कश्मीर घाटी में अचानक हुए बदलावों से बहुत से आशंकाओं को जन्म मिल रहा है। वास्तविकता के लिए कुछ दिन इंतजार करना होगा।।

वैसे तो भविष्य का सही सही अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता किन्तु यदि किसी की मानसिकता या फितरत की जानकारी हो तो बहुत से संकेत अहसास करा देते है कि कुछ न कुछ घटित होने वाला है।। गत दिनों महसूस किया गया कि कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में वृद्धि हुई है तथा आतंकियों द्वारा न केवल सुरक्षा कर्मियों पर हमले बढ़े हैं अपितु स्थानीय नेताओ पर वार किए गए।। इसी दौरान अचानक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल को गृह मंत्रालय द्वारा तलब किया गया और राज्यपाल विशेष विमान से आपातकालीन अवस्था में किसी गोपनीय सलाह मशविरा करने के लिए दिल्ली भी पहुंचे यद्धपि मीडिया में उनका आगमन यूपी की राजनीतिक उठा पटक से जोड़ कर बताया गया।। उसी दिन गृह सचिव ने उच्च अधिकारियों के साथ श्रीनगर में विशेष बैठक आयोजित की लेकिन उसका विवरण जारी नहीं किया गया।

इन दोनों घटनाओं से पहले घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती में उल्लेखनीय इजाफा देखा गया हालांकि इसे चुनाव ड्यूटी से वापिस आए सुरक्षा कर्मी बताकर टालने की कोशिश की गई किन्तु जनता की नजरो से कुछ भी छिपा नहीं रहता।। सुरक्षा एजेंसियों की हलचल के अतिरिक्त भारत सरकार ने इस वर्ष भी श्री अमरनाथ यात्रा रद्द होने की घोषणा कर दी कारण करोना बताया गया जबकि प्रधानमन्त्री ने खुद दूसरी लहर से सफलता पूर्वक लडने एवम् वेक्सिनेशन का भरोसा दिलाया है।। 5 अगस्त 2019 को जब अचानक धारा 370 एवम् 35A में बदलाव करने के साथ साथ जम्मू एवं कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित बनाया गया था तथा लद्दाख को अलग क्षेत्र घोषित किया गया था तब भी कुछ ऐसा ही हुआ था और एक रात पहले तक सरकार किसी भी परिवर्तन से मना करती रही थी।

एक बार फिर स्थानीय जनता में चर्चा एवम् आशंका है कि अब क्या होने जा रहा है ? कुछ लोगो का सोचना है कि जम्मू क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा देकर घाटी को अलग से छोटा सा केंद्र शासित क्षेत्र बना दिया जायेगा।। कुछ लोग सोचते है कि घाटी को और दो हिस्सो में बांट कर आधा जम्मू रीजन के साथ मिला दिया जाएगा और जम्मू राज्य के लिए चुनाव कराकर विधान सभा से इच्छा अनुसार विधेयक पास करा लिए जाएंगे।। घाटी के शेष बचे आधे हिस्से को लद्दाख रीजन के साथ मिलाकर कश्मीर घाटी का स्वतंत्र वजूद ही समाप्त कर दिया जाएगा।

तीसरी आशंका है कि पुलिस और सेना के बल पर कश्मीरी पंडितों एवम् नए डोमिसाइल नागरिकों को घाटी में बसा कर डेमोग्राफी बदल दी जाएगी।। होना क्या है इसका निर्णय तो भारत सरकार को ही लेना है किन्तु जिस प्रकार पाकिस्तान से पर्दे के पीछे की बातचीत और LOC पर शांति है तथा पाकिस्तान द्वारा भी कूटनीतिक क्षेत्रो मे पहले जैसा आक्रमक रुख नहीं अपनाया जा रहा है तो संदेह होता है कि कुछ बड़े निर्णय लिए जा चुके है जिनकी घोषणा होनी बाकी हैं।। वैसे तो इस बीजेपी सरकार के अधिकांश निर्णय विवादित ही रहे है किन्तु देखना होगा कि इस बार ऊंट किस करवट बैठता है वैसे भी उत्तर प्रदेश के चुनावों में राष्ट्रवाद का तडका लगाकर देशभक्ति और सरकार की सफलता भुनाने के लिए कश्मीर के अतिरिक्त और कुछ बाकी भी नहीं बचा जिससे हिंदी पट्टी के भावुक वोटर्स को बहकाया जा सके।

बहरहाल कुछ भी नहीं होगा, ऐसी संभावना दूर तक नहीं है।।