डिप्लोमेटिक नाटक का अंत जिसके कारण पाकिस्तान की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

दो दिन पहले दुनियां भर के राजनयिक क्षेत्रो मे हलचल मच गई जब समाचार मिला कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से अफगानिस्तान के राजदूत की बेटी का अपहरण हो गया है।

निसंदेह यह सभी के लिए चिंतनीय विषय था क्योंकि जेनेवा कनवेंशन के अनुसार किसी भी देश में कार्यरत राजनयिक परिवारों को सुरक्षा की जिम्मेदारी और गारंटी मेजबान देश की होती हैं और ऐसे में जब अफगानिस्तान की आधिकारिक सरकार तथा पाकिस्तान के बीच कई विषयों को लेकर आरोप प्रत्यारोप लग रहे हो।

घटना का विवरण अफ़गान दूतावास द्वारा कुछ ऐसे दिया गया कि इस्लामाबाद स्थित राजदूत की बेटी घर से बाज़ार के लिए निकली और टैक्सी लेकर वहां की बेकरी तक गई। उसके बाद जब वो वापिस लौटने लगी तो दूसरी टैक्सी मे कुछ अनजान व्यक्तियों ने उनका अपहरण कर लिया, उनके साथ मारपीट की, फोन छीन लिया तथा कुछ घंटों के बाद उन्हें इस्लामाबाद में ही पार्क के निकट कूड़े के ढेर पर फेंक कर चले गए।

उनके अनुसार वो लगभग बेहोश थी और कपड़े भी फट गए थे क्योंकि उनके पास फोन नहीं था तो उन्होंने किसी के फोन से अपने पिता के सहयोगी को सम्पर्क किया जो उन्हे सुरक्षित घर वापिस ले गया।

बेशक इस कहानी के बाद हड़कंप मचना चाहिए था और ऐसा हुआ भी। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे जोर शोर से प्रसारित किया गया यहां तक कि पाकिस्तानी विपक्षी नेता मरियम नवाज़ शरीफ़ ने भी सार्वजनिक रैली में इसके सन्दर्भ मे वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार की कडी निंदा करते हुए आलोचना की।

इन्हीं आलोचनाओं को मजबूती देने के लिए एक घायल अनजान अफ़गान महिला का चित्र प्रसारित किया गया जिसे बाद में खुद दूतावास द्वारा गलत बताते हुए कथित रूप से अपहृता का चित्र साझा किया गया।

घटना की गम्भीरता को देखते हुए इस्लामाबाद पुलिस एवम् अन्य एजेंसियां हरकत में आई और विज्ञान तथा तकनीक के आधुनिक माध्यमों का सहारा लेते हुए केवल 48 घंटे में सबूतों सहित घटना का पर्दाफाश कर दिया लेकिन उससे पहले अफ़गान दूतावास के अधिकारी पाकिस्तान छोड़ने की घोषणा कर चुके थे जिसका एक कारण यह भी हो सकता है कि उन्हें अहसास हो गया होगा कि विज्ञान के युग में उनकी कहानी झूठी साबित होने वाली थी ।

पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख रसीद तथा विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस जांच का विवरण साझा करते हुए बताया कि बेटी होने के नाते विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा रही क्योंकि दक्षिण एशिया की संस्कृति में बेटी के सम्मान की रक्षा करना भी एक प्रकार से धर्म माना गया है।

उनके अनुसार वो मोहतरमा घर से पैदल निकली तथा निकट की मार्केट से टैक्सी लेकर खड्डा मार्केट गई जहां अफ़गान मूल के मिस्त्री पुराने वाहनों की मरम्मत करते है। वहां से उन्होंने दूसरी टैक्सी ली और रावलपिंडी गई जहां के खक्कड़ मॉल के सीसीटीवी में उनकी फुटेज उपलब्ध मिली।

रावलपिंडी से वो दामने कोह ( इस्लामाबाद के निकट का टूरिस्ट स्पॉट ) गई और फिर वापिस शहर की ओर टैक्सी ली लेकिन अपने घर/दूतावास से उल्टी दिशा की ओर गई। रास्ते में उसने टैक्सी रोककर किसी ठेली वाले के फोन से अपने पिता के सहायक को फोन किया और उसे अगले स्टॉप पर पार्क में आने के लिए बताया जहां पर फेंके जाने का आरोप लगाया गया था। यहां यह भी बताया जा रहा है कि वो सहायक उसका बचपन का अभिन्न मित्र भी है जिसका फोन नंबर उसे याद था बेशक अपने किसी परिवार के सदस्य का नंबर याद नहीं था।

लेकिन देर रात वो स्थानीय अस्पताल गई और लीगल मेडिकल रिपोर्ट बनवाने के बाद पुलिस को सूचित किया कि उनका अपहरण हो गया था तथा उनका फोन छीन लिया गया था और मारपीट की गई।

स्थानीय पुलिस ने सभी सीसीटीवी फुटेज से उनकी उपस्थिति साबित कर दी जिसमे वापसी से पहले उनके हाथ में फोन का होना तथा वहां से इंटरनेट का उपयोग किया जाना भी साबित हो रहा था।

बहरहाल इसी बीच दूतावास के स्टाफ द्वारा इस्लामाबाद छोड़ दिया गया और एक प्रकार से पाकिस्तान एवम् अफगानिस्तान के राजनयिक रिश्ते समाप्त हो गए क्योंकि काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के स्टाफ को भी वापिस आना होगा।

आमतौर पर भारत, पाकिस्तान या बांग्लादेश की पुलिस इतनी तत्परता से कार्यवाही नहीं करती। यदि करे तो कोई संदेह नहीं है कि क्षेत्र अपराध मुक्त हो जाए विशेषकर इस्लामाबाद और नई दिल्ली में जिस प्रकार तकनीक के माध्यम से अपराधियों को पकड़ना आसान है।

इसके अतिरिक्त इस घटना से राजनेताओं एवम् मीडिया को भी सबक लेना चाहिए कि रिपोर्टिंग करते समय सबसे तेज होने के लालच में गलतफहमियां पैदा न करें जैसा कि यहां गलत फोटो और एकतरफा आरोपों से किया गया।

बेशक News Number इस बात पर गर्व महसूस करता है कि हमारा कोई भी ओपिनियन या रिपोर्ट तथ्यात्मक ही होती हैं और पीत पत्रकारिता को बढ़ावा नहीं देती।

जुल्फिकार अली भुट्टो! दक्षिण एशिया का ऐसा राजनेता जिसके नाम पर आज भी राजनीति होती हैं बेशक उसकी सोच से कोई सहमत हो या न हो।

जिवें सिंध ते जीवें भुट्टो के नारे के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी आज तक राजनीति करती हैं बेशक जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया था और बीबी बेनजीर भुट्टो को शहीद कर दिया गया था। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान टूटने के बाद अपने देश को भुट्टो ने नई दिशा दी और मनोबल टूटने नहीं दिया। ...