तेजी से रेडिक्लाईजेशन और नफरत की आग में झुलसता बारूद के ढेर पर बैठा भारत !

भारत !

एक देश जिसे दुनियां उसकी सॉफ्ट पॉवर, सर्वधर्म समभाव, लोकतंत्र और समाजिक सौहार्द के कारण आदर सम्मान की नज़रों से देखती थी। 

अभी अधिक समय नहीं हुआ है जब हिंदुस्तान से टूटकर बने पाकिस्तानीओ को दुनियां के अधिकांश देशों में वीजा देने से इंकार किया जाता था और समझा जाता था कि पाकिस्तानी मुस्लिम होने का अर्थ है कट्टरवाद से प्रभावित मानसिकता वाला होना।

लेकिन जिया उल हक के साथ ही वहां की जनता एवम् नेताओ को समझ आ गया कि कट्टरता और नफरत किसी भी समाज को ऐसे नरक की दलदल में धकेल देती हैं जहां से वापिस नामुमकिन नहीं तो बहुत मुश्किल जरूर होती हैं और लगभग 40 साल बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा दीवाली की शुभकामनाएं अलग से प्रेषित की गई तथा वहां के विदेश मंत्रालय द्वारा विश्व भर में दिवाली मनाने वाले गैर मुस्लिम हिन्दुओं/सिखो को अलग से मुबारकबाद दी गई। यहां तक कि मुख्य विपक्षी नेता मरियम नवाज़ साहिबा ने भी विश्व के हिन्दू समुदाय को दिवाली की शुभकामनाए भेजी बेशक लिखा गया विश्व भर था किन्तु सभी जानते है कि भारतवासियों को लक्ष्य करके संदेश दिया गया था।

कथित लोकतांत्रिक भारत महान की राजधानी की सरहदों पर घर खेत छोड़कर सड़क पर बैठे किसानों के धरने को लगभग एक साल होने को है लेकिन कथित जनकल्याण वाली सरकार के पास उनसे बात करने का समय भी नहीं निकला।

किसान आंदोलन को तहस नहस करने के लिए निश्चित रूप से सरकारी एजेंसियो पर हिंसा और अराजकता फैलाने के आरोप लगते रहे है लेकिन 700 निर्दोष किसान आंदोलनकारियों की शहादत के बावजूद सरकार की संवेदनशीलता को काठ मार चुका है।

पिछली रात सिंघू बॉर्डर पर जहां पंजाब और हरियाणा के किसानों को ट्रॉलियां बहुतायत में हैं वहां किसानों के टैंट हाउस आग की चपेट में आ गए और बताया जाता हैं कि किसानों का न केवल भारी नुकसान हुआ अपितु उन्हे समय पर कोई सरकारी या प्रशासनिक मदद भी नहीं पहुंची।

इस सम्बन्ध में किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने मीडिया से बात करते हुए बहुत बड़ा बयान दिया और बताया कि सभी किसान नेता एवम् कार्यकर्ता दीवाली की सुबह से ही आशंका जता रहे थे कि कुछ शरारती तत्व त्यौहार पर गड़बड़ी करने की साज़िश रच सकते है जिसके लिए सभी जिम्मेदार आंदोलकारी घूम घूम कर किसानों को सचेत कर रहे थे।

उनके अनुसार जैसे ही वो आग लगने वाले स्थान से कुछ दूर पहुंचे तो किसानों ने कुछ गुंडों को आग लगाकर भागते देखा जो निकट के मन्दिर की ओर भागे थे। पीछा करने वाले युवक जब तक मन्दिर के निकट पहुंचे तब तक साजिशकर्ता वहां से गायब हो चुके थे।

बाद में सिरसा साहब के अनुसार मन्दिर के पुजारी ने बताया कि कुछ लड़के मन्दिर में भी आग लगाने की कोशिश कर रहे थे किन्तु पुजारी द्वारा शोर मचाने तथा किसान वालंटियर्स को देखकर वो भाग गए।

सिरसा साहब ने बयान दिया है कि सरकार की शह पर गुंडे मन्दिर को आग लगाकर उसका इल्ज़ाम किसानों पर लगाने की साजिश बनाकर आए थे जिससे आंदोलन को हिन्दू बनाम सिख के सांप्रदायिक दंगो में बदला जा सके। यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नेताओ की छोटी सी रैली में खड़ी रहने वाली फायर ब्रिगेड की कोई गाड़ी इतने बड़े आंदोलन स्थल के आसपास भी नहीं है और रात आग लगने पर भी कोई फायर ब्रिगेड की मदद उपलब्ध नहीं हुई।

