अफगानिस्तान से चीन तक बदलते हालात ! भारत के लिए चुनौती, चेतावनी या खुद को सिद्ध करने का मौका !

पिछले चार दिनों में हुई हलचल से अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर होते हुए तिब्बत तक की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत के लिए चुनौती, चेतावनी या समझदारी से काम करने की आवश्यकता है ?

शुरू करते है अफगानिस्तान और अमेरिका से। अमेरिका तथा तालिबान के बीच हुए समझौते के कारण पिछले पांच महीनों से दोनों पक्ष एक दूसरे के लिए युद्ध विराम की स्थिति में थे तथा कोई भी पक्ष दूसरे पर हमला नहीं कर रहा था लेकिन तालिबान अफगानिस्तान पर अपना कब्ज़ा बढ़ाते जा रहे थे जो यूएस समर्थित राष्ट्रपति अशरफ गनी के विरूद्ध था।

अचानक बुधवार रात अमेरिकी विमानों एवम् ड्रोन ने कंधार के आसपास स्थित तालिबान के ठिकानों पर बमबारी कर दी जिससे सूत्रों के अनुसार 5 तालिबानी लड़ाके मारे गए एवम् उनके सैनिक सामग्री के भंडारों को भी नुकसान पहुंचा।

पेंटागन ने हमला करने को स्वीकारते हुए टेक्निकल जानकारी देने से इंकार कर दिया अर्थात जहाज़ या ड्रोन कहां से उडे थे लेकिन कयास लगाया जा रहा है या तो काबुल से ही उड़ान भरी गई या भारत के जम्मू क्षेत्र से सम्भव है।

इसके साथ ही 27 जुलाई को अफगानिस्तान की गनी सरकार के सेनाध्यक्ष अहमदजई का भारत दौरा प्रस्तावित है और समझा जा रहा है कि वो भारत अफगानिस्तान सामरिक सन्धि 2011 के तहत भारत से अपनी सेनाए भेजने की प्रार्थना करेंगे किन्तु यहां ध्यान रखना चाहिए कि सन्धि वार अगेंस्ट टेरर के लिए थी जबकि तालिबान को अब आतंकी कहना भविष्य को कितना प्रभावित करेगा यह मुख्य विषय है।

इसी के साथ पाकिस्तानी हिस्से वाले कश्मीर में चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर में अपने स्तर पर रेफरेंडम कराने की घोषणा करके विश्व जगत को हैरान कर दिया और कुछ क्षेत्रो मे समझा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय शक्तियों द्वारा कोई गोपनीय ब्लू प्रिंट तैयार किया जा चुका है जिसके अनुसार भारतीय और पाकिस्तानी कश्मीर को बांट दिया जाए और विवादित क्षेत्र का स्तर समाप्त कर दिया जाए। इस प्रकार गिलगिट बाल्टिस्तान पाकिस्तान का पांचवा एवम् कश्मीर छंटवा राज्य बन सकता है !

उधर कश्मीर के साथ साथ लद्धाख और उसपर चीनी दावा तथा भारत के अरूणांचल प्रदेश सहित सिक्किम पर भी चीनी दावा तथा भारत चीन विवाद भी चिंता का विषय है। क्योंकि अमेरिका द्वारा भारत को कठपुतली बनाकर चीन को रोकने की कोशिश की जा रही है तो उसके जवाब में चीन के प्रीमियर ने भी अपना कडा संदेश दिया है।

वैसे तो भयंकर बाढ़ के कारण चीन का सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हैं लेकिन इसके बावजूद प्रीमियर शी जिनपिंग द्वारा तिब्बत में लहासा तथा भारत चीन सीमा के निकट सैनिक क्षेत्रो का दौरा बहुत कुछ संकेत देता है।

यूएस द्वारा तिब्बत कार्ड खोलने का प्रयास किया गया था और भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा दलाई लामा के जन्मदिन पर बधाई संदेश दिए जाने का उत्तर शी जिनपिंग ने दलाई लामा के महल में जाकर दिया जहां उन्होंने माओ को याद किया और सांकेतिक रूप से पंजा दिखाकर माओ के संदेश को दोहराया जिसके अनुसार तिब्बत चीन की हथेली थी और नेफा, सिक्किम, लद्धाख, अक्साई चिन एवम् भूटान आदि पांच उंगलियां ।

