कुछ तो है जिसकी जानकारी होना जरूरी है क्योंकि कंगना रनौत से पहले भी बहुत थी !

शायद इस संसार में कुछ कौमें जन्म ही इसलिए लेती हैं कि हक और इंसानियत के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी संघर्ष करती रहे लेकिन अपनी आन बान शान पर बट्टा ना लगने दे। लेकिन कुछ गैंग ऐसे भी होते है जिनका जन्म ही साजिशें रचने और इंसानियत के विरूद्ध सभी प्रयत्न करने के लिए हुआ लगता है।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक नवोदित अभिनेत्री है कंगना रनौत या राणावत जो मूल रूप से हिमाचल प्रदेश की रहने वाली है और इसकी फिल्मों के अतिरिक्त इसके विवादित बयान, उत्तेजक फोटो शूट और भारतीय प्रधान मंत्री श्री मोदी जी सहित विभिन्न बीजेपी नेताओ के साथ निकटता भी इसको चर्चा में बनाए रखती हैं।

हालांकि कंगना रनौत के देश एवम् माननीय बुजुर्गो के विरूद्ध बोले गए अपमान जनक बयानात के लिए कुछ लोग इसकी मानसिक स्थिति को जिम्मेदार ठहराते हैं लेकिन यदि गहराई से विवेचना की जाए तो लगता है कि ये अभिनेत्री किसी बड़ी साज़िश और बड़े खेल का हिस्सा या प्यादा है।

हाल फिलहाल में कंगना रनौत द्वारा सम्पूर्ण सिख समुदाय के विरूद्ध अपमानजनक टिप्पणी की गई जिसके विरोध में पहली FIR मुम्बई के खार थाने में सरदार अमरजीत सिंह ने दर्ज कराई है। जो आईपीसी धारा 295 (31) में दर्ज हुई है।

इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे और उन्होंने ने पुलिस कमिश्नर मुंबई तथा गृह मंत्री महाराष्ट्र से मिलकर कंगना रनौत की तुरन्त गिरफ्तारी तथा यदि मानसिक रूप से बीमार है तो मानसिक अस्पताल में उचित इलाज कराने की मांग की गई।

वैसे जो लड़की हिमाचल प्रदेश से मुंबई आकर फिल्म इंडस्ट्री में एस्टेब्लिश हो सकती हैं वो अपना भला बुरा ना समझती हो ऐसा सम्भव नहीं लगता क्योंकि यदि कोई मानसिक बीमार हो तो भी ऐसा नहीं हो सकता कि सिख समुदाय के विरूद्ध अनर्गल बकवास करने की हिम्मत कर सके।

शायद राज बड़ा गहरा है जिसकी परते इसकी गिरफ्तारी और सख्त पूछताछ के बाद ही सामने आएगी क्योंकि आज की परिस्थिति में बीजेपी या केंद्र सरकार का बड़े से बड़ा नेता भी इसकी मदद नहीं कर सकता क्योंकि यूपी, पंजाब सहित पांच राज्यों में चुनाव है और कहीं भी बीजेपी पंजाब VOTES को नाराज नहीं करना चाहेगी, दूसरा सिखो की सेवा भावना को देखते हुए गैर सिख यहां तक कि हिन्दुत्व वादी भी सिख समाज के विरूद्ध पोलराइज नहीं होंगे।

फिर अचानक ऐसा बयान क्यों दिया और इसकी जड़े कहां तक जाती हैं ?

पंजाब चुनाव प्रचार या पंजाबियत को खत्म करने की साज़िश ?

कुल पांच राज्यों के चुनावों में भारत के सभी बड़े राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण उत्त प्रदेश एवम् पंजाब ही है क्योंकि बीजेपी की केंद्र सरकार के लिए भी अलग अलग कारणों से इनकी महत्ता समझी जा रही है। ...

भारत सरकार द्वारा मनाया गया संविधान दिवस और संविधान एवम् समाज का विरोधाभास !

भारत सरकार या दूसरे शब्दो में कहे तो भारतीय जनता पार्टी ने आज संविधान दिवस मनाया और संकेत दिए कि 26 जनवरी को मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस के स्थान पर 26 नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जाना ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि इतिहास, परमपराएं और धर्म निरपेक्ष संविधान बदलने का लक्ष्य बीजेपी नेता बता चुके है। ...

और इसी के साथ विश्व इतिहास में अहिंसक आंदोलन का इतिहास कायम हो गया !

26 नवम्बर एक ओर भारत सरकार संविधान दिवस के नाम पर उत्सव आयोजित करते हुए माननीय राष्ट्रपति से लेकर प्रधान मंत्री तक लोकतंत्र और संविधान के गुणगान में व्यस्त थे दूसरी ओर मुंबई हमले में शहीदों के परिवार अपनों को याद कर रहे थे तो दिल्ली की सरहदों पर असंख्य किसानों की उपस्थिति तानाशाही को चुनौती दे रही थी। ...

वर्तमान से भूतकाल की ओर धकेलने का प्रयत्न या कुछ और ?

दिल्ली के निकट नोएडा में एक पुस्तक का विमोचन करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने बयान दिया कि हिंदुस्तान का बटवारा एक ऐतिहासिक गलती थी और अब समय आ गया है कि इसे निरस्त किया जाए। ...

शतरंज एक खेल या स्ट्रेटिक प्लानिंग ?

शतरंज एक ऐसा खेल जिसकी शुरुआत हिंदुस्तान की जमीन से मानी जाती हैं और कुछ आलोचक इसे हिंसक मानसिकता को बढ़ावा देने वाला भी कहते है लेकिन इसका इतिहास और विवरण कृष्णा रूमी ने बेहतर तरीके से समझाया है। ...