ले के पहला प्यार और रेशमी सलवार कुर्ता जाली का.... कुछ आवाजें दिल की गहराई तक संगीत का अहसास करा देती हैं।

ले के पहला प्यार और रेशमी सलवार कुर्ता जाली का....

कुछ आवाजें दिल की गहराई तक संगीत का अहसास करा देती हैं एक ऐसी ही गायिका जो लाहौर में जन्मी और मुंबई में अंतिम आरामगाह में सो गई।

बूझ मेरा क्या नाम रे...  

गीत-संगीत की महफ़िल सजी हो. मंदिर की घंटी की जैसी स्पष्ट मधुर आवाज़ और पहली बुलबुल का ज़िक्र आये, समझ लीजिये ये शमशाद बेग़म है. 14 अप्रैल 1919 में लाहोर के मुस्लिम पंजाबी परिवार में जन्मी बेगम की गाने में रूचि पैदाइशी थी. वो स्कूल की प्रार्थना सभा में गाया करती थी. सबसे मुखर और अलग आवाज़ के कारण जल्द ही उन्हें हेड सिंगर बना दिया गया.

शमशाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यदा-कदा गाती थीं. चाचा अमीर खान को उनमें असीम प्रतिभा दिखी. उस दौर की मशहूर रिकॉर्डिंग कंपनी जेनोफ़ोन के संगीतकार मास्टर गुलाम हैदर उन्हें सुनने आये. शमशाद ने उनके सामने बहादुरशाह ज़फर का गाना पेश किया - मेरा यार अगर मिले.…

गुलाम हैदर बहुत प्रभावित हुए. शमशाद को 15 रुपए प्रति गाने की दर से 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट ऑफर किया. मगर शमशाद के पुरातनपंथी पिता मियां हुसैन बक्श को महिलाओं की आज़ादी और गाने-बजाने पर सख्त ऐतराज़ था. बामुश्किल इस शर्त पर तैयार हुए कि बेगम हरवक़्त पर्दानशीं रहेंगी और तस्वीर के लिए कैमरे के सामने भी नहीं आएँगी.यही वज़ह है कि 1970 तक बहुत कम लोगों ने उनको देखा.  

दलसुख पंचोली ने शमशाद की आवाज़ लाहोर रेडियो पर सुनी तो दीवाने हो गए. उन्होंने उन्हें गाने के साथ-साथ अभिनय के लिए भी मना लिया. लेकिन अब्बा मियां हुसैन बक्श फिर बीच में दीवार बने. 1940 में महबूब खान ने शमशाद के पति गणपत लाल को समझाया - यहां लाहोर में बेगम कुएं में बंद है. बंबई का विशाल समुंद्र उनका इंतज़ार कर रहा है. गणपत बड़ी मुश्किल से छह बंदो के लिए फ्लैट और मुफ़्त कार के ऑफर पर तैयार हुए. ये गणपत राव वकील हुआ करते थे. ये बड़ी हैरानी की बात है कि सख़्त पहरेदारी के बावजूद शमशाद गणपत से बंध गयीं. प्यार किसी दीवार को नहीं मानता. 

शमशाद के शुरू के गाने पंजाबी में रहे - चीची विच पाके छल्ला…मेरा हाल वेख के.…कंकण दी फसलां…(यमला जट्ट - 1940). यूनीक आवाज़ के कारण शमशाद को बंबई में स्थापित होने में वक़्त नहीं लगा. उनके जलवे का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि फ़िल्मकार आशा भोंसले को लंबे समय तक शमशाद की स्टाइल में गवाते रहे. 

शमशाद का सबसे व्यस्त समय 1940-55 के बीच रहा. पति की असमय मृत्यु ने उन्हें तोड़ दिया. लेकिन 1957 में वो ज़िंदगी में वापस आयीं और 1967 तक डिमांड में रहीं. उस दौर के सभी संगीतकारों ओपी नय्यर, नौशाद, एसडी बर्मन, सी रामचंद्र, गुलाम हैदर और गायकों-गायिकाओं के साथ उनके बहुत अच्छे रिश्ते रहे. उनके कुछ मशहूर नग्मे हैं -

