ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੀ ਸ਼ਾਨ ਵੱਖਰੀ ! ਮੁੱਖਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਤੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਦੇ ਵੜੇ ਵੜੇ ਵਾਯਦੇ।

कहते तो यही है कि पंजाबियों की शान वखरी ( अलग ) वैसे भी यदि व्यवहार में देखा जाए तो सांस्कृतिक अंतर स्पष्ट नजर आता है और जब वोटर बड़े आंगन बड़े और लोग भी बड़े दिल वाले होंगे तो नेताओ की मजबूरियां हो जाती हैं कि उनके वायदे भी बड़े बड़े हो बेशक झूठे ही हो और बाद में जुमला कहकर भुला दिए जाएं।

यहां  किसी को छोटा या बड़ा साबित करना उद्देश्य नहीं है लेकिन जो पंजाबी संस्कृति की तुलना हिंदी भाषी क्षेत्रों और फिर गुजरात से करने में सक्षम हैं उन्हे मालूम होगा कि रोजमर्रा के कार्य व्यवहार में भी पंजाबी समाज में बर्तन से लेकर खाना और चाय के कप भी तुलानत्मक रूप से बड़े होते है।

आज दो चुनावी रैलियां आयोजित हुई एक वर्तमान मुख्यमंत्री चन्नी साहब की और दूसरी दिल्ली की अधूरी सरकार के मुख्यमंत्री केजरीवाल साहब की।

केजरीवाल साहब ने मोगा में घोषणा करते हुए वायदा किया कि यदि उनकी सरकार बनी तो वो प्रत्येक महिला को प्रतिमाह एक हजार रूपए सम्मान राशि देंगे।

हालांकि प्रत्येक नागरिक के खाते में 15 - 15 लाख आने के मुकाबले यह रकम बहुत कम है लेकिन फिर भी घोषणा करने में क्या जाता हैं बेशक उनकी अपनी दिल्ली सरकार ने कभी एक रुपया भी नहीं दिया हो।

कांग्रेस के मुख्यमंत्री चन्नी साहब ने ऑटो ड्राइवरों की सभा में अत्यन्त भावुक होकर बताया कि उन्होंने खुद भी ऑटो चलाया हुआ है और वो उनका दुख दर्द समझते है इसीलिए आज तक ऑटो ड्राइवरों पर जो भी पेंडिंग केस एवम् चालान है वो समाप्त कर दिए जाते है तथा पूरे पंजाब की सड़को पर पीली लाइन खींच कर उसे ऑटो के लिए रिजर्व किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त ऑटो ड्राइवरों को अलग से ड्राइविंग लाइसेंस और बेज लेने की आवश्यकता भी नहीं होगी तथा उनका रजिस्ट्रेशन ही लाइसेंस माना जाएगा।

यह तो पंजाब की जनता को फैसला करना है कि वो नेताओ के वायदों पर कितना भरोसा करते हैं और किसे वोट देते है लेकिन यूपी बिहार में यदि ऐसे वायदे किए जाते तो यकीनन वहां के वोटर भरोसा कर सकते थे जैसा पिछले चुनावों में बीजेपी ने 25 रुपए किलो देसी घी और स्मार्ट फोन देने का वायदा किया था जो अब 25 रुपए का सिर्फ 50 ग्राम मिल रहा है।

केजरीवाल साहब दिल्ली चुनावों में भी ऑटो रिक्शा वालो के वोटो को खास अहमियत देते रहे हैं हालांकि ऑटो यूनियन का आरोप है कि उन्होंने अपने वायदे पूरे नहीं किए और आज भी गरीब जनता को रिश्वत दिए बिना काम कराना पड़ता हैं।

चन्नी साहब द्वारा किए गए वायदे तो उन्हे अभी पूरे करके दिखाने पड़ेंगे क्योंकि फिलहाल सत्ता उन्हीं के पास है और यदि सभी राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए गए वायदे पूरे होने लगे तो निसंदेह हिंदी भाषी क्षेत्रों के युवा पंजाब में बसने का ख्वाब देखने लगेंगे।

वैसे भी भारतीय बेरोजगार युवा आजकल भटक ही रहे है कभी हरियाणा के मुख्यमंत्री के कहने पर कश्मीर से बहू और प्लॉट लेने के लालच में हरियाणा दौड़ते थे और कभी फोन लेने के लिए उत्त प्रदेश।

आशा करते हैं कि पत्रकारों के लिए भी कोई लुभावनी सी घोषणा जरूर होगी और सब बल्ले बल्ले करते हुए भंगडा पाएंगे।

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