भारतीय उपमहाद्वीप में नफ़रत और साम्प्रदयिकता की विषबेल का जिम्मेदार कौन ?

1857 सल्तनत ए हिन्द और बादशाह सलामत बहादुर शाह ज़फ़र जिन्हे खैबर से लेकर बर्मा तक की रियासतों, राजो, राजवाड़ों ने सम्राट घोषित कर दिया था जिनमे बहुसंख्यक गैर मुस्लिम कथित महाराजा थे।

विदेशी गोरों के विरूद्ध क्रांति का बिगुल बजा लेकिन असफल हो गए क्योंकि आस्तीन के सांपों ने अपने निजी स्वार्थों के लिए अपनी जी जनता से गद्दारी कर दी बेशक उसमे सिंधियां हो या कोई और।

क्रान्ति या स्वतंत्रता आंदोलन को बगावत का नाम मिल चुका था, उपमहाद्वीप का पहला पत्रकार वकार तोप से उड़ाया जा चुका था और दिल्ली से लेकर अंबाला तक क्रांतिकारियों की लाशे पेड़ों से लटक रही थी जिनमे अधिकांश मुस्लिम बुद्धिजीवी थे, धार्मिक नेता थे, साधु संत थे।

इसके बाद हिंदुस्तान को ईस्ट इंडिया कंपनी से छीनकर ब्रिटिश साम्राज्य के आधीन कर दिया गया जिससे लगता हैं कि खुद अंग्रेज़ो ने बगावत कराई होगी और इसी बहाने जमीन ए हिन्द से दिल्ली सल्तनत को खत्म करने का मौका तलाश किया होगा। 

लेकिन 1857 के गदर से ब्रिटिशर्स को स्पष्ट हो गया था कि यदि हिन्दुस्तानी जनता एकजुट हो गई या आपस मे विद्वेष खत्म हो गए तो उनकी ब्रिटेन वापसी मे क्षण भर की भी देरी नहीं लगेगी जिसके लिए एक साज़िश रची गई तथा वृहद हिंदुस्तान में हिन्दू और मुस्लिम दो ध्रुव बनाने शुरू कर दिए।

शायद आज यह कोई विश्वास भी नहीं कर सकता  कि कभी ऐसा भी समय था जब एक ही घर में एक भाई मस्जिद जाता था और दूसरा अपनी आस्था के अनुसार किसी मन्दिर, डेरे या दरगाह में लेकिन किसी को कोई अंतर नही पड़ता था। स्यालकोट ( वर्तमान पाकिस्तान ) में हकीकत राय के कुंवे के निकट ही एक पक्की कब्र है जिस पर लगे पत्थर पर लिखा है शमशाद अली वलद मक्खन लाल।

इसे ऐसे भी समझ सकते है कि आज भी सिख परिवारों ( केश धारी ) के बच्चो की शादियां सुगमता से गैर केश धारी पंजाबी परिवारों में होती हैं और कुछ समय पहले तक ही परिवार का एक बेटा केश जरूर रखता था बेशक बाकी बाकी रखे या ना रखे। अगली कुछ पीढ़ियों के बाद विशेषकर हिंदी भाषी क्षेत्रों में रहने वाले पंजाबियों के बच्चे हैरान होंगे कि ऐसा कैसे सम्भव है कि एक ही परिवार में सिख और नॉन सिख दो भाई हो !

इसी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरतों का नतीजा हिंदुस्तान का बटवारा होने तक पहुंच गया जिसके बाद उम्मीद की जाने लगी कि अब शांति और स्थिरता का युग आ सकता है लेकिन अंग्रेज़ो की बोई विषबेल तथा राजनीतिक स्वार्थ आड़े आ गए जिनसे पहले पाकिस्तान टूटा फिर धर्म के साथ साथ संस्कृति के नाम पर भी अलगाव पैदा होने लगे।

इतना सबकुछ होने के बावजूद यह प्रशंसनीय रहा कि उपमहाद्वीप में या दक्षिण एशिया में किसी भी सरकार/देश द्वारा दूसरे देश पर धर्म के नाम पर कभी कोई आरोप नहीं लगाए गए बेशक कितनी भी दुश्मनी रही हो। यहां भारत के दोनों पड़ोसी देशों की जनता की प्रशंसा करनी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान या बांग्लादेश में हिन्दू, सिख अल्पसंख्यक होने के बावजूद सुरक्षित रहे साथ ही उनके धार्मिक स्थलों को भी सरकार एवम् जनता द्वारा पूर्ण सुरक्षा मिलती रही।

अचानक 90 के दशक में भारत में एक नया अध्याय शुरू होता है और "मन्दिर वहीं बनाएंगे" के साथ आडवाणी रथ यात्रा शुरू कर देता है जिसके साथ ही जय श्री राम का वार क्राई जैसा नारा, त्रिशूल वितरण से लेकर धार्मिक उन्माद एवम् ध्रुवीकरण जिसका अंत अयोध्या की एतहसिक बिल्डिंग गिराने से होता है जिसे बाबरी मस्जिद के नाम की पहचान मिली हुई थी।