Newe Number पर प्रकाशित कई ओपिनियन एवम् विश्लेषण इस ओर इशारा करते रहे हैं कि बदलते हालात में युद्ध प्रॉक्सिस से लड़े जाने वाले हैं बेशक उनका स्तर विश्व युद्ध जैसा ही क्यों न हों और दूसरे पक्ष को अधिकतम आर्थिक नुकसान एवम् ब्लीडिंग ही विजय का फॉर्मूला होगा।

तो क्या भारत को उत्तर पूर्व से लेकर पश्चिम सीमाओं तक अंगेज करने की पॉलिसी पर काम किया जा रहा है ?

क्या बिगड़ी अर्थव्यवस्था के बीच भारत इतना सक्षम है कि लगातार सीमाओं पर सैनिक तैनाती जारी रख सके ?

क्या यूएस द्वारा भारत को अफगानिस्तान में सैनिक भेजने का दबाव बनाया जाएगा अन्यथा मोदी सरकार को मानवाधिकारों जैसे आरोपों के लिए तैयार रहना होगा ?

क्या आपने इतिहास की तरह इस बार यूएस भारत की मोड़ी सरकार को टिशू पेपर बनाने जा रहा है ?

इन घटनाओं से बहुत से सवाल खड़े होते है जिन पर शांति और समझदारी से विचार किया जाना चाहिए।

अफ़ग़ानिस्तान कार्यवाहक सरकार की घोषणा और इसका भारत पर असर !

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दुनियां के बदलते समीकरण की बात करते ही सबसे महत्वपूर्ण घटना अमेरिकी एवम् नाटो फोर्सेज का बीस साल की जद्दोजहद के बाद अफगानिस्तान को छोड़ कर निकल जाना है। ...

काबुल से अंतिम अमेरिकी सैनिक की विदाई के साथ अफ़गान समस्या समाप्त या शुरुआत ?

20 साल तक जमीन के छोटे से टुकड़े और क़बीलाई संस्कृति वाले दिलेर लोगो की बस्ती पर विश्व के 40 देशों एवम् महाशक्ति अमेरिका की फोर्सेज कोशिश करती रही कि वहां भी पश्चिमी जगत बना दिया जाए। उसी समय ( 2001) पाकिस्तान के हामिद गुल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि इस प्रयास में अमेरिका को अमेरिका द्वारा ही हराया जाएगा और वही हुआ। ...

दक्षिण एशिया और मध्य एशिया का पुल जो graveyards of empires कहलाती हैं आजकल दुनियां की नजरों में है।

स्लतनतों की कब्रगाह के नाम से प्रसिद्ध धरती का ऐसा भूभाग जिसकी मिट्टी में युद्ध और अशांति जंगली घास की तरह उपजती है। दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने वाले इस सामरिक महत्व के प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हिस्से को अफगानिस्तान के नाम से जाना जाता है। मैथोलॉजी और किवदंतियों में महाभारत से लेकर चन्द्रगुप्त मौर्य तक का सम्बन्ध तत्कालीन गांधार देश से जोड़ा जाता हैं तो अलेक्जेंडर और रोमन साम्राज्य से भी टकराने के लिए याद किया जाता है किन्तु क्या इसका वास्तविक इतिहास ऐसा ही था ? ...

तालिबान अफगानिस्तान के बढ़ते कदम पाकिस्तान और ईरान के लिए एक बड़ा खतरा !

जिस तेजी से और सामरिक योजना से तालिबान आगे बढ़ रहे है और सम्भावना जताई जा रही है कि वो काबुल फतह कर लेंगे तो क्या इसके बाद क्षेत्र में शांति स्थापित हो जाएगी या एक नया खतरा बढ़ जाएगा। ...

छद्म विश्व युद्ध का एशियाई थियेटर और भारत सरकार की नीतियां !