लेके पहला पहला प्यार…कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना…बूझ मेरा क्या नाम रे.…(सीआईडी), कभी आर कभी पार लागा तीरे नज़र.…(आर-पार), ओ गाड़ी वाले गाडी धीरे हांक रे.…होली आई रे कन्हाई रंग छलके…(मदर इंडिया), मेरे पिया गए रंगून…(पतंगा), छोड़ बाबुल का घर.…किसी के दिल में रहना था.…(बाबुल), कजरा मोहबत वाला…(किस्मत), तेरी महफ़िल में किस्मत आजमा के.…(मुगल-ए-आज़म), सैयां दिल में आना रे.…(बहार), रेशमी सलवार कुरता जाली दा.…(नया दौर), धरती को आकाश पुकारे…(मेला), एक दो तीन मौसम है रंगीन…(आवारा), बचपन के दिन भुला न देना…(दीदार), दूर कोई गाये धुन ये सुनाये…(बैजू बावरा) आदि. यूट्यूब पर उनके गाने सुनिए और देखिये, आनंद आएगा, गारंटी है. 

साठ के बाद के दौर में शमशाद को फ़िल्मी राजनीती से बड़ी उलझन रही. इसीलिए उन्होंने अपनी पुत्री उषा रात्रा को गाने नहीं दिया. शमशाद की अमर आवाज़ भारत सरकार के कानों में बहुत देर से 2009 में पहुंची. उन्हें पदमभूषण से नवाज़ा गया. वो कहा करती थीं- गायक कभी नहीं मरता. उसकी आवाज़ अमर है. वही उसकी पहचान है.

शायद यही वज़ह है कि रेट्रो दुनिया में सबसे ज्यादा शमशाद बेगम के गाये नग्मे ही छाए रहते हैं. उन्होंने 94 साल की लम्बी उम्र पायी, 23 अप्रैल, 2013 को आवाज़ की दुनिया की पहली बुलबुल हमेशा के लिए खामोश हो गई.

भारतीय उपमहाद्वीप में नफ़रत और साम्प्रदयिकता की विषबेल का जिम्मेदार कौन ?

1857 सल्तनत ए हिन्द और बादशाह सलामत बहादुर शाह ज़फ़र जिन्हे खैबर से लेकर बर्मा तक की रियासतों, राजो, राजवाड़ों ने सम्राट घोषित कर दिया था जिनमे बहुसंख्यक गैर मुस्लिम कथित महाराजा थे। ...

भारतीय पंजाब को कश्मीर बनाने की साज़िश या किसी अनहोनी की आशंका !

अचानक लिए गए निर्णय के अनुसार भारतीय पंजाब के सीमा से 50 किमी रेडियस में बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देते हुए अधिकार दिए गए हैं जिसके अनुसार बीएसएफ कर्मी/अधिकारी किसी को भी गिरफ्तार कर सकते है, तलाशी ले सकते हैं और जांच पड़ताल कर सकते है। ...

ज्यूं ज्युं तेरा हुक्म है ......

1923 का हिंदुस्तान और जबर ब्रिटिश साम्राज्य ! रियासत नाभा के रीपुदमन सिंह को गद्दी से हटाने के विरूद्ध गंगसर जैतो में मोर्चा लगा और सरकारी ट्रेन से अहिंसक आंदोलन कर रहे सिखो को कुचल दिया गया कुछ ऐसे ही जैसे थार और फॉर्चूनर गाड़ियों के नीचे लखीमपुर के किसानों को कुचला गया है। ...

रेखा भारतीय फिल्म जगत का जीता जागता करिश्मा ! जन्मदिन पर विशेष बेशक इनके लिए ही कहा जाता है कि उम्र सिर्फ गिनती भर है।

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है......। और ख्यालों में न केवल आकर्षक सुंदर चेहरा सामने आता है अपितु एक नाम भी सामने आ जाता हैं जिसे बहुमुखी प्रतिभा की धनी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की अतुलनीय अभिनेत्री माना जाता है और उनका छोटा सा नाम "रेखा" जिसे शायद ही कोई होगा जो जनता न हो। ...

