हमे भूल तो नहीं गए ? बेशक बच्चे भूल जाए लेकिन मां बाप दुख सहकर भी बच्चो के लिए कुर्बानियां करते हैं।

एक कहानी सुनते थे कि किसी कुपुत्र ने अपनी मां का दिल निकाल लिया और जब चलने लगा तो उसे ठोकर लग गई। तुरन्त मां के दिल से आवाज़ आई " बेटा ध्यान से" छह महीने होने को आए जब से दिल्ली की सरहदों पर किसान अपने घर द्वार छोड़कर देश को गुलाम होने से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान सरकार द्वारा जितने भी दांव पेज तथा ज्यादतियां सम्भव थी की गई लेकिन न किसानों का हौसला डिगा न उनकी इंसानियत के जज्बे पर कोई आंच आई।

कई बार पुलिस द्वारा ज्यादतियां की गई किन्तु बुजुर्गो ने सामने से सिर्फ यही पूछा कि बेटा भूख लगी होगी, पहले लंगर छक ले। कड़कड़ाती सर्दी के बाद तपती गर्मी की तैयारियां शुरू हो गई थी बेशक सरकारी साज़िश के तहत मीडिया को किसी भी समाचार देने से मना कर दिया था फिर भी स्थानीय जनता तीर्थ स्थल समझ कर दर्शन दीदार के लिए जाती रही और मीडिया के अन्य माध्यमों से सूचनाएं प्रसारित होती रही।। इसी दौरान खेतों में गेंहू की कटाई शुरू हुई तथा साथ ही करोना महामारी का शोर एवम् लगातार होती मौतों का नाच। दिल्ली में लॉक डाउन के साथ साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पाबन्दियां लागू हो गई जिससे आंदोलनकारियों को समाज से काटने की साज़िश कामयाब होती लगने लगी बेशक हकीकत ज्यादा वक्त तक छुपाई नहीं जा सकती।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस दौरान किसानों की संख्या में भी कमी आई है और बाकी दुनिया से भी कुछ दूरी महसूस की गई हैं किन्तु यदि सरकार को यह लगता हो कि कोई अपने बड़े बुजुर्गो को भूल जाएगा तो इससे बड़ी गलतफहमी नहीं हो सकती।। अचानक बदले मौसम तथा लगातार हुई बारिश के कारण किसान आंदोलन स्थल पर बहुत परेशानी के हालात पैदा हो गए हैं हालांकि इससे धरती पुत्रों के हौसले पर कोई असर नही पड़ने वाला क्योंकि मौसम से लडने और अठखेलियां करने का पुराना रिवाज रहा है।। टिकरी बॉर्डर एरिया में गरमियों के लिहाज से बनाए गए बांस और पराली के कमरों में पानी के भराव के साथ साथ काफी नुकसान होने के समाचार है।

कुंडली बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन तीर्थ पर पानी भराव के कारण कीचड़ तथा गंदगी बढ़ गई है क्योंकि वहां से पानी की निकासी का कोई उचित प्रबन्ध नहीं है।। क्योंकि दोनों जगह ऊंचाई पर स्थित नहीं है तथा काफी दूर तक किसानों के डेरे भी है इसलिए स्वाभाविक रूप से दिक्कत आ रही है इसके साथ सरकारों द्वारा किसी प्रकार का सहयोग न देना भी दुखद एवम् अमानवीय पहलू है।। कल भी दो किसानों ने शहादत का जाम पिया किन्तु स्वार्थी समाज एवम् सरकार के लिए यह खबर जरूरी नहीं थी।। शायद एक बार फिर मीडिया कर्मियों को अहसास कराने की जरूरत आन पड़ी है कि वो भोजन करने के समय ही उन्हे याद कर लिया करे जिनके कारण उनकी थाली में उन्हे जीवित रहने की सामग्री उपलब्ध हैं।।

किसान विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भारतीय प्रधान मंत्री को किसान नेताओ का खुला पत्र।

19 नवम्बर सुबह नौ बजे भारत के अभी सूचना और प्रसारण माध्यमों पर भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अवतरित हुए। आशा की जा रही थी कि श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाए देने के लिए उनका संबोधन होगा क्योंकि शीघ्र ही पंजाब में चुनाव भी होने है।हालांकि उससे दो दिन पहले ही उनके निकटतम माने जाने वाले अमित शाह ने करतार पुर कॉरिडोर को दोबारा शुरू करने की घोषणा कर दी थी। ...

किसान आंदोलन स्थल सिंघू बॉर्डर दिल्ली में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर शोभा यात्रा एवम् एसकेएम द्वारा जारी प्रेस नोट।

21 नवम्बर 2021 भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा खेती विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद आज दिल्ली सरहद स्थित किसान आंदोलन स्थल पर श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के उल्लास में शोभा यात्रा निकाली गई और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आपसी चर्चा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। ...

तेजी से रेडिक्लाईजेशन और नफरत की आग में झुलसता बारूद के ढेर पर बैठा भारत !

भारत ! एक देश जिसे दुनियां उसकी सॉफ्ट पॉवर, सर्वधर्म समभाव, लोकतंत्र और समाजिक सौहार्द के कारण आदर सम्मान की नज़रों से देखती थी। ...

सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल से हत्या के सम्बन्ध मे संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बीती रात दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित सिंघु बॉर्डर किसान मोर्चा स्थल से एक युवक का शव पुलिस बेरीकेट पर लटका हुआ पाया गया जिसे धारदार हथियारों से मारे जाने के साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्राप्त हुए है। ...

खाप व्यवस्था और किसान आंदोलन ! बाबा बन्दा सिंह बहादुर को दहिया खाप का प्रणाम।।

किसान आंदोलन और सरकार की साजिशें दोनों आमने सामने अपनी अपनी चाले चल रही है लेकिन हरियाणा के जाट समुदाय की दहिया खाप ने बीजेपी द्वारा फुट डालो राज करो की नीति का उत्तर अनाज से भरी ट्रॉलियां भेज कर दिया।। ...

किसान आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा हरियाणा सरकार को खुली चुनौती। सरकार बैकफुट पर।

हरियाणा के विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को गालियां दिए जाने और तीन किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में आज हरियाणा के टोहाना में महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। ...

भारत सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के विरूद्ध आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा विरोध दिवस।

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के साथ ही सरकार की उदासीनता से एक बार फिर आंदोलन को नई ऊर्जा देने की कवायत

छह महीने से दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आंदोलन को फिर से नई ऊर्जा देने की तैयारी ...

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...