NRC भारत सरकार द्वारा लागू अधिनियम और इसी के साथ आसाम राज्य में फैली अराजकता। दो साल बाद एक बार फिर चर्चा में है और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस विषय पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अचानक एक आंदोलन खड़ा हो गया था जिसमे कहा गया कि भारतीय उत्तर पूर्व के राज्य आसाम में लाखो बांग्लादेशी नागरिक घुस चुके है और वहां की डेमोग्राफी तथा आर्थिक हालात पर असर डाल रहे है।

राजीव गांधी के कार्यकाल में आसाम के आंदोलन कर रहे छात्रों तथा भारत सरकार के बीच एक सहमति बनी और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नेशनल सिटिज़न रजिस्टर बनाने की रूपरेखा तैयार की गई।

इसी के साथ आंदोलन समाप्त हो गया और छात्र नेता मुख्यमंत्री तक बन गए लेकिन एनआरसी का काम लाल फिताशाही की गति से चलने दिया गया जिसे लोग भूल भी गए।

अचानक वर्तमान बीजेपी सरकार को यह प्रश्न अपने चुनावी हितों में लगा और दो साल पहले इसे तयशुदा ब्लूप्रिंट से हटकर लागू कर दिया गया। विगत दो साल में इसकी क्या स्थिति हुई इसका तथ्यपूर्ण विश्लेषण पंकज चतुर्वेदी जी ने किया है।

असम में एन आर सी के दो साल 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में बनी पहली राष्ट्रीय नागरिकता पंजी की अव्यवस्था, अफरा तफरी दो साल बाद भी यथावत है -- एन आर सी का काम देखने वाले आला अफसर पर मुक़दमा हो गया , असम के बड़ी आबादी ने इसे स्वीकार नहीं किया - की ऐसे लोग जो पीढ़ियों से यहाँ अहिं कागज के अभाव में परेशान हैं --- 

असम में एनआरसी की लिस्ट को प्रकाशित हुए दो साल हो चुके हैं, लेकिन इस लिस्ट में नाम आने के बावजूद राज्य में कई ऐसे लोग हैं जो अब आधार नंबर जारी न हो पाने की समस्या से जूझ रहे हैं।

इन लोगों को राशन कार्ड से लेकर सरकारी कॉलेजों में दाखिलों, फ्लाइट बुकिंग से लेकर हर चीज में समस्या हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक IIT बॉम्बे में पोस्ट डॉक्टरल फेलो भानु उपाध्याय 18 महीने से आधार कार्ड के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। टोल-फ्री नंबरों पर कई कॉल, ई-मेल और आवेदन केंद्रों पर जाने के बाद भी उनका आधार अब भी प्रोसेस में है।

उपाध्याय का नाम सिर्फ अकेला नहीं है, जो इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। 31 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में इन लोगों का नाम शामिल होने के बाद भी इन्हें आधार नंबर हासिल करने में दिक्कत हो रही है।

करीब 27 लाख लोगों ने NRC के लिए बायोमेट्रिक्स रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 19 लाख लोगों का एनआरसी की लिस्ट में नाम नहीं है, जबकि आठ लाख लोगों का नाम एनआरी की लिस्ट में शामिल किया गया था। राज्य सरकार के अधिकारी इसे सरकारी लापरवाही और एनआरसी पर प्रक्रिया की स्पष्टता की कमी को दोष देते हैं। रिपोर्ट बताती है कि मुद्दे पर महापंजीयन को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

समस्या के केंद्र में नवंबर 2018 सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) है। एसओपी के तहत, 31 जुलाई, 2018 को प्रकाशित NRC लिस्ट के ड्राफ्ट से बाहर रहने वालों को ‘दावों’ (खुद को एनआरसी में शामिल करने के लिए) और ‘आपत्ति’ (किसी और की आपत्ति पर आपत्ति करने के लिए) की सुनवाई के दौरान अनिवार्य रूप से अपना बायोमेट्रिक्स जमा करना था। ये सुनवाई 31 अगस्त 2019 को पूरी सूची के प्रकाशन के क्रम में आयोजित की गई थी।

एसओपी के खंड 9 में कहा गया है, एक बार अंतिम एनआरसी प्रकाशित हो जाने के बाद, ऐसे व्यक्ति जो एनआरसी में शामिल हैं, उन्हें देश में कानूनी निवासियों के लिए लागू सामान्य आधार संख्या दी जाएगी।

यूआईडीएआई की प्रक्रिया के दौरान 27,43,396 का बायोमेट्रिक डाटा इकट्ठा किया गया था। बायोमेट्रिक्स में फ्रीज एनआरसी की प्रक्रिया प्रकाशन के दो साल बाद भी अधर में लटकी हुई है, भाग्य के इंतजार में है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने इसे अधिसूचित नहीं किया है।

कार्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए स्वीकार करते हुए कहा कि अभी कुछ नहीं हो रहा है। पिछले साल एनआरसी के राज्य समन्वयक एच डी सरमा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय को एक हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें 31 अगस्त की सूची को ‘पूरक’ सूची के रूप में संदर्भित किया गया और पुन: सत्यापन की मांग की गई।

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एसओपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि आधार उन लोगों को दिया जाएगा जो “अंतिम एनआरसी” का हिस्सा हैं, लेकिन अभी हमारे पास जो एनआरसी है वह अंतिम नहीं है।

ਸੀਏਏ/ਐਨਆਰਸੀ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਖੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ 11 ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ !!!

