अमेरिकी राष्ट्रपति और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मुलाकात के साथ ही राष्ट्रपति का चर्चित दौरा प्रारम्भ हुआ

पंजाबी समुदाय में अक्सर एक लोक कहावत बोली जाती है "पानी विच मधाणी रिड़क्या कुछ नी लभदा" आमतौर पर इसे उनके लिए बोला जाता हैं जो निरर्थक प्रयास करते रहते है क्योंकि उनकी मेहनत करने का कोई लक्ष्य न हो तो वो ऐसे ही होती हैं जैसे बंदर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांगे लगाता रहे।। राष्ट्रपति बाइडेन की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री जॉनसन का यह कहना कि उन्हें "स्पेशल रिलेशन" जैसे शब्दो का कोई मतलब समझ नहीं आता किसी खटास की ओर संकेत करते हैं या यह राष्ट्रपति बाइडेन के उस बयान का उत्तर था जिसमे उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच "स्पेशल रिलेशन" की बात की थी।

यदि अमेरिका के इतिहास की चर्चा करे तो यह वही देश है जिसके ब्रिटिश नागरिकों ने जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में ब्रिटेन से ही आज़ादी हासिल की थी।। बाइडन और जॉनसन की केमिस्ट्री में अंतर आने के पीछे एक मुख्य कारण बोरिस का ट्रंप समर्थक होना है और करोना के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री को विश्वास था कि ट्रंप दोबारा से राष्ट्रपति निर्वाचित हो जाएंगे।। बाइडन सदैव ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने के विरोधी रहे है किन्तु अब तो ब्रेक्सीट हो चुका है। इसके अतिरिक्त आयरलैंड द्वारा ग्रेट ब्रिटेन या यूनाइटेड किंगडम से अलग होने की घोषणा भी बाइडेन द्वारा पसंद नहीं की जाती जिसके पीछे उन्हे डर है कि यदि एक बार टूटने की प्रक्रिया शुरू हो गई तो इसकी आंच यूएस के 55 राज्यो तक पहुंच सकती हैं।

ब्रिटेन को यूएस के बढ़ते दखल एवम् ऑट्रेलिया जैसे कॉमनवेल्थ देशों को यूएस द्वारा अपने प्रभाव में लेने से भी आपत्ति है इसका मुख्य कारण ब्रिटिशर्स का अंदर से खोखला होने के बावजूद अपनी साम्राज्यवादी सोच से बाहर निकल कर व्यवहारिक न होना भी है। फिलहाल यह रिपोर्ट लिखे जाने के समय तक वार्ता शुरू नहीं हुई है किन्तु Hope for the best के साथ उम्मीद रखनी चाहिए कि शायद किसी चमत्कार से मधानि को भी कुछ न हो और कुछ हासिल हो जाए।।

विदेशो में जाने वाले भारतीय युवाओं के लिए विशेष ध्यान देने योग्य घटना।

विदेशो में बहुत बड़ी संख्या में भारत से स्टूडेंट वीजा पर युवक जाते है उनके बेहतर भविष्य के लिए किस प्रकार उनके मां बाप अपनी कुर्बानियां देकर पैसे का इंतजाम करते हैं इसको ध्यान रखें बगैर उनके द्वारा की गई गलतियां किस प्रकार भारी पड़ती हैं। ...

भारतीय अर्थ्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर को सम्भावित चोट पहुंचने का संदेह !

भारतीय समाज में अक्सर यह चर्चा का विषय रहता है कि भारत के प्रधानमन्त्री अपने निजी सम्बन्धों एवम् मित्रता को बहुत सम्मान देते हैं और उसी कड़ी में उसका लाभ नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे भगोड़ों ने तो उठाया ही है लेकिन अंबानी, अड़ानी, रामदेव जैसे पूंजीपतियों पर फायदा उठाने के आरोप लगते रहे हैं। ...

Tribute to Flying Sikh by Principal Sarvan Singh

ਸਾਊਥ ਏਸ਼ੀਅਨ ਸਿਤਾਰੇ ਸਰਦਾਰ ਮਿਲਖ਼ਾ ਸਿੰਘ ਜੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਸਾ ਦੀ ਬਖਸ਼ਿਸ ਪੂਰੀ ਕਰ ਕੇ ਚਲਾਣਾ ਕਰ ਗਏ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਬਾਰੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਸਰਵਨ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਦਾ ਕੁਛ ਹਿੱਸਾ ...

भारत के आर्थिक परिपेक्ष्य में विजय शंकर सिंह ( आईपीएस ) का विश्लेषण

भारत की आर्थिक स्थिति और गरीबों को बढ़ती संख्या के कारण भारत की तुलना नाइजीरिया जैसे निर्धनतम देशों से होने लगी है। इसी विषय पर पूर्व आईपीएस विजय शंकर सिंह का विश्लेषण ...

Rahul Gandhi ! Quite different personality among Indian politicians

भारतीय राजनीति में कांग्रेस के नेता एवम् नेहरू गांधी परिवार के अहम व्यक्तित्व राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाए ...

ईरान के राष्ट्रपति चुनावों और सम्भावित राष्ट्रपति का प्रभाव !

