भारत की बिगड़ती कानून व्यवस्था एवम् मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन होने के बावजूद बीजेपी सरकार तथा नौकरशाही द्वारा किया जा रहा अमानवीय व्यवहार।

यद्धपि News Number आमतौर पर सनसनी फैलाने वाली या अपराधिक घटनाओं की विवेचना से परहेज़ करता है लेकिन कभी कभी कुछ वाकयात जब दिल दिमाग को झिंझोड़ते हैं तो साझा करना पत्रकारिता का धर्म बन जाता हैं।

भारत के संविधान एवम् भारत नेपाल मैत्री संघी 1952 के अनुसार किसी भी भारतीय या नेपाली नागरिक को यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वो भारत अथवा नेपाल के किसी भी क्षेत्र में निर्बाध यात्रा कर सकता है, निवास कर सकता और व्यवसाय/ आजीविका अर्जित कर सकता है। ( प्रतिबन्ध वाले संवेदनशील क्षेत्रो को छोड़कर )

1962 खड़ग सिंह केस के सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के आदेश के अनुसार मकान मालिक, पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी यदि ठोस सबूत न हो तो किसी को भी उसके प्राइवेट स्थान पर अनुचित तरीके से अनुचित समय पर परेशान नहीं कर सकती।

यहां तक कि रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक किसी को फोन पर भी पूछताछ नहीं की जा सकती या स्पैम कॉल नहीं की जा सकती।

जिस घटना का सन्दर्भ दिया जा रहा है यह बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश राज्य की है जिसे भारत का महत्वपूर्ण सर्वाधिक आबादी वाला राज्य माना जाता है और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी भी इसी राज्य से सांसद  बने हैं तथा वर्तमान में हिन्दुत्व वाले योगी आदित्यनाथ इसके मुख्य मंत्री है।

योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में तीन युवा बाहर से आए और होटल में कमरा लेकर रुके। क्योंकि भारत में बिना उचित आई कार्ड एवम् पहचान के किसी को भी रुकने की कानूनी तौर पर अनुमति नहीं होती तो निसंदेह उन्होंने अपने परिचय पत्र जमा करा कर ही कमरा बुक किया होगा।

आमतौर पर होटल वालो से बीट कांस्टेबल शाम को सूचना इकठ्ठी करता है कि उनके होटल में कौन रुका जिससे अपराधियों पर नजर रखी जा सके जो जायज़ भी है।

आरोप लगाया जा रहा है कि आधी रात को स्थानीय दरोगा दो कांस्टेबल के साथ इस होटल में आता है और रुके हुए युवकों को जगा कर उनसे पूछताछ शुरू कर देता है।

वैसे तो यूपी के साधारण निवासियों को भाषा बोली ही एक दृष्टिकोण से असभ्यता का पुट लिए होती हैं उसपर बीजेपी शासन में कुछ वैसे भी अतिवाद महसूस किया जाता हैं फिर लगभग अनपढ़ बैकग्राउंड के पुलिस वाले हो तो समझा जा सकता है कि कमोबेश तालिबान नहीं तो कम भी नहीं होंगे !

एक युवक  दरोगा से आपत्ति दर्ज कराता है और यह उत्त प्रदेश पुलिस को उनके सम्मान में कलंक लगता है जिसके नतीजे में अमानवीयता से उन्हे पीटा जाता हैं और एक युवक की मौत हो जाती हैं।

मृतक की शादी केवल चार साल पहले हुई थी तथा उसका एक छोटा सा बच्चा भी है। सम्भव है कि वो किसी के अनुरोध पर गोरखपुर आए हो, अपने कारोबार के लिए कोई नया काम तलाश करने आए हो या नेपाल घूमने जाने के लिए आए हो किन्तु किसी भी परिस्थिति में स्थानीय पुलिस द्वारा आधी रात को उन्हे परेशान करने, पीटने का अधिकार नहीं मिल जाता।

जब एक युवक की मृत्य पर हंगामा शुरू हुआ तो गोरखपुर के एसपी पुलिस ने आरोपी दरोगा को तुरन्त निवलंबित कर दिया ( अर्थात प्रथम दृष्टया उसे लगा कि दरोगा ने अपराध किया है )

लेकिन जब परिवार जनों ने हत्या का केस दर्ज कराने की प्रार्थना की तो पुलिस अधिकारियों द्वारा परिवार जनो पर दबाव बनाने की कोशिश होने लगी और उन्हे समझाने की कोशिश की गई कि केस दर्ज कराने पर अदालती परेशानियां होंगी। ( इसकी वीडियो भी वायरल हो रही हैं )

गोरखपुर एसपी द्वारा मीडिया को बताया गया कि पुलिस पहले यह जांच कर रही है कि ",ये युवक गोरखपुर क्यों आए थे" उसके बाद ही हत्या आरोपी दरोगा एवम् कांस्टेबल के विरूद्ध कार्यवाही की विवेचना की जाएगी।

अभी भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के समय भी कमला हैरिस एवम् #Amnesty_International द्वारा भारत में मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाया गया था लेकिन उसके बावजूद इस प्रकार के आरोप सार्वजनिक होना निसंदेह दुखद एवम् भारतीय लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।

News Number परिवार दुखी परिवार से संवेदनाएं वयक्त करता है एवम् उचित न्याय की आशा करता है।

जिन्ना की चर्चा और बाहर से अंदर तक तनाव ही तनाव है। कारण सिर्फ एक और वो यूपी का चुनाव है।।

इसमें कोई शक नहीं है कि यदि राजनीति के घटिया स्तर और सियासी साजिशों को छोड़ दिया जाए तो हिंदुस्तान से बेहतर मुल्क कुर्रा ए अर्श पर दूसरा नहीं है। उसमे भी बहुल संस्कृति और सभ्यताओं वाला भारत लेकिन ..... ...

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