भारत सरकार की सफलताओं में एक सितारा और बढ़ गया।

दूरदृष्टी, पक्का इरादा और सही समय पर सही निर्णय किसी भी सरकार की सफलता एवम् उसके देश की प्रगति का पहला नियम होता है। इसी प्रकार विदेशनीति, देशनिती और चुनावी रणनीति अलग अलग विरोधी ध्रुव होने चाहिए लेकिन होते नहीं। और कम से कम भारत में तो वर्तमान समय में बिल्कुल नहीं होते।

15 अगस्त 2021 अफ़गान तालिबान द्वारा काबुल फतह और अमेरिका समर्थित राष्ट्रपति अशरफ गनी का पलायन एक मुख्य खबर थी जिस पर भारत सरकार ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन भारत सरकार पर तालिबान के अमेरिकी समर्थक विरोधियों को मदद एवम् समर्थन देने के आरोप लगते रहे।

टीवी डिबेट्स में शासन चला रही पार्टी बीजेपी के प्रवक्ताओं ने तालिबान को आतंकवादी संगठन बताते हुए इस तख्ता पलट की आलोचना की तथा बीजेपी राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सरकार कभी भी तालिबान को न मान्यता देगी न समर्थन करेगी।

दो दिन पहले भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को बड़ी चेतावनियां एवम् धमकियां देते हुए हमला करने में देर न लगाने से लेकर नेस्तनाबूद करने तक के दावे कर डाले।

5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने एकतरफा निर्णय लेते हुए जम्मू कश्मीर का लीगल स्टेटस बदल दिया था जिसके विरोध में पाकिस्तान सरकार ने भारत से अपने व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त करते हुए उच्चायोग का दर्जा भी कम कर दिया । जिसके साथ ही वाघा अटारी स्थित ट्रेड सेंटर को भी बंद करना पड़ा।

दूसरी ओर हकीकत की रोशनी में भारतीय विदेश मंत्रालय ने तालिबान से पर्दे के पीछे सम्पर्क बनाने के प्रयत्न जारी रखे एवं साइड लाइन मुलाकाते शुरू कर दी।

इन्हीं के बीच भारत सरकार द्वारा अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेंहू बतौर सहायता देने की घोषणा की गई। इससे पहले भी अफगानिस्तान को खाद्य सामग्री की मदद होती रही है लेकिन आमतौर पर यह अनाज ईरान के चाहबहार बंदरगाह से भेजा जाता था।

इस बार भारत सरकार ने कूटनीतिक चाल चलने का प्रयत्न किया और मांग की कि अफगानिस्तान भेजे जाने वाले गेंहू को पाकिस्तान अपने यहां से सड़क मार्ग से भेजने की अनुमति दे।

सियासी दांवपेंचों के बीच पाकिस्तान ने अपनी शर्तों पर भारत को 50 हजार टन गेंहू अफगानिस्तान भेजने की अनुमति दे दी है लेकिन शर्त रखी कि उसमे पाकिस्तान सरकार को भेजे जाने वाली सामग्री की तलाशी लेने का अधिकार प्राप्त होगा।

दूसरा और सबसे अहम पहलू यह है कि भेजे जाने वाले अन्न को पाकिस्तानी ट्रक वाघा बॉर्डर से उठाएंगे और अफगानिस्तान तक पहुंचाएंगे जिसके लिए उचित भाड़ा भारत सरकार वहन करेगी।

शायद अफ़गान जनता के सामने जब पाकिस्तानी ट्रक गेंहू उतारेंगे तो उन्हे अलग से समझाना पड़ेगा कि यह भारत के द्वारा भेजा गया है।

हालांकि भारत के परम ज्ञान वान नेतृत्व के निर्णयों पर कोई आशंका करना उचित नहीं है क्योंकि जब मोड़ी जी ने निर्णय ले ही लिया है तो कुछ सोचकर सोचा होगा ! केवल एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक बोरें पर माननीय प्रधान मंत्री जी की तस्वीर जरूर छपी हो जैसी करोना वैक्सीन सर्टिफिकेट पर छपी होती हैं।

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