बाबरी मस्जिद के शहीद होने की प्रतिक्रिया में लाहौर का कृष्ण मंदिर तथा मुल्तान का सूर्य मन्दिर भीड़ के निशाने पर आ जाता हैं एवम् साथ ही ढाका बांग्लादेश में भी कुछ हिन्दू मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जाता हैं जिसके बाद दक्षिण एशिया के जिन देशों की जनता को एक साथ खड़ा होना चाहिए था वो धार्मिक विद्वेष की बेल सजाने लगती हैं।

इसको अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की सफलता माना जाना चाहिए कि दुनियां के सबसे शांत एवम् सहनशील आबादी को रेडिकलाईज कर दिया बेशक धर्म कुछ भी हो।

इसी दिमागी कट्टरवाद का फैलाव इतना बढ़ता गया कि सिर्फ अफवाहों पर ही सड़के लाल होने लगी जिसकी उदाहरण आज बांग्लादेश में नजर आया।

बंगाल की अपनी अलग संस्कृति है और बंगाली मुस्लिम भी दुर्गा पूजा को हमेशा श्रद्धा एवम् सम्मान से न केवल देखता है अपितु सहयोग भी देता है। 

गत कुछ वर्षो से भारत से समाचार दिए जाते रहे हैं कि यहां CAA एवम् NRC कानूनों की आड़ में मुस्लिम समाज पर अत्याचार किया जा रहा है बेशक उसमे अधिकांश प्रोपेगेंडा मुहिम का हिस्सा रहे होंगे। लेकिन गुजरात में गरबा पंडालों में मुस्लिम के प्रवेश पर रोक या लिंचिंग की झूठी खबरों को भी इसलिए बल मिलता रहा क्योंकि वर्तमान नेतृत्व की साख एवम् छवि उज्जवल नहीं थी।

उसपर भी भारतीय गृह मंत्री द्वारा बांग्लादेश के नागरिकों को दीमक बता देना कोढ़ में खाज से कम नहीं था नतीजतन बांग्लादेश में अफवाह फैली कि हिंदुओं ने दुर्गा पंडाल में कुरान पाक की बेहुरमती की है और पवित्र क़ुरआन को देवी प्रतिमा के पैरों में रखा हुआ है।

अफवाहों और झूठ की गति बहुत तेज होती है परिणाम स्वरूप भीड़ ने दुर्गा पंडालों पर हमला कर दिया जिससे भड़की सांप्रदायिक हिंसा में तीन निर्दोष इंसान अपनी जान जाया कर बैठे।

हिंसा की निन्दा होनी चाहिए बेशक किसी के द्वारा भी हो लेकिन कम से कम जब दुनियां विकसित और सभ्य हो चुकी हैं तब तो विचार करना चाहिए कि क्यों और कैसे कोई भी इस क्षेत्र के मूर्खो को महामूर्ख बना जाता हैं।।

भारतीय पंजाब को कश्मीर बनाने की साज़िश या किसी अनहोनी की आशंका !

अचानक लिए गए निर्णय के अनुसार भारतीय पंजाब के सीमा से 50 किमी रेडियस में बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देते हुए अधिकार दिए गए हैं जिसके अनुसार बीएसएफ कर्मी/अधिकारी किसी को भी गिरफ्तार कर सकते है, तलाशी ले सकते हैं और जांच पड़ताल कर सकते है। ...

ज्यूं ज्युं तेरा हुक्म है ......

1923 का हिंदुस्तान और जबर ब्रिटिश साम्राज्य ! रियासत नाभा के रीपुदमन सिंह को गद्दी से हटाने के विरूद्ध गंगसर जैतो में मोर्चा लगा और सरकारी ट्रेन से अहिंसक आंदोलन कर रहे सिखो को कुचल दिया गया कुछ ऐसे ही जैसे थार और फॉर्चूनर गाड़ियों के नीचे लखीमपुर के किसानों को कुचला गया है। ...

रेखा भारतीय फिल्म जगत का जीता जागता करिश्मा ! जन्मदिन पर विशेष बेशक इनके लिए ही कहा जाता है कि उम्र सिर्फ गिनती भर है।

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है......। और ख्यालों में न केवल आकर्षक सुंदर चेहरा सामने आता है अपितु एक नाम भी सामने आ जाता हैं जिसे बहुमुखी प्रतिभा की धनी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की अतुलनीय अभिनेत्री माना जाता है और उनका छोटा सा नाम "रेखा" जिसे शायद ही कोई होगा जो जनता न हो। ...

