Canada ! Dreamland of young Punjabi boy's. But differences are quite visible

Today Punjab has population of 28 millions which in India conversation nomenclature is 2.8 Crores. 

Canada has 38 Million , 3.8 Crores. 

Out of this Ontario has exactly half of it , 14 millions & California has 39 millions. 

 

The reason I made comparisons that Punjab & California as two states & Canada as a country about these close population numbers is to explain logic of cost of living as these pictures where PM of a country (which is one out of seven developed countries in a decision making group known as G7) & the point to observe here is that being a PM he is shopping in an average grocery store ( Metro ) where common citizens shop and look at the conveyor belt where all groceries are rolled to check out for payment and one can see canned beans & cereals & day to day kitchen items & that’s where a PM of a country can suss out the price he is paying as would be any other citizen. 

This is one of the reason of Canada’s economic prosperity that it’s a place for immigrants from all around the world & a minimum wage job can let you make a living in a decent way. 

 

The only thing which is beyond Government’s control in Canada is the housing prices in Toronto & Vancouver as lot of speculators have invested in housing sector as the actual prices are beyond common citizen’s reach and Canadian Government is very seriously looking into this managed price fixing. 

 

One of the reason is that to build a new house there is a very long and meaningful process to get new building permit from local municipality and if you demolish an existing house then you can not stretch the square footage beyond a limit of the demolished house for example if existing house is being demolished to pave the way for new one & if its size is 3000 square feet then new house on that spot cannot go beyond 3300 square feet, an increase of 10 percent of existing occupancy. 

So speculators have invented a system to trade contracts through an invented system called assignment and even before a house is made & ready to move in the ownership is traded on the basis of existing booking contract with the builder. 

So whenever a builder advertises a new building project & sells a house by showing rendering on computer screen & through brochures the buyer for example seals the deal say of one million dollar in price and house will be ready in one year so 20% down payment of one million is 200000 & rest of 80% is 800000 which is loan ( mortgage ) & is easily available. 

 

So a speculator just puts up 200000 to book new house & now has a ownership souvenir in his possession that in an year from now house will be ready and now that booking contract is traded so next buyer pays that guy who originally as being the first one who booked the house , a premium and takes it over for 300000 so original buyer made a profit of 100000 in matter of days and the chain reaction goes on & on and the original price of one million house is traded so many times that before even the foundation of the house is dug, the assignment of the contract has made few exchanges and house is now trading near two millions. 

 

All these people who exchanged assignment contracts are speculators and made their profits even before the house even physically existed on ground . None of them had any intention to live in the house they traded & builders love it as they get money before even starting construction as they have deposit & mortgage commitment from bank to start a project. 

That’s a major issue and soon it will be busted as recently Government made it a rule to have stricter qualification for second home & third home buyers to discourage multiple ownerships by same owner but then a circumventing technique is to book under an offshore holding company a new booking from builder so imagine a company registered in Bahamas is an owner of a house in Toronto & the shareholder / owner of that company in Bahamas is a trust managed by another offshore entity in Bermuda . 

Today’s human race is very smart to invent loopholes and that’s what is going on that blockchain technology is emerging wherein Bitcoin will be a virtual currency and no trace & anonymous ownership & that’s where speculators will be untraceable and worldwide stock markets will spin with the whims & fancies of crooked speculators/manipulators & common citizens will find it difficult to sustain. 

Credit goes to Jagdeep Cheema Sir

बद से बदनाम बुरा और जब किसी सरकार पर संस्थानों और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगने लगे तो उसके नेता का इकबाल खत्म हो जाता है।

भारत या कोई भी लोकतांत्रिक देश हो वहां सरकारों के अतिरिक्त अन्य संवैधानिक संस्थाएं भी होती हैं और व्यवस्था स्थापित करने के लिए कई स्वतंत्र विभाग भी होते है जिससे सभी के सभी काम ईमानदारी से चलते रहे एवम् जम कल्याण तथा विकास कार्यों में कोई बाधा न हो। ...

कूटनीति, मोदी सरकार और दुशांबे सम्मिट ! SCO बैठक का विश्लेषण एवम् भारतीय प्रधानमंत्री का संबोधन।

आज समाप्त होने वाली शंघाई सहयोग संगठन की शिखर मीटिंग में भारतीय प्रधानमन्त्री द्वारा वर्चुयल संबोधन प्रसारित किया गया। संगठन एवम् कूटनीति का अपने विचारो के अनुसार विश्लेषण करने का प्रयास। ...