वर्तमान स्थितियों में चल रहे छद्म विश्व युद्ध के मैच में फिलहाल कोशिश की जा रही है कि बाल दूसरे के पाले में कैसे धकेली जाए और कैसे नए सहयोग संगठन खड़े किए जाए जिनका अंत इस क्षेत्र में भारत में ही होने की सम्भावना है। ...

अपनी अस्मिता और भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रयासरत भारतीय विदेशमंत्री !

एक ओर तो अफगानिस्तान में गृहयुद्ध की आशंका बढ़ रही हैं तो दूसरी ओर सभी पक्ष अपनी अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित है। ...

कश्मीर से लेकर उत्तर पूर्व भारत तक फैले सीमा विवाद की हकीकत जिसे सरकारें छिपा लेती हैं।

आजादी के बाद से ही भारत का अपने पड़ोसी देशों से या पड़ोसी देशों का भारत से विवाद रहा है लेकिन सरकारों ने कभी खुले मन से अपनी अपनी जनता को इससे अवगत नहीं कराया। ...

अफगानिस्तान के बदलते हालात और अफ़गान तालिबान की योजनाएं उनके प्रवक्ता की जुबानी

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बदलते हालात और भविष्य की योजनाओं को लेकर तालिबान प्रवक्ता से खास बातचीत। ...

दक्षिण एशिया का टाइम बम जिसकी सुईयां तेजी से घूम रही हैं।

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ साथ अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ गनी को कोई सकारात्मक आश्वासन न मिलना क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। ...

अफ़गान राष्ट्रपति की अमेरिका यात्रा

इस प्रकार बहुचर्चित अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ गनी की अमेरिकी यात्रा खत्म हुई । वापसी के बाद अफगानिस्तान एवम् दक्षिण एशिया के भविष्य की क्या स्थिति हो सकती हैं। ...

अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ गनी की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात ।

बीस साल से चल रही जंग की समाप्ति के साथ ही अमेरिका द्वारा अमेरिकी एवम् नाटो फोर्सेज की वापसी के साथ ही अफ़गान तालिबान द्वारा अधिकांश क्षेत्रो पर कब्जे के बीच अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की। ...

अफगानिस्तान ! अमेरिकी तथा नाटो फोर्सेज की वापसी के बाद क्या ? तालिबान प्रवक्ता सुहैल शहीन से बातचीत

जिस तेजी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी अफगानिस्तान से हो रही है और तालिबान द्वारा अफ़गान जमीन पर अपना कब्ज़ा कायम किया जा रहा है उससे सम्भावित भविष्य के हालात पर तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन से एक बात।। ...

अफगानिस्तान का भविष्य ? आज के हालात पर NewsNumber की विशेष रिपोर्ट

तेजी से अफगानिस्तान को विकल्पहीन छोड़कर निकलती नाटो एवम् अमेरिकी फोर्सेज के बाद अफगानिस्तान का भविष्य एक बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।। ...

अफ़गान तालिबान से भारत ने सम्पर्क कायम किया जिससे अफ़गान शांति की राह में कुछ नए बदलाव महसूस किए जा रहे हैं।।

भारतीय विदेश मंत्री श्री एस जयशंकर प्रसाद की दोहा एवम् कुवैत यात्रा के बीच अफगानिस्तान के सरकारी मीडिया टोलो न्यूज द्वारा भारत द्वारा तालिबान से सम्पर्क करने की खबर का क्या अर्थ हो सकता है ? ...

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी से बढ़ती अराजकता का भारत पर प्रभाव !

जैसे जैसे अमेरिकी एवम् नाटो फोर्सेज अफगानिस्तान से अपने अड्डे खाली कर रहे है और अफगानिस्तान से निकल रहे हैं वैसे ही दक्षिण एशिया किसी बड़े युद्ध की ओर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।। ...

अफगानिस्तान से अमेरिकी एवम् नाटो फोर्सेज की वापसी लेकिन भविष्य में शांति की गारंटी नहीं।

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम के साथ दिए जा रहे बयानात के मद्देनजर अभी दक्षिण एशिया में शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती। ...