Farmer's lives matters. लेकिन भारत के बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश एवम् हरियाणा में सरकार इसका अर्थ भी नहीं समझती।

अमेरिका में एक नागरिक को पुलिस अधिकारी ने घुटने तले सांस घोट कर मार डाला था। क्योंकि मृतक अफ्रीकी मूल का था ( काला ) तो आरोप लगा कि पुलिस अधिकारी व्हाइट सुपरमैसी की भावना से ग्रस्त था जिसके कारण उसे काले व्यक्ति को देखते ही गुस्सा आ गया और उसने बेकाबू होकर उसकी सार्वजनिक स्थान पर हत्या कर दी। ...

भारत विश्व में सर्वाधिक फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है लेकिन तेजी और आपाधापी के युग में बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री की बुनियादों को भी याद रखना चाहिए।

भारतीय सिनेमा जगत और उसकी मुंबई फिल्म इंडस्ट्री जिसके जलवे दुनियां के कोने कोने में बिखरे पड़े हैं और आज तक भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री लाखो लोगो को रोजगार देती हैं। ...

भारत एक गणराज्य ! विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता तथा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश .

विश्व का दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश जिसे उसके लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता एवम् सॉफ्ट पॉवर के कारण उदाहरण के रूप में प्रतीत किया जाता था अचानक कैसे बदल गया ? क्योंकि 1948 में महात्मा गांधी के शरीर की हत्या करने वालो के गिरोह को अवसर मिला और आपदा में अवसर उठाते हुए उन्होंने गांधी के दर्शन तथा विचारो की हत्या शुरू कर दी। ...

भेड़िया ! एक ऐसा जंगली जानवर जिसका नाम सुनते ही दहशत होने लगती है बेशक इसकी प्रजाति के ही कुत्ते और इंसान का सदियों पुराना साथ हो।

मनुष्य और कुत्ते का साथ सदियों पुराना है लेकिन कुत्ते के मूल भेड़िए को कभी इंसानी साथ नहीं मिल पाया क्योंकि जंगली जानवर होने के बावजूद उसकी कुछ विशेषताएं है जो उसको अन्य जानवरों से अलग करती हैं। ...

क्या भारतीय विदेशनीति अपनी आज़ादी खो चुकी है और किसी बाहरी शक्ति के इशारों पर नाच रही है ?

शीर्षक है कि क्या भारतीय विदेशनीति अपनी आज़ादी किसी बाहरी शक्ति के इशारों पर नाचने लगी है या क्या वर्तमान सरकार विदेशी मामलों में कोई दृढ़ एवम् स्पष्ट निर्णय लेने में अक्षम साबित हो रही हैं। ...

भारत की बिगड़ती कानून व्यवस्था एवम् मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन होने के बावजूद बीजेपी सरकार तथा नौकरशाही द्वारा किया जा रहा अमानवीय व्यवहार।

यद्धपि News Number आमतौर पर सनसनी फैलाने वाली या अपराधिक घटनाओं की विवेचना से परहेज़ करता है लेकिन कभी कभी कुछ वाकयात जब दिल दिमाग को झिंझोड़ते हैं तो साझा करना पत्रकारिता का धर्म बन जाता हैं। ...

इक चतुर नार, करके सिंगार, मेरे दिल के द्वार ओ घुसत जात......... भारतीय सिने जगत के अनमोल सितारे महमूद को जन्मदिन मुबारक।

कलाकार की कला से कला और कलाकार को सम्मान देने की परम्परा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का एक प्रशंसनीय कदम रहा है। हीरो, हीरोइन, विलेंस की लंबी फेहरिस्त में कुछ नाम ऐसे भी हुए हैं जो फिल्मों के नहीं अपितु फिल्में उनके लिए बनती थी। ...

संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का मेला खत्म और इसके साथ ही बदलाव होने के संकेत सामने आना शुरू।।

अल्लाह अल्लाह खैर सल्लाह और इसी के साथ 2021 का संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का अधिवेशन सम्पूर्ण हुआ लेकिन अपने जीवन काल के अंतिम चरण में भविष्य के बहुत से संकेतो को स्पष्ट कर गया जिन्हे भारत पाकिस्तान या उपमहाद्वीप की शांति, सुरक्षा के दृष्टिकोण से समझना जरूरी हैं। ...

तेजी से बदलती भारतीय राजनीति या वैश्विक राजनीति के अनुसार नई दिशाएं एवम् नए बदलाव !

द्वितीय विश्व युद्ध के साथ ही न्यू वर्ल्ड ऑर्डर लागू हुआ, दुनियां को दो हिस्सों में बांट दिया गया जिसमे जो भी मार्शल कौम थी उन्हे भी संस्कृति को नजरंदाज करते हुए टुकड़ों में बांट दिया गया बेशक वो पंजाबी हो या कुर्द, अज़री, बलोच या मुस्लिम। ...

