भारतीय सिनेमा जगत के बादशाह कहलाने वाले शाहरुख खान के बेटे के हाई प्रोफाइल ड्रग केस में नए खुलासों से सरकार संदेह के घेरे में।

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री जिसे बॉलीवुड के नाम से भी पहचाना जाता है न केवल बहुत बड़ा रोजगार और मनोरंजन देती हैं अपितु भारतीय संस्कृति और भारतीयता को विश्व में परिचित कराने में भी अहम भूमिका निभाती हैं जिसका असर अन्य देशों के अतिरिक्त पाकिस्तान में सबसे ज्यादा महसूस किया जा सकता है क्योंकि वहां भी बोलचाल में कठिन हिंदी के शब्द सुनाई देने लगे हैं।

अचानक हसती खेलती इंडस्ट्री को पहले महामारी के कारण झटका लगा फिर भारत में रेडिकल सोच के बढ़ने और धार्मिक आधार पर देशभक्ति एवम् देशद्रोही होने के सर्टिफिकेट बांटे जाने के बाद कई मशहूर हस्तियों को अपना प्रोफाइल लो करना पड़ा।

शायद आमिर खान के तुर्क राष्ट्रपति की पत्नी से मुलाकात से शुरू हुआ सिलसिला कब इंडस्ट्री की बुनियाद खोखली करने वालो की परते खोलने लगा इसका अहसास अब महसूस किया जा रहा है।

3 अक्तूबर को अचानक ब्रेकिंग न्यूज़ चली कि बॉलीवुड अभिनेता शाहरूख खान के 23 वर्षीय बेटे आर्यन खान को किसी क्रूज़ से ड्रग पार्टी करते हुए पकड़ा गया और जेल भेज दिया गया।

जांच पड़ताल करने वाले अधिकारी समीर वानखेड़े पर महाराष्ट्र सरकार के एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कई आरोप लगाए तथा कुछ वीडियो जारी किए जिसमे बीजेपी पार्टी के दो कथित नेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को घसीटते हुए नारकोटिक ब्यूरो के ऑफिस में ले जा रहे थे जिसमे से एक व्यक्ति पहले से कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

जमानत के लिए जब आर्यन खान की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई तो नारकोटिक ब्यूरो द्वारा उसका विरोध किया गया और बताया गया कि आर्यन खान किसी इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का हिस्सा भी हो सकता है इसलिए इसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए जिसमे सबूत के तौर पर उसकी किसी व्हाटसएप चैट का हवाला दिया गया।

यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आर्यन खान के पास से कोई नशीली वस्तु बरामद नहीं हुई थी और न ही टेस्ट में उसे नशे का आदि बताया गया था। कानून के जानकारों का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस भी बनता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के एक वर्डिकट के अनुसार इन स्थितियों में आरोपी को तत्काल जमानत मिलनी चाहिए थी वैसे भी यदि उस पर लगे आरोप सिद्ध हो जाते है तो भी उसको अधिकतम एक साल की सजा सुनाई जा सकती हैं जबकि आमतौर पर दो साल तक की सजा के केस में तत्काल जमानत दे दी जाती हैं।

इसी कड़ी में आरोप प्रत्यारोप के बीच जांच अधिकारी समीर वानखेड़े प्रेस के सामने आते हैं और नवाब मलिक द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हैं जबकि कार्यरत अधिकारी को निजी तौर पर प्रेस के सामने नहीं आना चाहिए क्योंकि आरोप स्टेट की ओर से ब्यूरो के माध्यम से लगाए जाते है किन्तु यहां ऐसा लग रहा था जैसे निजी स्वार्थ की लड़ाई चल रही हो।

इसी बीच एक स्वतंत्र गवाह सैम ने एफिडेविट देकर आरोप लगाया है कि नारकोटिक ब्यूरो के अधिकारी द्वारा 25 करोड़ रूपए वसूली के लिए शाहरुख खान के बेटे को फंसाया गया है जिसमे कथित बीजेपी नेताओं ने 8 करोड़ रूपए तत्काल समीर वानखेड़े को देने की बात उसके सामने की थी।

