9/11 जिसे आतंकी घटना से लेकर यूएस अंडर अटैक बोला गया एक कभी ना सुलझने वाली उलझन है।

बीस साल पहले अचानक दुनियां भर को दहलाने वाली खबरे चलने लगी और उसे इतिहास 9/11 के नाम से जानती है, इसी घटना के बाद इराक़ हमला हुआ, अफगानिस्तान पर कार्पेट बंबिंग हुई और नाम मिला वार अगेंस्ट टेरर किन्तु जो सवाल खड़े हुए वो आज भी जवाब मानते है।।

घटना को दोहरा कर देखते हैं तो स्थानीय समय के अनुसार 8:46 मॉर्निंग में एक जहाज़ वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की सात में एक टॉवर की उप्री मंजिलों से टकराता है। उसके लगभग बीस मिनिट बाद दूसरा जहाज़ दूसरी ऊंची बिल्डिंग से टकराता है और उसके काफी समय बाद दोनों टॉवर्स नीचे बैठ जाती हैं जैसे उनकी बूनियादें पहले से खोखली की गई हो।

गत दिनों राष्ट्रपति बाइडेन ने वायदा किया था कि वो इस हादसे की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे लेकिन फिर ऐसा हुआ नहीं बहरहाल उस समय से आजतक वहां का मीडिया और जनता कुछ संदेह लेकर खड़ी है।

सबसे पहले कि जब विमान अपहृत हुए तब नॉर्थ अमेरिकन एयर डिफेंस नेटवर्क क्या कर रहा था क्योंकि चार विमान काफी समय तक आसमान में चक्कर काटते रहे जिसमे वाशिंगटन नो फ्लाई ज़ोन है और एस्टेब्लिशमेंट की जिम्मेदारी यूएस तथा कनाडा की हवाई सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

सबसे पहला प्रश्न जिस समय कथित आतंकी घटना हुई उस समय देश का शीर्ष नेतृत्व कहां था ?

राष्ट्रपति बुश बच्चो के स्कूल का दौरा कर रहे थे तो पहले जहाज़ के टकराने की सूचना मिली और जब दूसरे जहाज़ के टकराने की सूचना दी गई तो वो बच्चो को कहानी सुना रहे थे जिसके बाद भी वो कहानी सुनाते रहे जबकि उन्हे तुरन्त रक्षा सचिव एवम् अन्य अधिकारियों से संपर्क करना था।

सीबीएस न्यूज के डेविड मार्टिन ने एक रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि जिस समय 9/11 हो रहा था तो रक्षा मंत्रालय इराक़ पर हमले की योजना बना रहा था। वैसे सद्दाम हुसैन का कथित आतंकवाद से क्या सम्बन्ध रहा होगा इसकी जानकारी नहीं है।

इसी समय का विवरण देते हुए वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि व्हाइट हाउस हादसे के समय रेमफील्ड की तलाश कर रहा था जिनकी कोई जानकारी नहीं मिल रही थी।

लॉस एंजिलिस टाइम्स ने सवाल पूछा था आरोपित 19 आतंकियों को हवाई अड्डे से सुरक्षा जांच के बिना कैसे जाने दिया गया और बिना बोर्डिंग पास के सभी एक ही समय चार अलग अलग जहाजों में कैसे सवार हो गए ?

इससे भी मजेदार रिपोर्ट बीबीसी ने 23 सितम्बर को प्रकाशित की थी जिसमे जारी किए गए 19 आतंकियों के नाम और चित्रों में से एक वलीद अल शहसि मोरक्को में जीवित पाया गया और उसने क्लेम भी किया कि उसको आतंकी कैसे बताया जा रहा है जबकि वो कभी अमेरिका गया ही नहीं।

70 से सौ मंजिला बिल्डिंग्स ताश के पत्तो की तरह खंडहर बान गई किन्तु क्या आप जानते हैं कि घटना से केवल एक सप्ताह पहले उनका आतंकी हमले के विरूद्ध बीमा कराया गया था। इतने बड़े मलबे और भयानक आग से स्टील के पिलर गिर गए, जल गए किन्तु कथित आतंकियों के पासपोर्ट सुरक्षित मिल गए !

पेंटागन में तीसरे जहाज़ के गिरने या गिराए जाने के समाचार और जलते हुए जहाज़ की फुटेज जारी की गई लेकिन आज तक जहाज़ का मलबा कहां गया इसकी जानकारी नहीं है और जो आग बुझाते हुए तस्वीरे जारी हुई थी उनमें जहाज़ ही नजर नहीं आ रहा।

चौथे जहाज़ के बारे में कोई विवरण उपलब्ध नहीं है जिसे कथित तौर पर वायु सेना ने व्हाइट हाउस पर क्रेश होने से पहले घेर लिया था। किसी भी जहाज़ के ब्लैक बॉक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

लेकिन इसके तुरन्त बाद इस्लामिक आतंकवाद का ज्वार उठा, इराक़ को बर्बाद कर दिया गया और अफगानिस्तान को बमो से पाट दिया गया, पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष कब्ज़ा कर लिया गया। बेशक भारत ने तब भी अपनी रीढ़ सीधी रखी।

और इन सब घटनाओं के बीस साल बाद इस्लामिक आतंक खत्म हो गया, वार अगेंस्ट टेरर की जरूरत नहीं रही और यूएस तथा नाटो फोर्सेज ने अफगानिस्तान छोड़ दिया किन्तु अभी तक साफ नहीं है कि आतंकी कौन था और सेनाएं क्यों आईं थीं और फिर क्यों चली भी गई ?