अप्पो दीपो भव अर्थात अपने अंदर ही प्रकाश उत्तपन्न करो। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की शिक्षाएं

एक हिंदी फिल्म आईं थीं जिसमे कलाकार परेश रावल धर्म के नाम पर धंधा करने वाले कथित संयासियों के विरूद्ध आवाज़ उठाता है और जब धर्म व्योपारी फसने लगते है तो वो सलाह करते हैं कि ईश्वर को नकारने और उसके स्वयंभू एजेंटो के विरूद्ध आवाज़ बुलंद करने वाले को ही ईश्वर घोषित कर दो। क्योंकि स्वभाव से दक्षिण एशिया की नस्ले न केवल भावनात्मक रूप से जल्दी मूर्ख बन जाती हैं अपितु लंबी गुलामी में रहने के कारण किसी सुपर पॉवर और चमत्कार की उम्मीद करती रहती हैं।

इसी सन्दर्भ मे महात्मा बुद्ध की विचारधारा एवम् शिक्षाओं को भी देखा जा सकता है और सिख आस्थावान संगत द्वारा गुरु साहेबान के चित्रों के आगे धूप अगरबत्ती का जलाना भी।। बौद्ध दर्शन मूल रूप से व्यक्ति और उसकी अंतरात्मा को ही ईश्वर बनने की शिक्षा पर आधारित है जो अप्पो दीपो भव का मूल मंत्र देता है अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो न कि किसी पाखंड के अनुयाई बन जाओ। इस प्रकार मूल बौद्ध दर्शन ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता वो अलग बात है कि ब्राह्मणों ने बुद्ध को ही विष्णु का नौवां अवतार घोषित कर दिया था।

वर्तमान नेपाल के लुंबनी ( गोरखपुर से सनोली - भहरवां बॉर्डर से काठमांडू जाते हुए भारतीय सीमा के निकट ) में जन्मे सिद्धार्थ का जन्म दिन भी वैशाख मास की पूर्णिमा को माना जाता है, इसी दिन भारत के बोध गया में उन्हे ज्ञान प्राप्ति का दिवस बताया जाता है और आज के दिन ही उनका निर्वाण भी माना जाता है।। दक्षिण एशिया के अतिरिक्त दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भी बुद्ध पूर्णिमा को विशेष महत्व प्राप्त है और बौद्ध मत में आस्था रखने वाले बौद्ध अनुयाई अपनी अपनी आस्थाओं एवम् परम्पराओं के अनुसार मनाते है।

News Number परिवार द्वारा भी सभी आस्थावान अनुयायिओं को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की जाती हैं।