भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया द्वारा घटिया स्तर की मर्दवादी सोच जाहिर की गई जिस पर प्रश्न चिन्ह खड़े किए जा रहे हैं।

“When [Modi] brought in the three farm laws, that was his 56-inch chest. Now when he is repealing them, it is his 65-inch chest.”

Arnab Goswami’s panelist and BJP member Gaurav Bhatia,

ये कहना है भाजपा के गौरव भाटिया का। विमर्श में छाती के साइज को लाना एक मर्दवादी सोच है। इसका विरोध भाजपा के अंदर से होना चाहिए। भाजपा के अंदर भी महिला नेता हैं। महत्वाकांक्षी भी हैं। उन्हें गौरव भाटिया को समझाना चाहिए कि विमर्श में छाती के साइज को लाना गलत बात है। ये मान लेना है कि भारत में अब कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी ही नहीं। जब कोई भाजपा की महिला प्रधानमंत्री कोई आर्थिक सुधार की तरफ कदम उठाएगी तो क्या गौरव भाटिया तब भी छाती/सीना विमर्श करेंगे? और जब 'आन्दोलनजीविओं' के दबाव में भाजपा की कोई महिला प्रधानमंत्री बिल को वापस लेंगे, सवर्ण शहरी मिडिल क्लास का भारत हार जाएगा और 'देश विरोधी ताकतें' जीत जाएंगी तो क्या तब भी गौरव भाटिया हमें समझायेंगे कि प्रधानमंत्री की छाती का साइज दस इंच बढ़ गया है?

छाती कितने इंच का है ऐसा विमर्श कोई महिला नहीं करती है। छाती विमर्श मॉडलिंग या फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित रहे तो ठीक है। देश के प्रधानमंत्री की छाती का साइज हम जानकार क्या करेंगे? बीजेपी प्रवक्ता का संस्कार घटिया है। सड़क छाप है। 

गौरव को अपनी गंदी मर्दवादी सोच सबके सामने नहीं लाना चाहिए। हमारी भाषा में वैसे भी कई सारे पूर्वाग्रह भरे हुए हैं। इतना ऊपर बैठा आदमी विमर्श में अपनी छाती के साइज को लाये, ये देश के लिए अच्छी बात नहीं है।

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