सौ साल पहले भी इस देश की धरती ने ऐसे वीर जन्मे थे जिन्होंने सात समंदर पार भी आज़ादी की मशाल जलाई और ज़ुल्मो का विरोध किया।

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का..... बॉर्डर फिल्म का एक डायलॉग था जिसमे एक कलाकार बोलता है कि यह धरती बिच्छू ही नहीं शेर भी पैदा करती हैं।। यदि वो सीन पंजाब की धरती पर फिल्माया गया होता तो डायलॉग होना था " यह पांच दरियाओं की धरती, सिर्फ शेर ही पैदा करती हैं और उनकी धमक सात समुंदर पार तक सुनाई देती हैं" आज ज्यादातर इंसान अपने आप में इतने केंद्रित हो गए हैं कि अपने स्वार्थ से बाहर बहुत कम सोचते है और यदि कोई अवसर प्राप्त हो जाए तो उसका भरपूर लाभ उठाने से नहीं चूकते।। लेकिन ये दुनिया सदैव ऐसी नहीं थी, एक समय ऐसा भी था जब इंसान अपने समाज और देश के लिए जान कुर्बान करने को प्राथमिकता देते थे।

भारतीय पंजाब के लुधियाना के निकट चर्चित गांव में सरदार मंगल सिंह जी के घर में 24 मई 1896 को एक बेटा जन्म लेता है जिसे नाम दिया जाता है करतार सिंह सराभा।। अपनी आरम्भिक शिक्षा लुधियाना से प्राप्त करने के बाद करतार सिंह अपने चाचा के पास तत्कालीन बंगाल प्रोविंस के उड़ीसा चला जाता है जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके। उड़ीसा से ग्यारहवीं कक्षा के बाद इसे अमेरिका पढ़ने भेज दिया जाता है जहां पहले से रह रहे इसी गांव के रुलिया सिंह के पास रुकता है।। उस समय अमेरिका और कनाडा में ज्यादातर पंजाबी ही पहुंचे थे जो वहां की लकड़ी मिलो एवम् रेलवे में मजदूरी करते थे।। ग़रीबी और मजबूरी के अतिरिक्त उन्हे नस्लभेद का सामना भी करना पड़ता था जिसके विरूद्ध कनाडा में संत तेजा सिंह संघर्ष कर रहे थे तथा उनके साथ जो दूसरा नाम था वो था ज्वाला सिंह ठांडीया।

करतार सिंह सराभा बर्कले कॉलेज के हॉस्टल में आ गए जहां कुल 30 हिन्दुस्तानी छात्र थे जिनमे ज्यादातर पंजाबी एवम् बंगाली थे। वहां इनकी भेंट हिंदुस्तान से गए लाला हरदयाल और भाई परमानंद से हुई जिनकी प्रेरणा से मुल्क की आज़ादी की मशाल जल उठी।। वहीं इन्होंने गदर पार्टी बनाई तथा अपने वतन के लिए संघर्ष शुरू कर दिया जिसकी परिणीती नवम्बर 1915 में शहादत के रूप में हुई।

शहीद ए आजम भगत सिंह अपने आदर्श के रूप में केवल करतार सिंह सराभा का ही नाम लेते थे और डॉ राम मनोहर लोहिया ने अपनी पुस्तक Free Hindustani में इनके बारे काफी कुछ लिखा है। कनाडा के वैंकूवर तथा सरी में आज भी प्रत्येक वर्ष गदरी बाबों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।। अमर शहीद बाबा करतार सिंह सराभा जी के जन्म दिन पर News Number परिवार इन्हे सादर नमन करता है