Farmer's lives matters. लेकिन भारत के बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश एवम् हरियाणा में सरकार इसका अर्थ भी नहीं समझती।

अमेरिका में एक नागरिक को पुलिस अधिकारी ने घुटने तले सांस घोट कर मार डाला था। क्योंकि मृतक अफ्रीकी मूल का था ( काला ) तो आरोप लगा कि पुलिस अधिकारी व्हाइट सुपरमैसी की भावना से ग्रस्त था जिसके कारण उसे काले व्यक्ति को देखते ही गुस्सा आ गया और उसने बेकाबू होकर उसकी सार्वजनिक स्थान पर हत्या कर दी। ...

भारत विश्व में सर्वाधिक फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है लेकिन तेजी और आपाधापी के युग में बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री की बुनियादों को भी याद रखना चाहिए।

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भारत एक गणराज्य ! विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता तथा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश .

विश्व का दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश जिसे उसके लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता एवम् सॉफ्ट पॉवर के कारण उदाहरण के रूप में प्रतीत किया जाता था अचानक कैसे बदल गया ? क्योंकि 1948 में महात्मा गांधी के शरीर की हत्या करने वालो के गिरोह को अवसर मिला और आपदा में अवसर उठाते हुए उन्होंने गांधी के दर्शन तथा विचारो की हत्या शुरू कर दी। ...

भेड़िया ! एक ऐसा जंगली जानवर जिसका नाम सुनते ही दहशत होने लगती है बेशक इसकी प्रजाति के ही कुत्ते और इंसान का सदियों पुराना साथ हो।

मनुष्य और कुत्ते का साथ सदियों पुराना है लेकिन कुत्ते के मूल भेड़िए को कभी इंसानी साथ नहीं मिल पाया क्योंकि जंगली जानवर होने के बावजूद उसकी कुछ विशेषताएं है जो उसको अन्य जानवरों से अलग करती हैं। ...

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शीर्षक है कि क्या भारतीय विदेशनीति अपनी आज़ादी किसी बाहरी शक्ति के इशारों पर नाचने लगी है या क्या वर्तमान सरकार विदेशी मामलों में कोई दृढ़ एवम् स्पष्ट निर्णय लेने में अक्षम साबित हो रही हैं। ...

भारत की बिगड़ती कानून व्यवस्था एवम् मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन होने के बावजूद बीजेपी सरकार तथा नौकरशाही द्वारा किया जा रहा अमानवीय व्यवहार।

यद्धपि News Number आमतौर पर सनसनी फैलाने वाली या अपराधिक घटनाओं की विवेचना से परहेज़ करता है लेकिन कभी कभी कुछ वाकयात जब दिल दिमाग को झिंझोड़ते हैं तो साझा करना पत्रकारिता का धर्म बन जाता हैं। ...

इक चतुर नार, करके सिंगार, मेरे दिल के द्वार ओ घुसत जात......... भारतीय सिने जगत के अनमोल सितारे महमूद को जन्मदिन मुबारक।

कलाकार की कला से कला और कलाकार को सम्मान देने की परम्परा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का एक प्रशंसनीय कदम रहा है। हीरो, हीरोइन, विलेंस की लंबी फेहरिस्त में कुछ नाम ऐसे भी हुए हैं जो फिल्मों के नहीं अपितु फिल्में उनके लिए बनती थी। ...

संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का मेला खत्म और इसके साथ ही बदलाव होने के संकेत सामने आना शुरू।।

अल्लाह अल्लाह खैर सल्लाह और इसी के साथ 2021 का संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का अधिवेशन सम्पूर्ण हुआ लेकिन अपने जीवन काल के अंतिम चरण में भविष्य के बहुत से संकेतो को स्पष्ट कर गया जिन्हे भारत पाकिस्तान या उपमहाद्वीप की शांति, सुरक्षा के दृष्टिकोण से समझना जरूरी हैं। ...

तेजी से बदलती भारतीय राजनीति या वैश्विक राजनीति के अनुसार नई दिशाएं एवम् नए बदलाव !

द्वितीय विश्व युद्ध के साथ ही न्यू वर्ल्ड ऑर्डर लागू हुआ, दुनियां को दो हिस्सों में बांट दिया गया जिसमे जो भी मार्शल कौम थी उन्हे भी संस्कृति को नजरंदाज करते हुए टुकड़ों में बांट दिया गया बेशक वो पंजाबी हो या कुर्द, अज़री, बलोच या मुस्लिम। ...