18 जून 2021 और ईरान में राष्ट्रपति चुनाव ! यद्धपि ईरान की शासन व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रपति को एक्सक्यूटिव अफसर ही समझा जा सकता है लेकिन फिर भी इसका भविष्य में क्या प्रभाव पड़ सकता है ? ...

अफगानिस्तान ! अमेरिकी तथा नाटो फोर्सेज की वापसी के बाद क्या ? तालिबान प्रवक्ता सुहैल शहीन से बातचीत

जिस तेजी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी अफगानिस्तान से हो रही है और तालिबान द्वारा अफ़गान जमीन पर अपना कब्ज़ा कायम किया जा रहा है उससे सम्भावित भविष्य के हालात पर तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन से एक बात।। ...

भारत जो विभिन्न संस्कृतियों एवम् सभ्यताओं का देश है वहां के बनारस की बनारसी

कोस कोस पर पानी बदले, बीस कोस पर वाणी। भारत के लिए ही यह पंक्तियां कहीं गई है क्योंकि विभिन्न संस्कृतियों एवम् सभ्यताओं के फूलो से सजा ऐसा बगीचा नुमा देश इस धरती पर शायद ही कोई दूसरा हो। ...

विभाजन और विभाजन करते करते एक दिन प्रत्येक मकान के सामने सरहद होगी और इंसान अकेला उसके अंदर रह रहा होगा।

किसी भी विचारधारा की अपनी सीमाएं होती है और अवैज्ञानिक सोच रखने वाले संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को उनकी हठधर्मिता से हटाना असम्भव होता है।। ...

बाइडन पुतिन बैठक ! किसने क्या खोया, क्या पाया।।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तथा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहू प्रतीक्षित मुलाकात पर दुनिया की निगाहे लगी हुई थी और अंततः यह निर्विघ्न सम्पन्न हुई।। ...

पत्रकारिता ! दो धारी तलवार पर असूलो के साथ टकराव लेने वाला व्यवसाय।

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के गाजियाबाद से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमे किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति से मारपीट की जा रही थी, उसके सन्दर्भ मे उस वीडियो को लेकर निजी पत्रकारों एवम् भारतीय वेब पोर्टलस ने खबर चलाई जिसके कारण भारत सरकार द्वारा ट्विटर सहित कई पोर्टल प्रबन्धन के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करा दी गई। ...

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को हलाल करने की रिवायत

विदेशो में कार्य कर रहे भारतीयों के साथ भारत में समाज एवम् सरकार द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार एवम् कानूनी दांव पेज के कारण पैदा होने वाली दिक्कतों का सरकार द्वारा ध्यान रखना जरूरी है। ...

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की शादी और ब्रिटिश समाज में उठे सवाल!

ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बोरिस जॉनसन ने अपनी मंगेतर से बिना किसी सार्वजनिक समारोह या सूचना के शादी कर ली। यद्धपि यह उनके जीवन का निजी निर्णय है लेकिन इसको लेकर ब्रिटेन के समाज में एक मजेदार बहस शुरू हो गई है जिसका अंत कहां होगा कह नहीं सकते।। ...

जेनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तथा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की होने वाली मुलाकात विश्व को दिशा देने वाली होगी !

रसियन टीवी के प्रसारण के सन्दर्भ में रूस के राष्ट्रपति वल्डीमिर पुतिन अपनी बहुचर्चित अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए भारतीय समयानुसार 1610 hrs ( +5:30 ) पर जेनेवा पहुंच चुके हैं।। ...

पवन गुरु पानी पिता, माता धरत महत्त........

पांच नदियों की धरती कभी इस लिए आक्रमणकारियों से बची रहती थी क्योंकि पानी की बहुलता के कारण जमीन इतनी दलदली थी कि शत्रुओं के घोड़े चल नहीं सकते थे।। ...

अमेरिकी राष्ट्रपति के तूफानी दौरे और नाटो चार्टर में महत्वपूर्ण बदलाव के साथ विश्व एक नए प्रकार के ब्रह्माण्ड युद्ध की ओर !

नाटो संगठन का सम्मेलन समाप्त हुआ और इसी के साथ जारी प्रेस रिलीज तथा चार्टर में बदलाव के साथ दुनिया ने भविष्य के विश्व युद्ध की ओर कदम बढ़ा लिया।। ...

नोटबंदी, जीएसटी के बाद भारत में महामारी के कारण बिगड़ी अर्थव्यवस्था क्या किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है ?

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार महंगाई दर में भयावह वृद्धि क्या भारतीय अर्थवयवस्था के किसी बुरे दौर से जाने का संकेत है । ...

हैदराबाद की चारमीनार और दिल्ली का गुरुद्वारा बंगला साहिब! एक अनोखी समानता।

ईश्वर का अस्तित्व और उसके प्रति इंसान की आस्था बेशक किसी का भी निजी मामला हो सकता है लेकिन जब भी कष्ट आते है तो अंतिम सहारा ईश्वर ही नजर आता है और उसके प्रतीक स्वरूप भारत के दो अहम भवन। ...

गलवान घाटी में हुई सैनिकों की शहादत के एक साल बाद कौन कहां खड़ा है ?

एक साल पहले आज ही के दिन बीस भारतीय सैनिकों की गलवान घाटी में शहादत हुई थी लेकिन आज एक साल बाद भारत की क्या स्थिति है और क्या अब भी चीन की चुनौती कायम है ? ...