पटियाला राजघराने के कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस द्वारा इन्हे सम्मान दिए जाने का छुपा कारण !

1947 अंग्रेज़ो को हिंदुस्तान से जाना पड़ा और तीन शर्तो के साथ ब्रिटिश इंडिया को आज़ादी प्राप्त हुई जिसमे एक तो मुल्क का बटवारा था और दूसरा लगभग 600 प्रिंसली स्टेटस को निर्णय लेने का अधिकार कि वो चाहें तो भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बने या आज़ाद रहे। ...

भगतसिंह ! साजिशों का शिकार रहा अद्भुत व्यक्तित्व।

लेनिन, चे ग्वेरा, मार्क्स से लेकर किसी भी क्रांतिकारी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बिना किसी किसी परंतु के कहा जा सकता है कि भगत सिंह के विचार और कुर्बानी इनसे सबसे बहुत ऊंची थी क्योंकि भगत सिंह वो विराट नाम है जिसमे गांधी भी बसता था और गांधी को भी अपने दिलों दिमाग में भगत सिंह को बसाना पड़ा। ...

पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान और सिद्धू साहब की रहस्यमय समानता !

पंजाब दो हिस्सों में बटा हुआ है और दोनों ओर के पंजाबी दिलखुश तो है ही साथ भी प्रत्येक हलचल तथा घटनाओं के प्रति सचेत भी रहते है। 3 साल पुरानी इमरान खान की तब्दीली हकूमत का विश्लेषण वहां की जनता ने शुरू कर दिया है लेकिन इस बार आइने के दूसरी ओर नवजोत सिंह सिद्धू को दिखाया जा रहा। बेशक यह ऐतिहासिक तथ्य है या नहीं लेकिन निसंदेह अर्थपूर्ण तो है ही। ...

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा और असहज कर देने वाले दृश्य जिसके लिए घटना से अधिक रिपोर्ट करने वाले का दोष माना जा रहा है।

भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिका यात्रा से वापस दिल्ली लौट आए जहां उनके स्वागत हेतु विशेष आयोजन किया गया था। ...

इतिहास ही मेरे कर्मो का मूल्यांकन करेगा ! भारतीय उपमहाद्वीप का एक ऐसा व्यक्तित्व जिनकी शान में दुश्मन भी गुस्ताखी नहीं कर सकता बशर्ते इंसान हो।

एक खामोशी में बहुत से सवालों के जवाब होते है और उन्ही जवाबो में इतिहास की क्रूर कलम होती हैं जो सम्मानित या कलंकित करते समय केवल शुभ कर्मन के तराजू पर तोलती है कि किसको गांधी लिखना है और किसको गोडसे। ...

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा तथा राष्ट्रपति बाइडेन से मुलाकात ! भारतीय मीडिया एवम् कूटनीतिक दृष्टिकोण का अंतर।

एक ओर संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का अधिवेशन चल रहा है और दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के क्वाड गुट के सदस्य देशों के प्रमुखों को विशेष आमंत्रण पर भारतीय प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन डी सी में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात की। ...

नारायण ! नारायण ! यदि नई पीढ़ी को नारद मुनि नाम लिया जाए तो अचानक जो चेहरा सामने आता है उसको "जीवन" के नाम से पहचान मिली।

दक्षिण एशिया की नस्लों में एक सांस्कृतिक समानता या मानवीय विशेषता है कि यहां प्रतीकों को महत्व दिया जाता है जैसे एक पूरी पीढ़ी को रामायण सीरियल वाले अरुण गोविल में राम नजर आते थे। ...

कनाडा चुनावों में जस्टिन ट्रुडो की जीत में भारतीय मूल के नागरिकों का सहयोग और विश्व में फैले भारतवंशी।

शावा चरखा चनन दा से लेकर चिट्टा कुकड़ बनेरे ते जैसे पंजाबी लोकगीत बेशक भारतीय और पाकिस्तानी पंजाब की संगीत महफिलों से गायब हो रहे हो लेकिन सात समुंदर पार कनाडा, यूके से लेकर दुनियां भर में फैले हिन्दुस्तानियों ने अभी भी जीवित रखे हुए है। ...

Clashes of civilizations ! The remaking of New World order जॉन बोल्टन से बिपिन रावत तक !

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस जनरल बिपिन रावत द्वारा दिया गया बयान कि अगला युद्ध देशों या विचारधारा का युद्ध नहीं होगा अपितु संस्कृतियों के बीच महायुद्ध होगा जिस पर अपनी दुशांबे बैठक में चीन के विदेश मंत्री ने आपत्ति जताई और भारतीय विदेश मंत्री ने न केवल इसके लिए सफाई पेश की अपितु भारत सरकार को बिपिन रावत के बयान से एकदम अलग कर लिया। ...