पटियाला राजघराने के कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस द्वारा इन्हे सम्मान दिए जाने का छुपा कारण !

1947 अंग्रेज़ो को हिंदुस्तान से जाना पड़ा और तीन शर्तो के साथ ब्रिटिश इंडिया को आज़ादी प्राप्त हुई जिसमे एक तो मुल्क का बटवारा था और दूसरा लगभग 600 प्रिंसली स्टेटस को निर्णय लेने का अधिकार कि वो चाहें तो भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बने या आज़ाद रहे। ...

भगतसिंह ! साजिशों का शिकार रहा अद्भुत व्यक्तित्व।

लेनिन, चे ग्वेरा, मार्क्स से लेकर किसी भी क्रांतिकारी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बिना किसी किसी परंतु के कहा जा सकता है कि भगत सिंह के विचार और कुर्बानी इनसे सबसे बहुत ऊंची थी क्योंकि भगत सिंह वो विराट नाम है जिसमे गांधी भी बसता था और गांधी को भी अपने दिलों दिमाग में भगत सिंह को बसाना पड़ा। ...

पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान और सिद्धू साहब की रहस्यमय समानता !

पंजाब दो हिस्सों में बटा हुआ है और दोनों ओर के पंजाबी दिलखुश तो है ही साथ भी प्रत्येक हलचल तथा घटनाओं के प्रति सचेत भी रहते है। 3 साल पुरानी इमरान खान की तब्दीली हकूमत का विश्लेषण वहां की जनता ने शुरू कर दिया है लेकिन इस बार आइने के दूसरी ओर नवजोत सिंह सिद्धू को दिखाया जा रहा। बेशक यह ऐतिहासिक तथ्य है या नहीं लेकिन निसंदेह अर्थपूर्ण तो है ही। ...

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा और असहज कर देने वाले दृश्य जिसके लिए घटना से अधिक रिपोर्ट करने वाले का दोष माना जा रहा है।

भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिका यात्रा से वापस दिल्ली लौट आए जहां उनके स्वागत हेतु विशेष आयोजन किया गया था। ...

इतिहास ही मेरे कर्मो का मूल्यांकन करेगा ! भारतीय उपमहाद्वीप का एक ऐसा व्यक्तित्व जिनकी शान में दुश्मन भी गुस्ताखी नहीं कर सकता बशर्ते इंसान हो।

एक खामोशी में बहुत से सवालों के जवाब होते है और उन्ही जवाबो में इतिहास की क्रूर कलम होती हैं जो सम्मानित या कलंकित करते समय केवल शुभ कर्मन के तराजू पर तोलती है कि किसको गांधी लिखना है और किसको गोडसे। ...

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा तथा राष्ट्रपति बाइडेन से मुलाकात ! भारतीय मीडिया एवम् कूटनीतिक दृष्टिकोण का अंतर।

एक ओर संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली का अधिवेशन चल रहा है और दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के क्वाड गुट के सदस्य देशों के प्रमुखों को विशेष आमंत्रण पर भारतीय प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन डी सी में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात की। ...

नारायण ! नारायण ! यदि नई पीढ़ी को नारद मुनि नाम लिया जाए तो अचानक जो चेहरा सामने आता है उसको "जीवन" के नाम से पहचान मिली।

दक्षिण एशिया की नस्लों में एक सांस्कृतिक समानता या मानवीय विशेषता है कि यहां प्रतीकों को महत्व दिया जाता है जैसे एक पूरी पीढ़ी को रामायण सीरियल वाले अरुण गोविल में राम नजर आते थे। ...

कनाडा चुनावों में जस्टिन ट्रुडो की जीत में भारतीय मूल के नागरिकों का सहयोग और विश्व में फैले भारतवंशी।

शावा चरखा चनन दा से लेकर चिट्टा कुकड़ बनेरे ते जैसे पंजाबी लोकगीत बेशक भारतीय और पाकिस्तानी पंजाब की संगीत महफिलों से गायब हो रहे हो लेकिन सात समुंदर पार कनाडा, यूके से लेकर दुनियां भर में फैले हिन्दुस्तानियों ने अभी भी जीवित रखे हुए है। ...