खाप व्यवस्था और किसान आंदोलन ! बाबा बन्दा सिंह बहादुर को दहिया खाप का प्रणाम।।

उत्तर भारत की क़बीलाई संस्कृति में खापो का अपना विशेष महत्व रहा है और खाप पंचायतों के निर्णय भी भारतीय इतिहास का उल्लेखनीय हिस्सा है।। जब बंदा बहादुर जी नांदेड़ से सरहिंद की लड़ाई में जा रहे थे तो सोनीपत के पास के दहियों के गांवों में सेना ने पड़ाव डाला और दहिया खाप के लोगों ने न केवल उनकी खातिरदारी की थी बल्कि अपने जवान बेटों को सरहिंद की लड़ाई में समर्पित कर दिया था।

जाट कबीलों में दहिया गोत्र का सिक्खिज्म के लिए त्याग व समर्पण अद्भुत रहा है।जब भी गुरुओं ने अन्याय व अत्याचार के खिलाफ जंग लड़ी तब दहिया खाप के लोग चट्टान की तरह डटकर उनके साथ न केवल खड़े रहे बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर शहादतें दी है। एक ऐतिहासिक वाकया यह भी है कि गुरु तेगबहादुर ने सत्ता के अन्याय व अत्याचार के खिलाफ मोर्चा खोला तो सारी खापें उनके पीछे खड़ी थी।धोखे से इंसाफ की अदालत में गुरु तेगबहादुर के साथ गद्दारी की गई तो उन्होंने अपना शीश कुर्बान कर दिया था।

गुरुजी की धड़ के साथ दुर्गति न हो इसके लिए रुई में लपेटकर पूरे घर को आग के हवाले कर दिया था जहां आज रकाब गंज गुरुद्वारा बना है।गुरुजी का गर्दन के ऊपर का भाग लेकर लोग दिल्ली से अमृतसर के लिए निकले लेकिन सेना ने रास्ते मे चारों तरफ घेरा डाल दिया। खुशालसिंह दहिया का चेहरा व सिर गुरुजी से मिलता जुलता था।उन्होंने अपना सिर कटवाकर भाई जीवनसिंह के हवाले कर दिया कि मुगल सेना को मेरा सिर सौंप दो व गुरुजी का सिर लेकर आनंदपुर साहिब पहुंचो। सोनीपत जिले का बढखालसा गांव दहिया खाप की वो विरासत है जिसका सिक्ख कौम सदा सम्मान करती आई है।

कल से शेरशाह गांव में आरएसएस, बीजेपी एवम् मीडिया ने किसानों के खिलाफ महापंचायत का राग अलापा तो दहिया खाप ने अनाज के साथ हजारों की संख्या में लोगों को 151 ट्रेक्टर-ट्रॉली भरकर सिंघु बॉर्डर पर भेज दिया। आतताइयों की सत्ता के खिलाफ सदा खापें ही लड़ती आई है और वर्तमान सत्ता जब जुल्म पर उतरेगी तो इनका बक्कल ये खापें ही उतारेगी।इनका 100 साल का एकत्रित होकर नफरत फैलाने का इतिहास है तो खापों का हजारों साल का मैदान में बलिदानों का इतिहास है। जब देश जात-धर्म की नफरत में पराकाष्ठा लांघने लगता है तो खापें खड़ी होकर देश को दिशा देती है।

जब फिजाओं में जहर का आतंक इंसानियत को नोचने लगता है तो खापें मैदान में उतरती है।सलाम कीजिये दहिया खाप को जो बाकी खापों को भी उठने का ऐलान करके मैदान में आ डटी है। प्रेमसिंह #सियाग जी का शुक्रिया।

किसान विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भारतीय प्रधान मंत्री को किसान नेताओ का खुला पत्र।

19 नवम्बर सुबह नौ बजे भारत के अभी सूचना और प्रसारण माध्यमों पर भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अवतरित हुए। आशा की जा रही थी कि श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाए देने के लिए उनका संबोधन होगा क्योंकि शीघ्र ही पंजाब में चुनाव भी होने है।हालांकि उससे दो दिन पहले ही उनके निकटतम माने जाने वाले अमित शाह ने करतार पुर कॉरिडोर को दोबारा शुरू करने की घोषणा कर दी थी। ...

किसान आंदोलन स्थल सिंघू बॉर्डर दिल्ली में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर शोभा यात्रा एवम् एसकेएम द्वारा जारी प्रेस नोट।

21 नवम्बर 2021 भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा खेती विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद आज दिल्ली सरहद स्थित किसान आंदोलन स्थल पर श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के उल्लास में शोभा यात्रा निकाली गई और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आपसी चर्चा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। ...

तेजी से रेडिक्लाईजेशन और नफरत की आग में झुलसता बारूद के ढेर पर बैठा भारत !

भारत ! एक देश जिसे दुनियां उसकी सॉफ्ट पॉवर, सर्वधर्म समभाव, लोकतंत्र और समाजिक सौहार्द के कारण आदर सम्मान की नज़रों से देखती थी। ...

सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल से हत्या के सम्बन्ध मे संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बीती रात दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित सिंघु बॉर्डर किसान मोर्चा स्थल से एक युवक का शव पुलिस बेरीकेट पर लटका हुआ पाया गया जिसे धारदार हथियारों से मारे जाने के साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्राप्त हुए है। ...

किसान आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा हरियाणा सरकार को खुली चुनौती। सरकार बैकफुट पर।

हरियाणा के विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को गालियां दिए जाने और तीन किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में आज हरियाणा के टोहाना में महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। ...

भारत सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के विरूद्ध आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा विरोध दिवस।

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के साथ ही सरकार की उदासीनता से एक बार फिर आंदोलन को नई ऊर्जा देने की कवायत

छह महीने से दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आंदोलन को फिर से नई ऊर्जा देने की तैयारी ...

हमे भूल तो नहीं गए ? बेशक बच्चे भूल जाए लेकिन मां बाप दुख सहकर भी बच्चो के लिए कुर्बानियां करते हैं।

बेमौसम बरसात के कारण किसान आंदोलन स्थल पर परेशानियां बढ़ी लेकिन उससे ज्यादा दुखद सरकार, मीडिया और दिल्ली वासियों द्वारा नजरंदाज किया जाना है। ...

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...