भेड़िया ! एक ऐसा जंगली जानवर जिसका नाम सुनते ही दहशत होने लगती है बेशक इसकी प्रजाति के ही कुत्ते और इंसान का सदियों पुराना साथ हो।

मनुष्य और कुत्ते का साथ सदियों पुराना है लेकिन कुत्ते के मूल भेड़िए को कभी इंसानी साथ नहीं मिल पाया क्योंकि जंगली जानवर होने के बावजूद उसकी कुछ विशेषताएं है जो उसको अन्य जानवरों से अलग करती हैं।

जिस प्रकार भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है और पाकिस्तान का मारखोर बकरा उसी प्रकार धरती पर एक देश ऐसा भी है जिसका राष्ट्रीय पशु "भेड़िया" हैं और उस देश का नाम है "तुर्की"

तुर्की ने भेड़िए को राष्ट्रीय पशु क्यों घोषित किया इसकी रोचक जानकारी नरेंद्र सिंह मोंगा ने दी। लेकिन इसके साथ ही भेड़िए तथा सियार का अंतर याद रखना चाहिए।

तुर्कों का राष्ट्रीय जानवर भेड़िया 

एक ऐसा जानवर है जो अपनी स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं करता है।यह इकलौता जानवर है जिसको गुलाम नहीं बनाया जा सकता है,जबकि हाथी चीता शेर सहित सभी जानवरों को गुलाम बनाया जा है। भेड़िये को पकड़ कर यदि कैद किया जाये तो यह खाना पीना छोड़ देता है और भूखा रह कर अपनी जान दे देता है परन्तु गुलामी कबूल नहीं करता है। भेड़िया कभी भी मरे हुए जानवर का मांस नहीं खाता है।

भेड़िया अपनी मादा साथी के प्रति इतना समर्पित होता है कि उस मादा साथी के अतिरिक्त किसी से शारीरिक संबंध नहीं बनाता है़, इसी प्रकार मादा भी नर साथी के प्रति वफादार रहती है। भेड़िया अपनी औलाद को जानता पहचानता है क्योंकि उनके माता-पिता एक होते हैं। यदि जोड़े में एक की मौत हो जाये तो दूसरा मौत के स्थान पर खड़ा रहता है और कम से कम तीन माह शोक में डूबा रहता है।

भेड़िये को अरबी में इब्न-अल-बार कहा जाता है अर्थात अच्छा नेक पुत्र जो मां बाप जब बूढ़े हो जाते हैं उनके लिए शिकार करता है और उनका पूरा ध्यान रखता है।यही कारण है कि तुर्क अपनी औलाद को शेर के बजाय भेड़िये जैसा बनने की शिक्षा देते हैं। उनका विचार है कि शेर की तरह खूंखार बनने के बजाय भेड़िये की तरह चालाक, होशियार और फुर्तीला बना जाये।

भेड़िये के बेहतरीन गुणों में बहादुरी, वफादारी, स्वाभिमान और माता पिता से अच्छा व्यवहार प्रसिद्ध हैं। भेड़िये जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो नीचे दिए चित्र अनुसार इस प्रकार समूह बनाकर चलते हैं।

१- बूढ़े और बीमार भेड़िये सब से आगे रहते हैं।

२- दूसरे क्रम में पांच चुने हुए शक्तिशाली भेड़िये जो बूढ़े और बीमार हैं की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

३- उनके पीछे शत्रु से बचाव हेतु होशियार और शक्तिशाली भेड़ियों का समूह रहता है।

४- मध्य में शेष सभी मादा, बच्चे और सामान्य भेड़िये होते हैं।

५- सबसे अंत में भेड़ियों का नेता रहता है जो सभी भेड़ियों पर पैनी नजर रखता है कि कोई अपने दायित्व में शिथिल तो नहीं है और अपने शत्रु का चारों तरफ से ध्यान रखता है, इस भेड़िये को अरबी में अलिफ़ कहते हैं, जिसका अर्थ है हजार, अर्थात वह अकेला ही हजार के बराबर है।

यही कारण है कि तुर्क और मंगोल इसको प्यार करते हैं और यह तुर्कों का राष्ट्रीय जानवर है।