अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा पेगासस जासूसी कांड का खुलासा होने के बाद भारत की मोदी सरकार के विरूद्ध रोष बढ़ता जा रहा है।

वैसे तो भारत सहित दुनिया के कई देशों, विशेषकर थर्ड वर्ल्ड में फोन टैपिंग जैसे कांड होते रहे हैं बेशक यह असंवैधानिक एवम् मानवाधिकारों का हनन है। 

दिल्ली में युवा कांग्रेस द्वारा संसद की ओर विरोध मार्च निकाला गया तो पत्रकारिता की आज़ादी पर हमला होते देखकर पत्रकार समूह द्वारा भी विरोध दर्ज कराया गया, दिल्ली से श्याम सिंह रावत की रिपोर्ट।

प्रेस संगठनों ने पेगासस जासूसी की निंदा की है; गृहमंत्री ने कहा कि देश के विकास की राह में रोड़े डाले जा रहे हैं

पेगासस जासूसी को लेकर देश के विभिन्न पत्रकार संगठनों जैसे—द प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प्स और मुंबई प्रेस क्लब ने पत्रकारों के फोन की कथित जासूसी के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए इसकी निंदा की है और सरकार से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है। इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकता को जन्म देने वाला करार दिया।

प्रैस क्लब ऑफ इंडिया ने अपने दो ट्वीट में लिखा—इस देश के इतिहास में यह पहली बार है कि हमारे लोकतंत्र के सभी स्तंभों; न्यायपालिका, सांसदों, मीडिया, कार्यपालकों और मंत्रियों की जासूसी की गई है। यह अभूतपूर्व है और प्रैस क्लब ऑफ इंडिया स्पष्ट रूप से इसकी निंदा करता है। आंतरिक उद्देश्यों के लिए जासूसी की गई है और जो बात परेशान करती है वह यह है कि एक विदेशी एजेंसी, जिसका देश के राष्ट्रीय हित से कोई लेना-देना नहीं है, अपने नागरिकों की जासूसी करने में लगी हुई थी। पीसीआइ के ट्वीट में यह भी कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर सफाई देनी चाहिए और स्पष्टीकरण देना चाहिए।

एक अन्य महिला पत्रकार संगठन, इंडियन वूमेन प्रैस कॉर्प्स ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए ट्वीट किया—यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत जैसे लोकतंत्र में पत्रकारों को अपने काम के दौरान कुछ इस तरह से गुजरना पड़ता है। देश का संविधान स्वतंत्र पत्रकारिता और जनाधिकार को बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।

मुंबई प्रैस क्लब ने भी कथित जासूसी की निंदा करते हुए और इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है—हम 40 भारतीय पत्रकारों के फोन पर जासूसी की कड़ी निंदा करते हैं, हालांकि सरकार ने जासूसी की न तो पुष्टि की है और न ही इनकार किया है। जबकि पेगासस सॉफ्टवेयर केवल सरकारों को बेचा जाता है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

संसद में भी इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ। विपक्ष ने वायर की सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद राहुल गांधी सहित कुछ पत्रकारों और राजनेताओं की कथित जासूसी पर हंगामा किया। 

कांग्रेस ने भी मोदी सरकार पर हमला बोला। उसने कहा कि सरकार ने लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया है। कांग्रेस ने राहुल गांधी की जासूसी करवाने को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है।

कांग्रेस ने कहा कि सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि उनके स्टाफ, खुद के कैबिनेट मंत्रियों, विपक्ष के दूसरे नेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्टों की जासूसी करवाई गई है। क्या यह उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई है?

कांग्रेस ने जासूसी कांड सामने आने के बाद गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। उसका कहना है कि गृहमंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए।

जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले कल देर शाम एक रिपोर्ट आती है, जिसे कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया जाता है कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने नैरेटिव के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े करेंगे।