18 जुलाई नेल्सन मंडेला दिवस के रूप में विश्व के उस महामानव के नाम जिसने रंगभेद के विरूद्ध अपने जीवन को दांव पर लगा दिया।

सभे की जात एके पहचानबो, और एक नूर से सब जग उपज्यो जैसे महामंत्रों को जीवन में उतारने और इनके लिए संघर्ष करने वाले यदि किसी महामानव का वर्तमान काल में उल्लेख किया जाना चाहिए तो निसंदेह वो नेल्सन मंडेला ही है जिन्हे पहले विदेशी नायक के रूप में भारत सरकार ने भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया था उनके जीवन चरित्र पर कुछ शब्द उर्मिलेश उर्मिल साहब के सहयोग से।

दक्षिण अफ्रीकी मुक्ति-संग्राम के नेता नेल्सन मंडेला(18जुलाई, 1918--5 दिसम्बर, 2013) का आज जन्मदिन है. रंगभेदी निरंकुश शासन से मुक्ति के बाद मंडेला 10 मई, सन् 1994 से 14 जून, सन् 1999 तक देश के राष्ट्रपति रहे. बाद में उन्होंने सत्ता-राजनीति से किनारा कर लिया और अपना ज्यादा वक़्त सामाजिक कामकाज में लगाया. उन्हें सन् 1993 में ही नोबेल (शांति) पुरस्कार से भी नवाज़ा गया. 

मंडेला और उनके साथियों के लंबे, सतत संघर्ष और महान् बलिदान के बावजूद दक्षिण अफ्रीका को वह शांति, सामाजिक समानता, सद्भावना और खुशहाली नहीं मिली, जिसका करोड़ों दक्षिणी अफ्रीकी लोगों ने सपना देखा था. हाल के घटनाक्रम से भी समझा जा सकता है कि आज दक्षिण अफ्रीका के हालात कितने ख़राब हैं.

इसे एक आश्चर्य या मानवता विरोधी ताकतों की सफलता भी समझा जा सकता है बेशक उनकी उम्र बहुत कम हो कि नेल्सन मंडेला के जीवन चरित्र और कुर्बानियों को उनके अपने देश में ही भुला दिया जा रहा है।

भारत रत्न नेल्सन मंडेला का जन्मदिन एवम अंतर्राष्ट्रीय मंडेला दिवस भी है।

27 वर्षो तक रॉबिन द्वीप में सी ग्रेड के कैदी के रूप में कैद रहे ऐसे महान नेता की प्रेरणा महात्मा गांधी थे।

सी ग्रेड का अर्थ ऐसे कैदी से है जिन्हें सश्रम कारावास मिलता है तथा 24 घण्टे में एक बार अन्य कैदियों का बचा हुआ जूठा खाना दिया जाता हैं।

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