पंजाब केसरी लाला लाजपतराय जी की पुण्यतिथि पर विशेष।

लाल - बाल - पाल, आज़ादी की लड़ाई के समय कांग्रेस के ये तीन नाम गर्म दल के नाम से जाने जाते थे और उस समय अंग्रेज़ सरकार इनकी तस्वीर से भी खौफ खाती थी।

लाला लाजपतराय जी का जन्म वर्तमान भारतीय पंजाब के मोगा में पंजाबी जैन परिवार में हुआ था लेकिन जीवन में ये महर्षि दयानन्द सरस्वती जी से बहुत प्रभावित रहे।

कुछ समय मोगा और हिसार में वकालत करने के बाद लाला जी ने उस समय के वृहत पंजाब की राजधानी लाहौर का रुख कर लिया। 

आप आर्य समाज आंदोलन से जुड़े और पंजाब में आर्य समाज की स्थापना में बहुत योगदान दिया तथा साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में डीएवी स्कूल्स की स्थापना में भी मुख्य भूमिका निभाई।

आर्थिक दृष्टिकोण से आपकी दूरदर्शिता थी कि किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए समय के साथ चलना चाहिए और उसी सोच से आपने लक्ष्मी बीमा कंपनी तथा पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की।

वर्तमान पाकिस्तान सरकार को वर्तमान भारतीय हिन्दुत्व वादी सरकार की तुलना में धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि आज भी लाहौर में लाला लाजपतराय जी द्वारा स्थापित बिल्डिंग जिसमे लक्ष्मी बीमा कंपनी का दफ्तर था उसे "लक्ष्मी चौक" ही कहा जाता हैं जिसके साथ प्रसिद्ध फूड स्ट्रीट "ग्वाल मंडी" स्थित है।

जब अंग्रेजी साम्राज्य द्वारा जन विरोधी कानून लादने शुरू हुए और उसके लिए हिंदुस्तान में साइमन कमीशन भेजा गया तो लाला लाजपतराय जी के नेतृत्व में लाहौर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया लेकिन क्रूर अंग्रेज़ सरकार ने निहत्थे नागरिकों पर लाठी चार्ज किया जिसमे मयो अस्पताल के पास लाला लाजपतराय घायल हो गए और 17 नवम्बर 1929 को देश की आज़ादी के लिए कुर्बान हो गए।

पंजाब का खून और उबाले ना मारता, ऐसा कैसे हो सकता था और एक महीने के अंदर ही क्रूर सांडर्स को उसके किए की सजा दे दी गई जिसके नतीजे में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को भी फांसी के फंदे चूमने पड़े।

पंजाब के शेर लाला लाजपतराय जी की पुण्य तिथि पर NewsNumber परिवार उन्हे सादर नमन करता है।

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देश की आज़ादी से पहले भी नगर सेठ होते थे और दिल्ली में लाला छुन्नामाल जैसे बहुत से नाम इज्जत से इतिहास का हिस्सा हैं जो मुगलिया तख्त को भी पैसा उधार देने की कुव्वत रखते थे। ...