बाबा नानक आलम दा फकीर मुस्लिम दा पीर ।।

गुरु नानक देव सिखो का गुरु, आलम का फकीर और मुस्लिम का पीर !

यह लोकोक्ति पाकिस्तानी पंजाब के गवर्नर ने अपने भाषण में बोली जब वो धन गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए उपस्थित थे।

श्री ननकाना साहिब पाकिस्तान में गुरु नानक देव जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया और इस अवसर पर तीन दिन के कार्यक्रम में नगर कीर्तन का भी आयोजन हुआ।

तीनो दिन परम्परा के अनुसार सुबह प्रभात फेरी निकाली गई, दिन में शब्द कीर्तन हुए तथा अटूट लंगर वर्ताया गया जिसमे स्थानीय मुस्लिम समाज ने भी बढ़ चढ़कर अपनी हिस्से दारी निभाई क्योंकि उनके अनुसार बाबा नानक पर उनका हक पहले है बाकी आने वाले मेहमान बाबा नानक के बेटे बेटियां और उनके बिछुड़े भाई बहन है।

गुरु पर्व के मौके पर भारत से लगभग तीन हजार श्रद्धालुओं ने अपनी हाजरी लगाई और इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवम् कनाडा से भी संगत हाजिर थी विशेष रूप से कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया राज्य के वेंकुवर के निकट बसे मिनी पंजाब कहलाने वाले सरि कस्बे की महिलाओ के जत्थे की चर्चा रही।

नगर कीर्तन को स्थानीय मुस्लिम युवकों ने ह्यूमन चेन बनाकर सम्मान दिया। सुरक्षा के लिहाज से निसंदेह वहां के सुरक्षा कर्मी विशेष अलर्ट पर थे लेकिन उन्हें सादा कपड़ों में सिर ढककर तैनात किया गया था।

नगर कीर्तन का उल्लेखनीय बिंदु कभी कालू का चक कहलाने वाले श्री ननकाना साहिब के मुस्लिम समुदाय द्वारा की गई सेवा एवम् सम्मान को माना जाना चाहिए क्योंकि इस अवसर पर सिख मर्यादा का सम्मान करते हुए किसी ने भी टोपी ओढ़कर आने से परहेज़ किया और सम्मान देते हुए सिर पर रूमाल या कपड़ा बांधकर हाजिरी लगाई तथा सेवा की।

निसंदेह यह पर्व ननकाना साहिब के स्थानीय निवासियों के लिए तो यादगार पल होता ही है लेकिन वहां के दुकानदारों के लिए भी साल भर की इकठ्ठा आय का साधन होता हैं।

इस अवसर पर दूर दूर से अस्थाई दुकानें लगाने वाले भी बहुतायत में आते है जिनमे पेशावर से सूखे मेवे ( Dry fruits ) और फैसलाबाद एवम् लाहौर से कपड़ा व्यापारी विशेष रूप से अपनी दुकानें लगाते है।

सामान्य दिनों में देखा जाए तो ननकाना साहिब को कोई बड़ा शहर नहीं कहा जा सकता और वहां के बाजारों या गलियों में खुली कसाई की दुकानें तथा सड़क पर बिकते कबाब पाकिस्तानी पंजाब के बाकी हिस्सों की तरह नजर आते है लेकिन इन तीन दिनों के दौरान ऐसी सभी दुकानें एवम् ठेले बंद रहते है। विशेषकर बीफ पर खास तौर से पाबन्दी रखी जाती हैं।

बेशक बाबा नानक और उनकी शिक्षाएं तथा जीवन शैली किसी धर्म विशेष की सीमाओं में बंधकर नहीं देखी जा सकती क्योंकि बाबा नानक सभी के लिए और सदा के लिए है।

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