ਪੰਜਾਬ ਸਟੂਡੈਂਟਸ ਯੂਨੀਅਨ ਅਤੇ ਨੌਜਵਾਨ ਭਾਰਤ ਸਭਾ ਵੱਲੋਂ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ 'ਤੇ 11 ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ ਸੀ.ਏ.ਏ/ਐਨ.ਆਰ.ਸੀ. ਅਤੇ ਐਨ.ਪੀ.ਆਰ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਖੇ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਤਹਿਤ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਸਟੂਡੈਂਟਸ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਣ ਦਾ ਸੱਦਾ ਲਾਇਆ। ...

CAA-NRC पर जेडीयू नेता ने किया ट्वीट

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जेडीयू के नेता प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर लिखा कि सरकार की ओर से अभी सिर्फ इसपर ब्रेक लिया गया है और पूरी तरह से फुल स्टॉप नहीं है। ...

ਲੱਗਦੈ ਐਨਆਰਸੀ ਦਾ ਵਿਰੋਧ ਰੰਗ ਲਿਆ ਰਿਹਾ ਹੈ (ਨਿਊਜ਼ਨੰਬਰ ਖ਼ਾਸ ਖ਼ਬਰ)

ਨਾਗਰਿਕਤਾ ਸੋਧ ਬਿੱਲ ਦੇ ਸੰਸਦ ਦੇ ਦੋਹਾਂ ਸਦਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਸ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰਾਸ਼ਟਰਪਤੀ ਦੀ ਮਨਜ਼ੂਰੀ ਮਿਲਣ ਨਾਲ ਇਹ ਕਨੂੰਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਲਾਗੂ ਹੋ ਗਿਆ। ...

ਜਾਖੜ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਐਨਆਰਸੀ ਅਤੇ ਡਿਟੈਂਸ਼ਨ ਸੈਂਟਰਾਂ ਸਬੰਧੀ ਆਪਣੀ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਪੱਖ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰਨ ਦੀ ਵੰਗਾਰ

ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਕਾਂਗਰਸ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸੁਨੀਲ ਜਾਖੜ ਨੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਬੰਦੀ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਡਿਟੈਂਸ਼ਨ ਸੈਂਟਰਾਂ ਅਤੇ ਕੌਮੀ ਨਾਗਰਿਕਤਾ ਰਜਿਸਟਰ ਸਬੰਧੀ ਆਪਣੀ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਰੁੱਖ ਸਪਸ਼ਟ ਕਰਨ ਦੀ ਵੰਗਾਰ ਪਾਈ ਹੈ। ...

ममता बनर्जी ने CAA-NRC के खिलाफ की मार्च की अगुवाई, केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के खिलाफ मार्च की अगुवाई की और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। ...

ਭਾਰੀ ਵਿਰੋਧ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਕੀ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਐਨਆਰਸੀ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼? (ਨਿਊਜ਼ਨੰਬਰ ਖ਼ਾਸ ਖ਼ਬਰ)

ਨਾਗਰਿਕਤਾ ਸੋਧ ਕਨੂੰਨ ਅਤੇ ਐਨਆਰਸੀ ਤੇ ਹੋ ਰਹੇ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਵਿੱਚ ਵਿਰੋਧ ਦੇ ਬਾਅਦ ਐਨਆਰਸੀ ਤੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਕੁਝ ਝੁਕਦੇ ਨਜ਼ਰ ਆਏ। ...

ਐਨਆਰਸੀ ਤੇ ਝੁੱਕਦੀ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਜਾਂ ਸਿਰਫ ਵਿਰੋਧ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਠੰਡਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ (ਨਿਊਜ਼ਨੰਬਰ ਖ਼ਾਸ ਖ਼ਬਰ)

ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਜਦੋਂ ਆਪਣਾ ਦੂਜਾ ਕਾਰਜਕਾਲ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਬਹੁਮਤ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਇਹ ਗੁਮਾਨ ਹੋ ਗਿਆ ਕਿ ਉਹ ਹੁਣ ਜੋ ਚਾਹੁਣ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ। ...

ਐਨਆਰਸੀ ਅਤੇ ਸੀਏਏ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਪੀ.ਐਸ.ਯੂ. ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ !!!

ਅੱਜ ਪੰਜਾਬ ਸਟੂਡੈਂਟਸ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਸੂਬਾਈ ਸੱਦੇ ਤਹਿਤ ਸਰਕਾਰੀ ਆਈਟੀਆਈ ਲੜਕੇ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਆਈਟੀਆਈ ਲੜਕੀਆਂ ਵਿਖੇ ਐਨਆਰਸੀ ਅਤੇ ਸੀ.ਏ.ਏ ਨਾਂਅ ਦੇ ਕਾਲੇ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤੇ ਗਏ। ...