Farmer's lives matters. लेकिन भारत के बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश एवम् हरियाणा में सरकार इसका अर्थ भी नहीं समझती।

अमेरिका में एक नागरिक को पुलिस अधिकारी ने घुटने तले सांस घोट कर मार डाला था। क्योंकि मृतक अफ्रीकी मूल का था ( काला ) तो आरोप लगा कि पुलिस अधिकारी व्हाइट सुपरमैसी की भावना से ग्रस्त था जिसके कारण उसे काले व्यक्ति को देखते ही गुस्सा आ गया और उसने बेकाबू होकर उसकी सार्वजनिक स्थान पर हत्या कर दी।

इस घटना के बाद पूरा अमेरिका भड़क उठा और अंततः दोषी पुलिस वाले को कानून ने सजा सुना दी। 

लेकिन भारत अमेरिका से एकदम विपरीत है जिसका एक उदाहरण तो हरियाणा राज्य के करनाल में पिछले महीने देखा गया था जब स्थानीय आईएएस अफसर पुलिस वालो को निर्देश दे रहा था कि किसानों का सिर फोड़ दो। एक किसान की मृत्यु के बाद धरना प्रदर्शन हुए लेकिन दोषी अफसर के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई।

कल लगभग इसी प्रकार की घटना में उत्तर प्रदेश राज्य के लखीमपुरी खीरी जिले में बीजेपी द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमे उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने आना था। क्योंकि पूरे भारत में किसानों द्वारा तीन किसान विरोधी कानूनों के विरोध में धरने प्रदर्शन चल रहे तो यहां भी किसानों ने काले झंडे दिखाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का निर्णय किया।

इस क्षेत्र के सांसद भारत सरकार की मोदी सरकार ने गृह राज्य मंत्री है और उनकी एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमे वो सार्वजनिक रूप से धमकी दे रहे हैं कि जो लोग उनके मंत्री बनने से पहले का इतिहास नहीं जानते वो समझ ले कि किसानों को दो मिनिट में सीधा कर देंगे।

और किसानों के अनुसार उन्होंने अपना काम करके दिखा दिया। आरोप है कि मंत्री जी का बेटा कुल तीन बड़ी गाड़ियों में प्रदर्शन कर रहे किसानों की सड़क पर आया तथा किसानों को अपनी कारों से कुचलता हुआ खुद तो भाग गया किन्तु कथित रूप से उसके कुछ साथी मौके पर ही पकड़े गए।

इस घटना में अभी तक 5 किसानों की शहादत सहित कुल 9 लोगो के मारे जाने की खबर है जिनमे एक किसान का 20 वर्षीय युवा भी है।

अचानक हुए इस हादसे को अधिकांश लोग "नरसंहार" की संज्ञा दे रहे हैं जिसके तुरन्त बाद किसान नेता राकेश टिकैत अपने काफिले के साथ रात को ही घटना स्थल पर पहुंच गए थे और गुरुनानक देव स्कूल में किसानों के साथ बैठक के बाद उन्होंने मांग की है कि गृहराज्य मंत्री को तुरन्त बरखास्त किया जाए जिससे वो जांच अधिकारियों पर दबाव न बना सके। मंत्री के आरोपी बेटे को तुरन्त गिरफ्तार किया जाए तथा जांच उत्तर प्रदेश से बाहर सुप्रीम कोर्ट के निरक्षण में कराई जाए। प्रत्येक मृतक के परिवारों को एक करोड़ रूपए मुआवजा तथा एक सरकारी नौकरी भी दी जाए।

किसान नेताओ एवम् मृतक परिवारों ने निश्चय किया है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती तब तक मृतकों का अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाएगा।

घटना स्थल पर किसानों से संवेदनाएं वयक्त करने के लिए रात को ही कांग्रेस नेता श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने जाने का कार्यक्रम बनाया लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने रोक कर गिरफ्तार कर लिया। 

सुबह जब अन्य विपक्षी नेताओं ने भी जाने की घोषणा की तो उन्हे भी हाउस अरेस्ट कर लिया गया। लखीमपुर खीरी के लिए सबसे नजदीक हवाई अड्डा लखनऊ ही पड़ता है और यहां आने के लिए अन्य राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भी लखनऊ तक आने की अनुमति नहीं दी गई। पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी आने के लिए लैंडिंग की अनुमति मांगी थी लेकिन उन्हें भी नहीं आने दिया गया।

उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इसे नरसंहार बताते हुए इसकी कड़ियां जोड़कर इसे साजिशन की गई हत्याएं बताया और जो भारत के प्रधान मंत्री के इशारे पर की गई हैं क्योंकि 2 अक्तूबर के अपने भाषण में प्रधान मंत्री जी ने किसान आंदोलन के विरोध में बयान दिया था फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वो प्रत्येक गांव में लाठी धरी गैंग बनाने और किसानों को जवाब देने की बात करते दिखाई दे रहे हैं तथा कार्यकर्ताओं को तसल्ली दे रहे हैं कि वो जमानत की चिंता न करें क्योंकि कुछ दिन जेल में रहने के बाद वो बड़े नेता बन जाएंगे।।

मुख्य आरोपी के पिता एवम् मोदी सरकार के गृह राज्य मंत्री ने तो दस दिन पहले ही घोषणा कर दी थी कि वो दो मिनिट में सीधा कर सकते है ( यद्धपि वो खुद कई अपराधों में अभियुक्त है )

कारण जो भी हो किन्तु विश्व समुदाय के लिए यह एवं इस प्रकार की निरन्तर होने वाली घटनाएं मोदी सरकार की साख को जरूर प्रभावित करेंगी और विश्व इसे किसी आतंकी घटना की तरह ही समझेगा जिसके कारण विश्व में हिन्दुत्व फोबिया जैसी कोई मुहिम शुरू हो सकती हैं।

News Number परिवार मृतकों के परिजनों के साथ हार्दिक संवेदनाएं वयक्त करता है।।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 31 जनवरी को वादा खिलाफी/ विश्वासघात दिवस के बाद जारी की गई प्रेस स्टेटमेंट।

19 नवम्बर 2021 भारतीय प्रधानमन्त्री द्वारा माफी मांगने के साथ ही विवादित किसान बिल वापिस लेने की घोषणा की गई थी। ...

ਅਵੇਸਲੇ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ, ਦਿੱਲੀ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਫ਼ੈਸਲਾ ਬਦਲੇਆ ਹੈ, ਸੋਚ ਨਹੀਂ ਬਦਲੀ।।

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19 नवम्बर को भारत के प्रधानमन्त्री द्वारा खेती विरोधी कहे जा रहे पूंजीपति मित्रों की मदद वाले कानून वापिसी की घोषणा कर दी गई लेकिन किसानों ने आंदोलन वापिस लेने से इंकार कर दिया। ...

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ਨਾ ਟਰੋਂ ਅਰਸੋ ਅਰ ਜਾਏ ਲਰੋ। ਨਿਸਚੈ ਕਰ ਅਪਨੀ ਜੀਤ ਕਰੋਂ ।।

जब आव की औध निदान परे, तब ही रण में तौंजूझ प्रौं । ना टरों अर्सुं अर जाय लरूं, निश्चय कर अपनी जीत करौं ।। अर्थात आवश्यकता और समय पर में युद्ध में युद्धरत हो जाऊं, निडरता से लड़ता हुआ, निश्चित रूप से अपने लिए विजय प्राप्त करूं।। ...

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