ਨਾ ਟਰੋਂ ਅਰਸੋ ਅਰ ਜਾਏ ਲਰੋ। ਨਿਸਚੈ ਕਰ ਅਪਨੀ ਜੀਤ ਕਰੋਂ ।।

जब आव की औध निदान परे, तब ही रण में तौं जूझ प्रौं ।

ना टरों अर्सुं अर जाय लरूं, निश्चय कर अपनी जीत करौं ।।

अर्थात आवश्यकता और समय पर मै युद्ध में युद्धरत हो जाऊं, निडरता से लड़ता हुआ, निश्चित रूप से अपने लिए विजय प्राप्त करूं।।

तीनो खेती विरोधी किसान कानूनों की वापसी की टीवी घोषणा करते समय भारत के प्रधान मंत्री जी ने भी उपरोक्त शब्द का संदर्भ दिया था लेकिन उन्होंने आरएसएस की विचारधारा के अनुसार इसका अर्थ बताते हुए उसमे भी संघी टोले की सोच दिखा दी।

प्रधान मंत्री जी ने वाणी के शुरुआती वाक्य ( दे एह शिवा वर मोहे अहै ) का अर्थ बताते हुए कहा कि हे देवी मुझे यह वरदान दे*

इस विषय पर सिख विचारकों में मतभेद हैं और वो स्वीकार नहीं करते कि दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी देवी देवताओं से वरदान मांगते होंगे, जिस प्रकार अरदास में भगौति को कुछ लोग भगवती कहते है लेकिन सिख विचारक तलवार व्याख्या करते हैं।

बहरहाल दिल्ली की सरहद पर तैनात गुरु के लाल का परिचय कराते है जो है सूबेदार ( रिटायर ) सरदार अमरजीत सिंह।

सूबेदार सरदार अमरजीत सिंह गुरदासपुर जिला के नानोकोट गांव के रहने वाले हैं जिसमे केवल 1200 वोटर है,  और 14 दिसम्बर 2020 से किसान आंदोलन के मोर्चे पर डटे हुए हैं तथा ट्रैक्टर ट्रॉली को ही अपना संसार बना चुके है।

सूबेदार साहब ने 1962 में चीन के विरूद्ध युद्ध में हिस्सा लिया और सेना पदक से सम्मानित किए गए।

उसके बाद 1965 में पाकिस्तान से होने वाले युद्ध में लाहौर पहुंचने वाली यूनिट मे थे और जिसके लिए इन्हे सेना ने सम्मानित किया।

1971 में पंजाब से दूर बंगाल की सरहद पर भारतीय सेना को इतिहास रचने के समय में अपनी जिम्मेदारी से दूर नहीं भागे।

तीनो युद्ध और तीनों युद्धों में मेडल जीतने वाले सूबेदार सरदार अमरजीत सिंह अब चौथा युद्ध लड रहे हैं जिसमे गोली, बारूद तो नहीं है लेकिन मौसम की मार और अपनी ही सरकार की बेरुखी बहुत सालती है।

85 वर्षीय सरदार साहब लगातार लगभग एक साल से ट्रैक्टर ट्रॉली को ही अपनी बैरक, कोठी या आने वाली पीढ़ियों के लिए किया जाने वाला त्याग समझ कर डटे हुए हैं।

हम इनके दीर्घायु होने की शुभकामनाएं प्रेषित करते है।

पंजाब चुनाव प्रचार या पंजाबियत को खत्म करने की साज़िश ?

कुल पांच राज्यों के चुनावों में भारत के सभी बड़े राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण उत्त प्रदेश एवम् पंजाब ही है क्योंकि बीजेपी की केंद्र सरकार के लिए भी अलग अलग कारणों से इनकी महत्ता समझी जा रही है। ...

भारत सरकार द्वारा मनाया गया संविधान दिवस और संविधान एवम् समाज का विरोधाभास !

भारत सरकार या दूसरे शब्दो में कहे तो भारतीय जनता पार्टी ने आज संविधान दिवस मनाया और संकेत दिए कि 26 जनवरी को मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस के स्थान पर 26 नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जाना ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि इतिहास, परमपराएं और धर्म निरपेक्ष संविधान बदलने का लक्ष्य बीजेपी नेता बता चुके है। ...

और इसी के साथ विश्व इतिहास में अहिंसक आंदोलन का इतिहास कायम हो गया !

26 नवम्बर एक ओर भारत सरकार संविधान दिवस के नाम पर उत्सव आयोजित करते हुए माननीय राष्ट्रपति से लेकर प्रधान मंत्री तक लोकतंत्र और संविधान के गुणगान में व्यस्त थे दूसरी ओर मुंबई हमले में शहीदों के परिवार अपनों को याद कर रहे थे तो दिल्ली की सरहदों पर असंख्य किसानों की उपस्थिति तानाशाही को चुनौती दे रही थी। ...

वर्तमान से भूतकाल की ओर धकेलने का प्रयत्न या कुछ और ?

दिल्ली के निकट नोएडा में एक पुस्तक का विमोचन करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने बयान दिया कि हिंदुस्तान का बटवारा एक ऐतिहासिक गलती थी और अब समय आ गया है कि इसे निरस्त किया जाए। ...

शतरंज एक खेल या स्ट्रेटिक प्लानिंग ?

शतरंज एक ऐसा खेल जिसकी शुरुआत हिंदुस्तान की जमीन से मानी जाती हैं और कुछ आलोचक इसे हिंसक मानसिकता को बढ़ावा देने वाला भी कहते है लेकिन इसका इतिहास और विवरण कृष्णा रूमी ने बेहतर तरीके से समझाया है। ...