जेनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तथा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की होने वाली मुलाकात विश्व को दिशा देने वाली होगी !

यद्धपि यह कहना अतिशयोक्ति होगी लेकिन फिर भी कहा जा सकता है कि विश्व के दोनों बादशाह दुनियां के नसीब का फैसला करने के लिए आमने सामने डटने वाले हैं बेशक अब वार्ता की टेबल ही युद्ध का मैदान बन चुकी हो।। राष्ट्रपति बाइडेन उस समय से राजनीति एवम् विदेश मामलों को देख रहे हैं जब दुनिया कोल्ड वॉर के थपेड़े खा रही थी और सोवियत संघ, अमेरिका तथा पश्चिमी जगत को नित नई चुनौतियां देता था।

दूसरी ओर राष्ट्रपति वल्डिमीर पुतिन ने केजीबी में रहते हुए ही सोवियत संघ को बिखरते देखा है और विश्व जानता है कि किस प्रकार अमेरिकी थिंक टैंक ने ग्लोबल विलेज तथा ओपन मार्केट या इकोनॉमी के हथियार से मिखाईल गर्वाचोव की मदद से सोवियत संघ को टुकड़ों में बांट दिया।। लेकिन विश्व उन आरोपों को भी याद रख रहा है जो बाइडेन ने रूस या पुतिन पर ट्रंप की मदद करने एवम् चुनावी धांधली से यूएस में दखल देने के सन्दर्भ में लगाए हैं जिसके कारण ट्रंप की नीतियों से बकौल बाइडेन यूएस की इकोनॉमी को नुकसान उठाना पड़ा।

इन्हीं पैतरो के बीच अपने राष्ट्रपति बनने के बाद पहले दौरे के अंतिम पड़ाव में राष्ट्रपति बाइडेन एवम् राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात जेनेवा में होने जा रही है जिसके लिए राष्ट्रपति पुतिन भारतीय समयानुसार ( +5:30 ) 1410 बजे जेनेवा पहुंच चुके है।। अपने तूफानी दौरे में कल राष्ट्रपति बाइडेन की मुलाकातें एवम् बयानात को ध्यान में रखा जाए तो लगता है कि इस मुलाकात से कड़वाहट के अतिरिक्त कुछ हासिल नहीं होने वाला।। कल नाटो सम्मेलन में तुर्की राष्ट्रपति का जो बाइडेन से मिलना तथा बाद में इसपर खुशी जाहिर करने के बयान एवम् तुर्की का यूरोपियन यूनियन का हिस्सा बनने की ख्वाहिश संदेह पैदा करती हैं कि क्या पुतिन का प्रभाव कम हो रहा है ?

इसी के साथ युक्रेन के राष्ट्रपति का नाटो सदस्य बनने की उम्मीद वाला ट्वीट पुतिन को नाराज करने के लिए आवश्यकता से भी अधिक था लेकिन बाइडेन का उसको इग्नोर करते हुए उस संदर्भ में कुछ न कहना मौके की नजाकत के अनुरूप उचित रहा।। यद्धपि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पुतिन के सम्बन्ध मे निजी व्यंगों को कभी पुतिन ने न गम्भीरता से लिया है और न ही कभी उसका शाब्दिक जवाब दिया है बेशक बाइडेन ने उन्हें हत्यारा तक बोल दिया था और पुतिन की आंखो से लगता है कि उसकी आत्मा मर चुकी है" जैसे शब्द भी पुतिन को याद होंगे।

बहरहाल कल के नाटो के प्रेस रिलीज में एक तो सायबर हैकिंग को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए रूस को "THREAT" बताया गया है और जबकि चीन के लिए "सिस्टम के विरूद्ध चुनौती" शब्द का उपयोग किया गया है।। क्रेमलिन ने यात्रा से पहले स्पष्ट कर दिया है कि दोनों राष्ट्रपति महोदय वन टू वन मीटिंग नहीं करेंगे तथा दो बार की मुलाकात में दोनों के साथ सलाहकार एवम् सहयोगी भी होने यद्धपि एक बार प्रतिनिधि मंडल छोटा होगा और दूसरी बार कुछ बड़ा।। जैसा की सामान्य रूप से होता है उसके विपरीत किसी सांझा बयान के जारी किए जाने की कोई सूचना नहीं है और दोनों राष्ट्रपति प्रेस कॉन्फ्रेंस भी अलग अलग करेंगे।

यदि यह सब कार्यक्रम एवम् तल्खियां पहले से मौजूद है तो राष्ट्रपति मिल ही क्यों रहे हैं ? शायद यह अमेरिका की ओर से एक प्रयास किया जा रहा है कि किसी प्रकार दबाव बना कर रूस को मजबूर किया जाए जिससे वो चीन के सहयोग से कोई शक्ति केंद्र न बने न बनने दें।। किन्तु अपनी कोल्ड वॉर की मानसिकता के चलते शायद राष्ट्रपति बाइडेन यहां गलती कर रहे हैं और वर्षो बाद बदले हुए विश्व के साथ तालमेल बनाने में सफल नहीं रहे।। बेशक इन मीटिंग्स में पश्चिमी देशों ने राष्ट्रपति बाइडेन का विरोध नहीं किया किन्तु जितने स्पष्ट तौर पर अमेरिका चीन के विरूद्ध नाम लेकर आवाज़ उठाना चाहता था उसमे सफल भी नहीं रहा।

इसके अतिरिक्त जर्मनी तथा फ्रांस द्वारा कुछ सवाल खड़े किए गए जो अभी तक की अंध सहयोग की भावना के विपरीत आवाज़ देना भी बड़े संकेत है। रूस द्वारा अमेरिकी डॉलर के बगैर यूरोप को गैस बेचना भी अमेरिकी असफलता का बिगुल है।।। इन सभी कम्पीटीटिव खीचतान के बीच दुनियां का साधारण इंसान तो यही चाहता है कि सद्भावना, सहयोग एवम् शांति से सरवत का भला हो।।।।

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