हकीकत तो उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच के बाद ही सामने आएगी किन्तु भारतीय मीडिया में जिस प्रकार की आशंकाए जताई जा रही है वो भारत की मोदी सरकार और भारत में होने वाले विदेशी निवेश के दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है।

यदि वास्तव में ही फिरौती या अवैध वसूली के लिए केस बनाया गया था तो क्यों न इसे सरकारी अपहरण का नाम दिया जाए ? वैसे भी इतने विवादों के बाद भारत सरकार को तत्काल आरोपी अधिकारी समीर वानखेड़े को पदमुक्त करके पारदर्शी जांच के आदेश दे देने चाहिए थे किन्तु ऐसा नहीं हो रहा जो हैरानी का कारण है।

कुछ पीत पत्रकारिता वाले इसमें केंद्रीय मंत्रियों की भी हिस्सेदारी का आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।

समीर वानखेड़े एवम् केंद्रीय सरकार के अधीन आने वाली एजेंसी पर लगे आरोपों को तब ज्यादा बल मिलता नजर आता है जब बीजेपी के कथित नेताओ के वीडियो और फोटो वायरल हो रहे है जिनमे से एक घोषित भगोड़ा अपराधी उसके बाद से गायब हैं और दूसरे डिसूजा नामक व्यक्ति का फोटो भी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दफ्तर में बैठा हुआ वायरल हो रहा है। डिसूजा नामक व्यक्ति को मनी लांड्रिंग किंग बताया जा रहा है।

लेकिन यदि भारत की केंद्र सरकार इस घटना पर चुप है तो क्या यह भी शक किया जा सकता है कि सरकार बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री को मुंबई से बरबाद करके दुबई शिफ्ट करने की किसी साज़िश पर कार्यरत है ?

यदि देखा जाए तो दक्षिण एशिया से क्रिकेट को भी धीरे धीरे यूएई शिफ्ट किया ही जा चुका है और वर्तमान सरकार के यूएई से मधुर सम्बन्ध भी सामने आ रहे हैं जब भारत के सबसे संवेदनशील राज्य कश्मीर के लिए सीधी उड़ान शुरू कर दी गई है।

कहते है कि बद से बदनाम बुरा होता है। क्योंकि शाहरुख खान का पारिवारिक इतिहास भारत की आज़ादी में उसके दादा एवम् नाना की कुर्बानियों का साक्षी हैं और दूसरा उसके नाम के साथ खान जुड़ा होना भी बीजेपी या आरएसएस के विरूद्ध रेडिकल सोच के कारण आरोप लगने की वजह बन सकता है तो भारतीय जनता के एक बड़े वर्ग द्वारा शाहरुख खान के प्रति सहानुभूति होना भी स्वाभाविक है।

क्योंकि समझा जाता है कि बीजेपी द्वारा सभी कदम चुनावी दांवपेंच को ध्यान में रखकर उठाए जाते है तो आशा करनी चाहिए कि मोदी सरकार द्वारा कम से कम अपनी साख और ईमानदार छवि बचाने के लिए ही इस केस की तुरन्त पारदर्शी, स्वतंत्र जांच कराएगी। शायद इसके बाद पीड़ितों को न्याय एवम् अपराधी को सजा के साथ कानून पर जनता का भरोसा मजबूत होगा।

लंबे विवाद के बाद जमानत पर रिहा हुए आर्यन खान के स्वागत के लिए उमड़ा जनसैलाब और इसका अर्थ।

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आर्यन खान से शाहरुख खान और नवाब मलिक के माध्यम से जलती हुई चिंगारी समीर दाऊद वानखेड़े के छप्पर तक !

भारत का महाराष्ट्र राज्य और उसकी राजधानी मुंबई जिसे ख्वाबों का शहर भी कहा जाता है। विश्व प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के साथ यह शहर भारत की आर्थिक राजधानी भी है। ...