सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को हलाल करने की रिवायत

बहुत पुरानी कहावत है कि एक मुर्गी सोने का अंडा देती थी लेकिन मालिक ने एक ही दिन उसके उससे अधिक सोना लेने के लालच में उसे जिबह कर दिया और मुर्गी तथा अंडे दोनों से हाथ धो बैठा।। इसका वास्तविक उदाहरण कनाडा के रक्षा मंत्री के बयान से भी है मिलता हैं जब वो रक्षा मंत्री नियुक्त हुए तो भारत के एक वर्ग ने उनके सिख होने तथा भारतीय मूल का होने पर खूब खुशी मनाई जिसके कारण उन्हें कहना पड़ा कि वो इतने ही कैनेडियन है जितना कोई दूसरा।

यह दक्षिण एशिया के समाज की मानसिकता है कि हम किसी भी व्यक्ति का समर्थन अथवा विरोध अपने निजी हितों एवम् स्वार्थों के दृष्टिकोण से करते है। यदि कोई पाकिस्तान मूल का व्यक्ति भारत की नागरिकता लेकर अपने अतीत को याद करता है तो देश द्रोही कहलाता हैं किन्तु जब कोई भारतीय मूल का विदेशी अपने वर्तमान देश के लिए बात करता है तो वो अपने देश का देश प्रेमी नहीं कहलाता।

भारत और पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में बहुत बड़ा योगदान प्रवासी नागरिकों का रहा है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 3.6 करोड़ भारतीय विदेशो में कार्यरत है जिनकी मेहनत से की गई कमाई पर तो सरकारों की निगाह रहती हैं किन्तु उनके लिए कोई सुरक्षा कवच देना प्रशासन के लिए जरूरी नहीं होता।। एक वास्तविक घटना सामने आई है जिसमे पीड़ित का नाम उसके सम्मान तथा प्राइवेसी के कारण नहीं लिखा जा रहा किन्तु ऐसा अक्सर होता है और यह कोई पहली घटना नहीं है। इसे यदि सीधे सीधे शब्दों में ब्लैक मैलिंग भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

पंजाब से कनाडा जाने वाले भारतीयों को वहां की सरकार पहले पी आर स्टेटस देती हैं जिसकी अवधि पांच साल होती हैं, एक हजार दिवस के प्रवास के बाद इमिग्रेंट को एक परीक्षा पास करने के बाद वहां की स्थाई नागरिकता प्राप्त हो सकती हैं जिसके बाद उसका पासपोर्ट बदल जाता हैं।। क्योंकि साधारण परिवारों से गए हुए युवाओं का अपने गांव, जमीन से लगाव होता है तो इन तीन वर्षो में वो एक बार तो वापिस अपनी जन्मभूमि और परिवार से मिलने आते ही है जिसके बाद शुरू होता है उनका उत्पीडन।

इस घटना में भी पीड़ित अपने गांव आया, शुरू में उसके रिश्तेदारों द्वारा उससे पैसा वसूली का क्रम चला और बाद में उसके परिवार की महिला द्वारा पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई कि प्रवासी व्यक्ति के दबाव के कारण महिला के पति द्वारा दहेज की मांग की जा रही है।। स्थानीय पुलिस द्वारा सभी पक्षों को बुलाया गया और स्पष्ट हो गया कि झूठा केस दर्ज हुआ है क्योंकि स्वयं महिला ने भी स्वीकार किया कि ऐसी कोई स्थिति या दखल नहीं है वैसे भी विदेश में रहकर कोई सात समुंदर पार किसी को कैसे प्रताड़ित कर सकता है।

अब शुरू होता है पुलिस का पुल्सिया कानून जिसके अनुसार जब तक मुकदमा खत्म नहीं होता तब तक भारत आया हुआ प्रवासी वापिस नहीं जा सकता और पुलिस कब अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करेगी और कब अदालत पक्ष या विपक्ष में फैसला देगी यह तो ब्रह्मा जी को भी मालूम नहीं होता।। दूसरा हल आमतौर पर सभी भारतीय बेहतर जानते है कि जज से बड़ा दरोगा होता है और दरोगा जी से भी बड़े गांधी जी जिनके फोटो किसी भी समस्या का तुरन्त समाधान निकाल सकते है किन्तु ऐसा होता ही क्यों है ?

क्या इन व्यवहारिक परेशानियों को देखते हुए सरकारों को प्रवासी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सहानुभूति पूर्वक कुछ नियम नहीं बनाने चाहिए ? बेशक किसी को इम्युनिटी प्रदान न की जाए किन्तु उनके विरूद्ध दायर शिकायतों की जांच उच्च स्तरीय अधिकारी द्वारा प्राथमिकता के आधार पर तुरन्त किए जाने का नियम तो लागू हो सकता है और उनके केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जा सकते है जिसमे झूठा केस दर्ज कराने वाले के विरूद्ध भी तुरन्त कार्यवाही करने का प्रावधान हो।। यदि ऐसा नहीं होता तो क्या उम्मीद की जा सकती है कि भारतीय मूल के विदेशी या प्रवासी भारतीय अपनी मिट्टी से इतना ही लगाव रख पाएंगे जितना सरकारें उम्मीद करती है।

इसके अतिरिक्त प्रवासी नागरिकों की सम्पत्ति एवम् परिवार ( विशेषकर बुज़ुर्ग माता पिता ) की सुरक्षा के लिए भी कोई अतिरिक्त वरीयता देने वाले नियम नहीं है बेशक जब उन्हे अपनी मेहनत की कमाई भारत भेजनी हो तो बैंक जरूर वरीयता देते है।। क्योंकि इस प्रकार की घटनाए पंजाब में सर्वाधिक होती हैं तो पंजाब सरकार को विशेष ध्यान देकर इसके किसी मानवीय एवम् व्यवहारिक हल के बारे मे सोचना चाहिए एवम् नियम बनाने चाहिए।। इस घटना का पीड़ित व्यक्ति स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठा है और उसकी मांग है कि यदि वो दोषी है तो उसके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए अन्यथा उसे निर्दोष करार दिया जाए।

विदेशों में रह रहे भारतीयों को भी इस विषय पर विचार करना चाहिए तथा अपने स्तर पर सरकार को सुझाव देने चाहिए अन्यथा कोई भी भारत छोड़कर विदेश में बसा भारतीय कभी वापिस भी नहीं आएगा और "मेरा भारत" कहते हुए झिझकेगा।

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