अफगानिस्तान के बदलते हालात और अफ़गान तालिबान की योजनाएं उनके प्रवक्ता की जुबानी

4 जुलाई, अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस और उसी के साथ अमेरिकी तथा नाटो फोर्सेज द्वारा अफगानिस्तान से सम्पूर्ण वापसी की घोषणा की उम्मीद।। लेकिन बिना किसी योजना या आंतरिक समझौते के अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान को विकल्पहीन छोड़कर जाना तथा अफ़गान तालिबान द्वारा लगातार देश को अपने शासन में लेते जाने के बीच अफ़गान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह से खास बातचीत उनके अनुरोध पर उनका चित्र धुंधला किया गया है।

बड़गाम एयर बेस छोड़ने के बाद यह तालिबान की ओर से किसी प्रवक्ता का पहला बयान था और इसमें उन्होंने बताया कि भविष्य में उनकी योजना एक शांति प्रिय समृद्ध देश के निर्माण की है। अफगानिस्तान में आय का मुख्य स्रोत अफीम की खेती है जिसके सम्बन्ध मे उन्होने कहा कि फिलहाल पहले की तरह तो इस खेती को एकदम समाप्त नहीं किया जाएगा किन्तु इसकी उपज और बिक्री पर नियंत्रण रखेंगे एवम् बाद में किसी भी प्रकार के नशे के उत्पादन, वितरण पर रोक लगा दी जाएगी।

भारत द्वारा उनसे सम्पर्क किए जाने के सम्बन्ध मे जबीउल्लाह ने स्पष्ट किया कि कोई आधिकारिक सम्पर्क नहीं किया गया है एवम् तालिबान ने इसके लिए कभी प्रयत्न भी नहीं किया।। क्योंकि काबुल से मात्र 30 किमी दूर तक तालिबान का कब्ज़ा हो चुका है तो काबुल में प्रवेश एवम् काबुल फतेह पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए उन्हें कोई हड़बड़ाहट नहीं है और वो कभी भी ऐसा कर सकते हैं लेकिन क्योंकि मुल्क को किसी भी अराजकता और गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाना चाहते है तो राष्ट्रपति अशरफ गनी के पुश्तैनी मकान पर अपना झंडा फहरा कर उसे छोड़ दिया गया है। दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने चीन के टीवी पर इंटरव्यू देते हुए अमेरिका पर गम्भीर आरोप लगाए हैं

और उसे बीच मझधार में धोखा देकर भागने वाला दोस्त बताया है। याद रखना चाहिए कि हामिद करजई ने अपनी शिक्षा भारत में रहकर पूरी की थी और इन्हे इनके भारत प्रेम के सम्बन्ध मे जाना जाता था।। इन्होंने प्रयत्न किया था कि राष्ट्रपति अशरफ गनी अपनी सरकार को भंग कर दे तथा एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाए किन्तु ऐसा सम्भव नहीं हुआ और तुर्की में होने वाली बैठक भी स्थगित करनी पड़ी जिसे संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में होना था।

फिलहाल अफगानिस्तान में सभी महाशक्तियों के स्टेक लगे हुए हैं जिसके कारण जहां एक ओर चीन ने बड़े निवेश की घोषणा की है वहीं अमेरिका ने भी प्रतिवर्ष चार बिलियन डॉलर की मदद का आश्वासन दिया है।। देखना होगा अगले तीन चार दिनों में ऊंट किस करवट बैठता है किन्तु पहली बार तालिबान के प्रवक्ता द्वारा शांति और सद्भाव की उम्मीद सुनकर अहसास हुआ कि "दुनियां बहुत तेजी से बदल रही है" और जो वक्त के साथ बदलकर नहीं चलेगा वो इतिहास बन जाएगा।।

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