इसके अतिरिक्त भारत के उत्तर पूर्वी राज्य त्रिपुरा से निरन्तर हिंसा की खबरे प्राप्त हो रही हैं लेकिन सरकार नियंत्रित भारतीय मीडिया इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है जिसके कारण सोशल मीडिया पर भारतीय टीवी चैनल्स को गोदी मीडिया से पेडिग्री मीडिया की संज्ञा मिल चुकी हैं।

गत दिनों दिल्ली के वकीलों की एक fact finding team ने त्रिपुरा का दौरा किया और दावा किया कि वहां सरकारी तंत्र की मदद से हिन्दुत्व वादी आतंकी अल्पसंख्यकों पर न केवल हिंसा और उनकी संपत्तियों को आग लगा रहे हैं अपितु उनके पूजा स्थलों को भी शहीद किया जा रहा है और उन्हें म्यांमार के रोहिंगि शरणार्थियों की तरह स्टेट लैस किए जाने की धमकियां दी जा रही है।

फैक्ट फाइंडिंग टीम के दो वकीलों पर UAPA कानून के तहत नोटिस जारी किए जाने के समाचार तो मिल ही रहे हैं लेकिन त्रिपुरा की आतंकी सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले हिंदुत्ववादी नेताओ के ट्वीट भी वायरल हो रहे बेशक उनके विरूद्ध सरकार द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही करने या बीजेपी पार्टी द्वारा उन्हे शांत करने के कोई समाचार नहीं हो।।

क्या इन हालातो में कोई भी समाज अथवा देश तरक्की कर सकता है ? निश्चित रूप से इसका उत्तर नकारात्मक ही होगा किन्तु यदि यह अलगाव और नफरत का जहर और अधिक बढ़ता गया तो भविष्य को सुरक्षित और संवार कर देखना सिर्फ पूरा ना हो सकने वाला ख्वाब ही होगा।

किसान विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भारतीय प्रधान मंत्री को किसान नेताओ का खुला पत्र।

19 नवम्बर सुबह नौ बजे भारत के अभी सूचना और प्रसारण माध्यमों पर भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अवतरित हुए। आशा की जा रही थी कि श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाए देने के लिए उनका संबोधन होगा क्योंकि शीघ्र ही पंजाब में चुनाव भी होने है।हालांकि उससे दो दिन पहले ही उनके निकटतम माने जाने वाले अमित शाह ने करतार पुर कॉरिडोर को दोबारा शुरू करने की घोषणा कर दी थी। ...

किसान आंदोलन स्थल सिंघू बॉर्डर दिल्ली में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर शोभा यात्रा एवम् एसकेएम द्वारा जारी प्रेस नोट।

21 नवम्बर 2021 भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा खेती विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद आज दिल्ली सरहद स्थित किसान आंदोलन स्थल पर श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के उल्लास में शोभा यात्रा निकाली गई और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आपसी चर्चा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। ...

सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल से हत्या के सम्बन्ध मे संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बीती रात दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित सिंघु बॉर्डर किसान मोर्चा स्थल से एक युवक का शव पुलिस बेरीकेट पर लटका हुआ पाया गया जिसे धारदार हथियारों से मारे जाने के साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्राप्त हुए है। ...

खाप व्यवस्था और किसान आंदोलन ! बाबा बन्दा सिंह बहादुर को दहिया खाप का प्रणाम।।

किसान आंदोलन और सरकार की साजिशें दोनों आमने सामने अपनी अपनी चाले चल रही है लेकिन हरियाणा के जाट समुदाय की दहिया खाप ने बीजेपी द्वारा फुट डालो राज करो की नीति का उत्तर अनाज से भरी ट्रॉलियां भेज कर दिया।। ...

किसान आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा हरियाणा सरकार को खुली चुनौती। सरकार बैकफुट पर।

हरियाणा के विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को गालियां दिए जाने और तीन किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में आज हरियाणा के टोहाना में महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। ...

भारत सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के विरूद्ध आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा विरोध दिवस।

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के साथ ही सरकार की उदासीनता से एक बार फिर आंदोलन को नई ऊर्जा देने की कवायत

छह महीने से दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आंदोलन को फिर से नई ऊर्जा देने की तैयारी ...

हमे भूल तो नहीं गए ? बेशक बच्चे भूल जाए लेकिन मां बाप दुख सहकर भी बच्चो के लिए कुर्बानियां करते हैं।

बेमौसम बरसात के कारण किसान आंदोलन स्थल पर परेशानियां बढ़ी लेकिन उससे ज्यादा दुखद सरकार, मीडिया और दिल्ली वासियों द्वारा नजरंदाज किया जाना है। ...

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...