हिन्दुस्तानी फिल्म कलाकार जो मुंबई से पाकिस्तान चली गई।

अक्सर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की बात करते समय पृथ्वीराज कपूर से लेकर शाहरुख खान तक का जिक्र होता है जिनका मूल वर्तमान पाकिस्तान था और साथ ही सुरिंदर कौर, प्रकाश कौर जैसी हस्तियां याद आती है जिनका जन्म वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था।

 

लेकिन ऐसे भी बहुत से सितारे हुए है जिनके जीवन की शुरुआत वर्तमान भारत में हुई किन्तु समय और बटवारें ने उन्हें पाकिस्तानी बना दिया जिनमे सदात अली मंटो जैसे लेखक हो, अनवर मकसूद जैसे टीवी शोबिज हो या सिनेमा जगत की पहली हास्य कलाकार मीना शोरी ।

लारा लप्पा गर्ल मीना शोरी

चालीस और पचास के सालों की मशहूर आर्टिस्ट मीना शोरी. सिनेमा के इतिहास में महिला कॉमेडियन की शुरुआत उन्हीं से हुई बताई जाती है. उन्होंने भारत-पाकिस्तान में तक़रीबन 50 फ़िल्में कीं लेकिन कॉमेडी के नाम पर सिर्फ दो फ़िल्में भारत में और एक पाकिस्तान में.

मुल्तान में जन्मी मीना पहले खुर्शीद जहां थी. रूप के.शोरी से शादी के बाद वो मीना शोरी हो गयीं. रूप शोरी उनके तीसरे पति थे. पहले पति ज़हूर राजा थे, दूसरे अल नासिर, चौथे और पांचवें क्रमशः रज़ा मीर और असद बोखारी. 

मीना पहली पाकिस्तानी एक्ट्रेस थी जो 'लक्स' की मॉडल के रूप में दिखीं. उन्हें 'लक्स लेडी ऑफ़ पाकिस्तान' के नाम से भी जाना गया. उनकी पहली फिल्म सोहराब मोदी की 'सिकंदर' थी जिसमें वो कनिष्क के राजा की छोटी बहन के छोटे से रोल में थी.

सोहराब ने ही उन्हें खुर्शीद से मीना बनाया. पहले पति ज़हूर उन्हें यहीं मिले थे. प्यार हुआ, शादी हुई और कुछ दिनों बाद तलाक़. मीना घर पर बंध बैठने वाली नहीं बन सकी.

'सिकंदर' ज़बरदस्त हिट हुई. मीना की डिमांड भी बढ़ गयी. सोहराब मोदी ने उनसे तीन फिल्मों का कॉन्ट्रेक्ट साइन कराया जिसके मुताबिक वो बाहर की फ़िल्में नहीं कर सकती थी. इन्हीं में थी 'पृथ्वी वल्लभ' जिसके हीरो थे अल नासिर जो बाद में मीना के दूसरे शौहर बने. 

कॉन्ट्रैक्ट की वज़ह से मीना रूप शोरी की 'शालीमार' और महबूब खान की 'हुमायूँ' नहीं कर सकी. मीना ने सोहराब से पिंड छुड़ाना चाहा तो उन्होंने तीन लाख का दावा ठोक दिया. मीना ने इलज़ाम लगाया कि सोहराब ने उनके अनपढ़ होने का फ़ायदा उठाया था. बाद में वो सोहराब मोदी की पत्नी मेहताब की मदद से तीस हज़ार देकर कॉन्ट्रैक्ट से निजात पा सकीं. 

1947 के पार्टीशन में कई नामी आर्टिस्ट और फ़िल्मकार पाकिस्तान चले गए. अनेक लाहोर से बम्बई आ गए, जिनमें रूप के.शोरी भी थे. लेकिन मीना बम्बई में ही रही. रूप शोरी ने मीना और मोतीलाल को लेकर 'एक थी लड़की' (1949) बनायी. पहले सीन से आखिर तक कॉमेडी ही कॉमेडी. ज़बरदस्त हिट हुई ये. इसी में लता जी द्वारा गाया गाना था, लारा लप्पा लारा लप्पा लाइ रखदा...वो 'लारा लप्पा गर्ल' के नाम से आम आदमी के दिल में ज़बान के रस्ते चढ़ गयीं. इसी फिल्म के बाद मीना ने रूप शोरी से शादी कर ली.

शोरी ने मोतीलाल के साथ लारा-लप्पा थीम पर 'एक दो तीन' बनाई. लेकिन इस बार जादू चला नहीं. उस दौर का ऑडियंस शायद प्योर कॉमेडी बार-बार देखने के लिए तैयार नहीं था. 

1956 में शोरी और मीना को पाकिस्तान के प्रोड्यूसर जे.सी.आनंद ने लाहोर आने का निमंत्रण दिया. वहां उन्होंने गुरुदत्त की हिट 'मिस्टर एंड मिसेज़ 55' की खुली चोरी करके 'मिस 1956' बनाई. इस कॉमेडी से मीना की पाकिस्तान में इतनी वाहवाही हुई कि उन्होंने वहीं बस जाने का इरादा कर लिया. लेकिन रूप शोरी भारत लौट आये. 

मीना ने पकिस्तान में 29 उर्दू-पंजाबी फ़िल्में कीं, जिसमें 11 में वो हीरोइन रही. 1960 में मीना ने एलान किया कि वो 'मैं जट्टी पंजाब दी' करने के लिए भारत लौट रही हैं. बॉलीवुड ने पलकें बिछा दीं. लेकिन जाने ऐसा क्या हुआ कि वो आयीं नहीं. मीना का बचपन बहुत तकलीफ़ों गुज़रा. उनका पिता बहुत ज़ालिम था. बम्बई में ब्याही मीना की बड़ी बहन वज़ीर बेगम मीना और उसकी मां को बम्बई ले आयी. मीना का अंत भी बहुत तकलीफ़देह रहा. वो लाहोर के एक छोटे घर में तनहा रहती थीं.

खाने-पीने के लिए पाकिस्तानी आर्टिस्ट कौंसिल और रोटरी क्लब के रहमो करम पर रही. 9 फरवरी 1989 को 67 साल की उम्र में उनका इंतकाल हुआ. सुना है चंदा लगा कर उनका जनाज़ा उठा जिसमें चंद लोग ही शरीक हुए.

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