक उनके भी कारनामे सामान्य नहीं होते।

अहमदाबाद में जनाब कृष्णन कुट्टी ने एक जगह खरीद कर वहां रेस्टोरेंट बनाने की योजना बनाई लेकिन जब उन्हे जमीन खरीदने के बाद मालूम पड़ा कि जिस जमीन पर वो रेस्टोरेंट बनाने की सोच रहे हैं वो सामान्य भूमि न होकर एक कब्रिस्तान है तो संशय में पड़ गए।

उस कब्रिस्तान में 16 वीं शताब्दी के सूफी संत की कब्र के अतिरिक्त अन्य भी कई सूफी हजरात की कब्रें थी तो दुविधा और बढ़ गई।

लिहाजा उन्होंने निश्चय किया और कब्रिस्तान में ही रेस्टोरेंट शुरू करने का इरादा बना लिया।इसके लिए कृष्णन कुट्टी ने वहां स्थापित कब्रों को चारो ओर से स्टील के जाल लगाकर सुरक्षित किया और उन्हें हरे पत्थर से मजार की शक्ल दे दी।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक कब्र को हरे रंग की चादर से ढक कर उसी के आसपास खाने की टेबल लगवा दी।

अहमदाबाद का यह न्यू लकी रेस्टोरेंट आजकल इसी वजह से सुर्खियों मे है कि वो भारत का एकमात्र ऐसा रेस्टोरेंट है जहां कब्रिस्तान में ग्राहक अपने मनपसंद खाने का आंनद लेते है।

बेशक इंसान का आखरी पड़ाव कब्र ही होता हैं लेकिन जीते जी शवो के बीच भोजन का आंनद लेना कुछ तो अलग अहसास जरूर कराता होगा हालांकि वहां आने वाले एक ग्राहक के अनुसार जब कुछ राजनेता शवो के बीच या लाशों पर राजनीति कर सकते है तो खाना क्यों नहीं खाया जा सकता।

वैसे भी जिंदा इंसान को लाश बनाकर उसपर राजनीति करने से तो बेहतर है कि खुद संसार यात्रा पूरी कर चुके फकीरों की उपस्थिति में मशरूम की सब्जी और काजू के आटे की रोटियों का आंनद लिया जाए क्योंकि भविष्य में क्या होना है उसकी चिंता में वर्तमान तो खराब नहीं करना चाहिए।