हम बेईमान क्यो कहलाते है ? क्योंकि हमारे नेता, हमारे अधिकारी और हम खुद बतौर एक वोटर, ईमानदार नहीं है।

यकीनन किसी भी भारतीय के मन में अपने इर्दगिर्द के माहौल को देखकर यह सवाल पूछने का मन करता होगा " हम बेईमान क्यों है"

वैसे भारत जैसे देश में यदि नेता ईमानदार नहीं है, यदि सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते और यदि अधीनस्थ कर्मचारी लापरवाही, टाल मटोल करते हैं तो इसके लिए एक मात्र जिम्मेदार भारत की महान जनता है।।

जनता का अपराध यह है कि जब एक व्यक्ति पर अत्याचार होता है तो पोल्ट्री फार्म के ब्रायलर की तरह बाकी दाना चुगता रहता है।

शायद भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां "Life DOES NOT matters" कहा जा सकता है क्योंकि भारतीय जनता अमेरिका की तरह एक काले व्यक्ति को पुलिस द्वारा मार दिए जाने पर घरों में नहीं बैठती अपितु सवाल करती हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर क्यों नहीं है और पुलिस अधिकारी को 23 साल को जेल हो जाती हैं।

करनाल धरने के सन्दर्भ में News Number की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने करनाल जाकर हालात का जायजा लिया और समाज के सभी लोगो से सम्पर्क किया। किसान लाठी चार्ज के बाद एसडीएम आयुष सिन्हा के वीडियो को सबने देखा ही है जिसमे वो अपने अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए किसानों का सिर फोड़ देने का आदेश दे रहा था।

जब अवैध रूप से किसानों पर लाठी चार्ज किया गया जिसके कारण एक किसान की मृत्यु हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए तो सरकार समर्थित मीडिया पर एक क्लिप दिखाई जाने लगी जिसमे एक किसान फावड़ा ( खेती में अक्सर कम आने वाला हैंड टूल ) लेकर पुलिस पर हमला करते हुए बताया गया तथा इसे किसानों द्वारा पुलिस पर हमला करार देकर लाठी चार्ज, किसान की मृत्यु एवम् घायल होना उचित बताया जाता रहा जिसे बीजेपी के कई प्रवक्ताओं ने कथित नेशनल चैनल्स पर भी दोहराया।

जिस व्यक्ति को कुदाल लेकर पुलिस पर हमलावर बताया जा रहा था उससे मुलाकात करने पर हैरानी हुई कि यह व्यक्ति 8 या दस पौंड वजनी कई कैसे उठाकर दौड़ा होगा क्योंकि उसकी शारीरिक क्षमता भी ऐसी नहीं लग रही थी।

जिसे हमलावर दिखाया गया उसकी आयु निसंदेह सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आनी चाहिए, एक आंख बचपन में ही चली गई थी और पिछले कई महीनों से वो टोल प्लाजा पर चलाए जा रहे लंगर में सेवा कर रहा था।

जिस समय यह पुलिस द्वारा किसानों पर सरकार के आदेश का पालन किया जा रहा था उस समय वो व्यक्ति फावड़े से लंगर के साथ बनी नाली की सफाई कर रहा था कि अचानक उसे अपने सगे छोटे भाई की चीख पुकार सुनाई दी जिसपर एक साथ कई पुलिस वाले नीचे गिरकर लाठियां बरसा रहे थे।

जिस स्थिति में वो नाली साफ कर रहा था उसी हालात में वो उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ा और ऐसे में इस्तेमाल किया जा रहा कृषि हैंड टूल जो एक छोटे से डंडे के आगे लोहे की प्लेट होती हैं उसके हाथ में ही था।

नतीजतन दोनों भाईयों के सिर तोड़ कर पुलिस ने अपनी ड्यूटी पूरी की जिसके कारण छोटे भाई के सिर में 15 टांके ( स्टिचेस ) लगाने पड़े हालांकि उसके अनुसार उसको घायल होने के बाद इधर उधर घुमाया जाता रहा और उचित इलाज भी नहीं मिला।

बेशक यह हैरानी वाली बात है कि लाठी चार्ज के समय किसानों ने खुद अपने सिर आगे कर दिए थे क्या कि आओ पुलिस जी इन्हे तोड़ दो।

किसानों का विरोध मोर्चा जारी है और इतना होने के बाद भी प्रशासन या सरकार के रवेये में कोई अंतर नही पड़ा क्योंकि जनता मासूम है और सवाल करना नहीं जानती।

News Number टीम द्वारा तैनात पुलिस अधिकारी से पूछा गया कि काफी समय से पुलिस जवानों को फाइबर की लाठियां देने का आदेश है जिससे मारे जाने पर हड्डियों पर चोट न लगे और सिर टूटने की घटनाएं ना हो तो यहां तैनात हरियाणा पुलिस के जवानों के पास बांस की ठोस एवं नई लाठियां कैसे हैं ?

दूसरा इंडियन पुलिस एक्ट 1860 के अनुसार वर्दी के साथ लाठी का मानक तय है कि दंगे फसाद के समय उसकी लम्बाई जवान के कंधे से कान तक होनी चाहिए लेकिन अधिकांश जवानों के पास सिर से भी ऊंची लाठियां थी और करोना प्रोटोकॉल का पालन तो कोई भी नहीं कर रहा था।

सवाल पूछते ही अधिकारी द्वारा तुरन्त वहां खड़ी गारद को आगे पीछे करके अपने गैर कानूनी कृत्य पर पर्दा डालने का प्रयत्न किया गया।

क्योंकि पत्रकारिता का असुल हैं कि सभी पक्षों से सम्पर्क करना चाहिए तो टीम ने सरकारी अधिकारियों से भी संपर्क किया किन्तु किसी ने भी कैमरा के सामने बोलने से मना कर दिया और शायद इसी दबाव में डीसी तथा एसपी ने तुरन्त प्रेस कांफ्रेंस बुला कर अपना वर्ज़न दिया जिसका कोई अर्थ नहीं था।।

कुछ जूनियर अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से जरूर बताया कि सरकार एसडीएम के विरूद्ध कुछ नहीं करेगी क्योंकि यदि सरकार ने कोई कदम उठाया तो अधिकारी पोल खोल सकते है कि किसके आदेश पर किसानों पर अत्याचार किया गया।

इनसे भी हटकर सबसे शर्मनाक बयान आज हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का आया है जिसमें उनके अनुसार "पुलिस ने कोई लाठीचार्ज ही नहीं किया"

दुनियां भर से लोग अमेरिका या कनाडा जाकर क्यों बसना चाहते है ? क्योंकि वहां सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं।

वहां "BLACK LIFE MATTERS" का नारा लगाकर गोरे प्रदर्शन करते हुए नजर आते है और भारत का कथित मुख्य मीडिया सिद्ध करता रहता है कि किसानों के सिर खुद उछल उछल कर पुलिस की लाठियों के आगे आ रहे थे इसीलिए टूटे हैं।

 

 

 

Farmer's lives matters. लेकिन भारत के बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश एवम् हरियाणा में सरकार इसका अर्थ भी नहीं समझती।

अमेरिका में एक नागरिक को पुलिस अधिकारी ने घुटने तले सांस घोट कर मार डाला था। क्योंकि मृतक अफ्रीकी मूल का था ( काला ) तो आरोप लगा कि पुलिस अधिकारी व्हाइट सुपरमैसी की भावना से ग्रस्त था जिसके कारण उसे काले व्यक्ति को देखते ही गुस्सा आ गया और उसने बेकाबू होकर उसकी सार्वजनिक स्थान पर हत्या कर दी। ...