कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानमती ने कुनबा जोड़ा ! मगर कुनबा जुड़ तो गया ना, अब टूटने से बचाना एक अहम सवाल होना चाहिए।।

भारतीय उपमहाद्वीप के आंतरिक हालात और विभिन्न घटनाओं को लेकर बनाए जा रहे चुटकुलों तथा मीम्स के बीच अक्सर सामान्य नागरिकों से बहुत कुछ या तो छिपा लिया जाता है या खुद ही समझने से इंकार कर देते है क्योंकि तमाशा देखने की आदि भीड़ को बैठा कर सत्संग नहीं सुनाया जा सकता।

अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के अफगानिस्तान में तालिबान शासकों ने पॉवर शो कर दिया या दूसरे शब्दो मे सैनिक परेड निकालनी शुरू कर दी जिसे देखकर भारतीयों को गणतंत्र दिवस परेड का ध्यान जरूर आ सकता है।

तालिबान की इस परेड में अमेरिकी हमर, अमेरिकी एवम् रूसी हथियारों से लेकर पारम्परिक एवम् सैनिक वर्दियों में तालिबान लड़ाके थे तो उनके उपर छोड़े गए या छीने गए अमेरिकी तथा रूसी हेलीकॉप्टर उड़ाए जा रहे थे। परेड के बाद तालिबान कमांडर्स ने अफ़गान पार्लियामेंट में सुरक्षा आदि विषयों पर बैठक के चित्र साझा किए जिसमे कमांडर्स बंदूकों के साथ बैठे दिखाई दे रहे थे।

सीएनएन सहित सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस समाचार को प्रमुखता से स्थान दिया है और साथ में यह जरूर लिखा है " पार्लियामेंट जो भारत द्वारा बनाई गई तथा जिसका उद्घाटन प्रधान मंत्री मोड़ी एवम् राष्ट्रपति गनी ने किया था"

बेशक पार्लियामेंट की बिल्डिंग बहुत सुंदर बनी है और शायद उस समय इसके निर्माण पर 22 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे लेकिन इसके चित्र साझा करना क्या संकेत देता है इस विषय पर जरूर विचार करना चाहिए।

उपमहाद्वीप के दूसरे महत्वपूर्ण देश पाकिस्तान में भी कोई राजनीतिक भूचाल आने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि अदालत द्वारा निकम्मे घोषित हो चुके पूर्व प्रधानमंत्री मियां नवाज़ शरीफ़ ने न केवल अदालत पर आरोप लगाए हैं अपितु उन पर लगाए गए प्रतिबन्ध हटाए जाने की अपील भी दायर कर दी है।

क्योंकि ऐसा समझा जाता है कि वहां राजनीति भी आर्मी हेडक्वार्टर से निर्देशित होती हैं और पिछले दो तीन महीनों से नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के नेता उधर देख कर चुप थे तो शायद इमरान खान को बदलने का समय आ चुका हो या कोई परवर्तन होने वाला हो जिसमे नवाज़ शरीफ़ की वतन वापिसी भी है और समझा जा रहा है कि ऐसा होने पर शायद भारत पाकिस्तान सम्बन्धों में तल्खी कम हो।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण भारत के सबसे शक्तिशाली समझे जाने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बयानात हैं जिनके विषय पर भारतीय मीडिया में कोई विशेष चर्चा नहीं हुई।

पुलिस कॉलेज से कामयाब होकर निकले नए पुलिस अफसरों से बात करते हुए अजित डोबल ने कहा कि सीमा पर तैनात शत्रुओं के अतिरिक्त देश के अंदर भी शत्रु स्थित है और उनसे भी युद्ध आवश्यक हैं क्योंकि ये बौद्धिक शत्रु बंदूकों से नहीं अपितु विचारों से लैस होते है।

इसे पुलिस का राजनीति करण करना और यदि विरोधी या असहमत विचारो को दबाना पुलिसिंग कर्तव्य है तो इस बयान के साथ ही भारत से लोकतंत्र की विदाई निश्चित रूप से मान लेनी चाहिए।

एक अन्य बैठक में अजीत डोवाल द्वारा असहमतियों और बहु संस्कृति से देश के टुकड़े होने की आशंका वयक्त की, यद्धपि इस वाक्य को लेकर भारत से बाहर काफी चर्चा हुई लेकिन इसे भी आशंकाओं के घेरे में रखा जा सकता है।

नौकरशाह या सलाहकार और राजनेता में यह बहुत बड़ा अंतर होता हैं कि नौकरशाह की आलोचना नहीं की जाती जबकि राजनेताओं द्वारा बोले गए वाक्यों की समीक्षा करते हुए आलोचना से लेकर मखौल तक किया जा सकता है हालांकि राजनेताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण बयान पदेन सलाहकार/नौकरशाह देते है।।

संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का मेला खत्म और इसके साथ ही बदलाव होने के संकेत सामने आना शुरू।।

अल्लाह अल्लाह खैर सल्लाह और इसी के साथ 2021 का संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का अधिवेशन सम्पूर्ण हुआ लेकिन अपने जीवन काल के अंतिम चरण में भविष्य के बहुत से संकेतो को स्पष्ट कर गया जिन्हे भारत पाकिस्तान या उपमहाद्वीप की शांति, सुरक्षा के दृष्टिकोण से समझना जरूरी हैं। ...

भारत और पाकिस्तान एक ही देश के दो टुकड़े और परम्परागत युद्ध के साझीदार ।

भारत और पाकिस्तान दो संप्रभु देश है बेशक कुछ समय पहले तक एक ही भूभाग और एक ही देश होते थे। एक बार जनरल अयूब खान ने नेहरू जी के आगे प्रस्ताव रखा था कि दोनों देश चाहें तो संयुक्त सेना रख सकते है जिससे काफी बचत होगी, उनके जवाब में नेहरू जी ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो फिर युद्ध किससे होगा ? बेशक आम जनता युधोंमाद में एक दूसरे को शत्रु समझने लगती हैं लेकिन प्रोफेशनल आर्मी के लिए लड़ाई लडना भी एक कार्य है बाकी तो जनता के लिए भावनात्मक नारे लगाए हैं। आज पाकिस्तान सेना दिवस मना रहा है, इसी अवसर पर एक भारतीय सैनिक की कहानी जिसका अपना अलग ही रेकॉर्ड बना था ...

भारत और पाकिस्तान एक जमीन के दो टुकड़े लेकिन आम आवाम का क्या अनुभव होता है ?

दक्षिण एशिया के दो पारम्परिक शत्रु कहलाने वाले देश जो कभी एक ही होते थे लेकिन सियासत ने बांट दिए और तक राजनेताओं के लिए एक दूसरे के नाम लिए राजनीति की करने की कल्पना भी नहीं हो सकती। असगर वजाहत साहब उर्दू अदब का जाना माना नाम और उनके शब्द एक सत्य घटना के विवरण के साथ तथा इसी के साथ बुशरा अंसारी का वायरल हुए गीत का चित्र। ...