कनाडा और भारत दुनियां के दो ऐसे देश है जहां बहुत सी सभ्यताएं बसती हैं और साथ साथ चलती हैं दूसरी समानता यह है कि पंजाबियों ने अपने खान पान से सबको प्रभावित किया है।

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गणपति बप्पा मोरया । आजकल भारत में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है जिसे आज़ादी के संग्राम के समय पब्लिक मीटिंग्स के लिए बहाने के तौर पर शुरू किया गया था।

गणपति बप्पा मोरया । आजकल भारत में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है जिसे आज़ादी के संग्राम के समय पब्लिक मीटिंग्स के लिए बहाने के तौर पर शुरू किया गया था। लेकिन कालांतर में यह धार्मिक आयोजन और आस्था का अटूट अंग बन गया। क्योंकि दक्षिण एशिया की संस्कृति में भावनात्मकता का पुट अधिक होता है और सदियों तक आश्रित रहने वाली नस्लों को हमेशा किसी चमत्कारिक लाभ की उम्मीद रहती हैं इसीलिए पीर फकीर से लेकर विभिन्न आस्थाओं का बोलबाला है। गणेश चतुर्थी जो कभी महाराष्ट्र में मनाई जाती थी अब उत्तर भारत के अधिकांश बड़े शहरों में मनाया जा रहा है। यहां तक कि पंजाबी समुदाय भी अब गणेश प्रतिमा स्थापित करने लगा है बेशक गणपति के पीछे का दर्शन ना जानते हो। ...

सुधा मूर्ति ! यदि इंफोसिस फाउंडेशन का नाम सुना होगा तो उसकी चेयर पर्सन को भी जरूर जानते होंगे ! आज उनके पिता को जानिए।

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पंजाबी भाषा की फिल्मों में नानक नाम जहाज है का रेकॉर्ड आज तक कायम है और उसके साथ ही "पासा पुट्ठा पै गया" डायलॉग भी याद होना चाहिए।

हिन्दी सिनेमा के अतिरिक्त पंजाबी भाषा में भी कई फिल्में बनी और उस कड़ी में नानक नाम जहाज है नामक फिल्म की सफलता ने जो झंडे फहराए वो आज तक किसी दूसरी फिल्म के भाग्य में नहीं आया। उस फिल्म के मोहम्मद रफी की आवाज़ के गाए गए शब्द आज भी आत्मिक सुख देते हैं लेकिन एक चरित्र और याद आता है जिसका "पासा पुट्ठा पै गया" बोलना कभी नहीं भूलता। ...

जिस प्रकार प्रत्येक शहर की पहचान के साथ किस न किसी भवन से बताई जाती है वैसे ही दिल्ली को कुतुब मीनार और लोट्स टैम्पल से पहचाना जाता है।

प्रत्येक शहर की पहचान के साथ वहां के किसी न किसी भवन को जोड़कर देखा जाता है जैसे आगरा को ताजमहल और दिल्ली को कुतुब मीनार तथा लोटस टैंपल से पहचाना जाता है। लेकिन लोटस टैंपल देखने जाने वाले विजीटर्स के मन में यह विचार अवश्य आता होगा कि यह कैसा मन्दिर है जिसमे देखने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि यह बहाई संप्रदाय का पूजा स्थल है। बहाई संप्रदाय के सम्बन्ध मे मनीष सिंह की रिपोर्ट। ...

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10 सितम्बर से 12 सितम्बर तक तीन दिन का एक वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया गया जिसे C oHNA ने Dismentaling Global Hindutva के नाम से आयोजित किया। वाशिंगटन पोस्ट तथा अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस सम्मेलन पर व्यापक रिपोर्टिंग करते हुए कई आलेख प्रकाशित किए यद्धपि भारत में इसकी चर्चा भी नहीं हुई। ...

जुल्फिकार अली भुट्टो! दक्षिण एशिया का ऐसा राजनेता जिसके नाम पर आज भी राजनीति होती हैं बेशक उसकी सोच से कोई सहमत हो या न हो।

जिवें सिंध ते जीवें भुट्टो के नारे के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी आज तक राजनीति करती हैं बेशक जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया था और बीबी बेनजीर भुट्टो को शहीद कर दिया गया था। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान टूटने के बाद अपने देश को भुट्टो ने नई दिशा दी और मनोबल टूटने नहीं दिया। ...

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हिन्दी दिवस! भाषा की आड में संस्कृति बदलने की कवायद।

14 सितम्बर जिसे हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है और इससे अधिक हास्यास्पद क्या होगा कि वो सभी हैप्पी हिंदी डे बोलने लगते है जिन्हे उन्यासी और नवासी का अंतर भी मालूम नहीं होता तथा जो अपने बच्चो को कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक किए रहते है बेशक वहां हिंदी बोलने की सख्त मनाही हो। ...

क्रान्ति होती हैं, जनता द्वारा की जाती है लेकिन उस क्रांति को खड़ा करने और लक्ष्य तक पहुंचाने के पीछे जनता नहीं होती।

क्रांतियां होती हैं और आज के अधिकांश देशों के निर्माण के साथ किसी न किसी क्रांति का नाम जुड़ा हुआ है तथा साथ ही क्रांति लाने वाले नेता का भी। किन्तु उन क्रांतियों के पीछे कोई सार्थक उद्देश्य रहे थे और उनका नेतृत्व किसी सक्षम व्यक्ति के हाथ में था। परन्तु यदि भीड़ के लिए कोई अराजकता खड़ी करनी हो तो योजनाकार क्या करते हैं ? ...

पीचे देखो पीचे , पीचे तो देखो उधर भी आग लगी है और उसकी चिंगारी बी नुकसान पहुंचा सकती है।

एक महीने से अधिक हो चुका है जब काबुल से तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश से भाग गए थे और तालिबान ने काबुल फतेह कर लिया था। उसके बाद से आजतक भारतीय मीडिया एवम् विचारक केवल अफगानिस्तान केंद्रित खबरे तथा विश्लेषण कर रहे है। ...

ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਦੀਆਂ ਸਿਆਸੀ ਪਾਰਟੀਆਂ ਨੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਮੂਹਰੇ ਟੇਕੇ ਗੋਡੇ, ਸਾਨੂੰ ਮਾਫ਼ ਕਰਿਓ! (ਨਿਊਜ਼ਨੰਬਰ ਖ਼ਾਸ ਖ਼ਬਰ)

ਕੱਲ੍ਹ ਕਿਸਾਨਾਂ ਮੂਹਰੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਸਿਆਸੀ ਪਾਰਟੀਆਂ ਗੋਡੇ ਟੇਕ ਗਈਆਂ। ਜਿਹੜੇ ਵੱਡੇ ਵੱਡੇ ਲੀਡਰਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਣ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਵਾਸੀ ਸਾਲਾਂ ਤੱਕ ਤਰਸਦੇ ਰਹੇ, ਉਹ ਕਿਸਾਨਾਂ ਮੂਹਰੇ ਝੁਕਦੇ ਹੋਏ, ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਹਰ ਗੱਲ ਮੰਨਣ ...

9/11 जिसे आतंकी घटना से लेकर यूएस अंडर अटैक बोला गया एक कभी ना सुलझने वाली उलझन है।

बीस साल पहले अचानक दुनियां भर को दहलाने वाली खबरे चलने लगी और उसे इतिहास 9/11 के नाम से जानती है, इसी घटना के बाद इराक़ हमला हुआ, अफगानिस्तान पर कार्पेट बंबिंग हुई और नाम मिला वार अगेंस्ट टेरर किन्तु जो सवाल खड़े हुए वो आज भी जवाब मानते है।। ...

हम बेईमान क्यो कहलाते है ? क्योंकि हमारे नेता, हमारे अधिकारी और हम खुद बतौर एक वोटर, ईमानदार नहीं है।

यकीनन किसी भी भारतीय के मन में अपने इर्दगिर्द के माहौल को देखकर यह सवाल पूछने का मन करता होगा " हम बेईमान क्यों है" ...

ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੇ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਿਆਸੀ ਲੀਡਰਾਂ ਦੀ ਝਾੜਝੰਬ! (ਨਿਊਜ਼ਨੰਬਰ ਖ਼ਾਸ ਖ਼ਬਰ)

ਬੀਤੇ 9 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਵੀ ਜਿਆਦਾ ਸਮੇ ਤੋਂ ਕਿਸਾਨ ਦਿੱਲੀ ਦੀਆ ਸਰਹੱਦਾਂ 'ਤੇ ਡਟੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਕਿਸਾਨ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਪਾਸ ਕੀਤੇ ਗਏ 3 ਨਵੇਂ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਨੂੰ ਰੱਦ ਕਰਨ ਅਤੇ MSP 'ਤੇ ਪੱਕਾ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਅੱਜ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ 32 ਕਿਸਾਨ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੀ ਇੱਕ ਕਚਹਿਰੀ ਲੱਗੀ। ...