मजहब जब दिलो से निकलकर दिमाग में छा जाए तो वो जहर बन जाता है। और भूख दुनियां की सभी लानतों की मां है।।

एक इंसान जो कहानियां नहीं लिखता था अपितु कहानियां जिसे लिखती थी क्योंकि उसका कहना था कि उसकी तहरीर में कोई गलती नहीं है और जिन गलतियों को उसके नाम पर बताया जा रहा है दरअसल वो सिस्टम की गलतियां है। सच को सच लिखने वाला, 6 बार अश्लील साहित्य लिखने के आरोप में अदालत द्वारा तलब किए जाने वाला और एक बार सफ़गोई के कारण पागलखाने भेज दिए जाने वाला स आदत हसन मंटो 11 मई 1912 को भारतीय पंजाब के पास समराला में जन्मा था।

अपने छोटे से जीवन काल में इसने 22 शॉर्ट स्टोरीज, एक नॉवेल, रेडियो नाटक आदि लिखकर खुद को अमर कर लिया।। 1947 में बटवारा होने पर इसे पाकिस्तान जाना पड़ा क्योंकि इसके शब्दो मे ये इतना मुसलमान तो था ही कि दंगो में मारा जा सके। इसकी टोबा टेक सिंह, ठंडा गोश्त, काली सलवार जैसी कहानियां उस काल की हकीकत बयान करती हैं।। जनरल जिया उल हक के समय लायलपुर को फैसलाबाद का नाम दिए जाने के बाद टोबा टेक सिंह कस्बे का नाम भी बदलने का प्रस्ताव रखा गया ( शाह फैसल के बेटे को समर्पित करना चाहता था ) लेकिन टोबा टेक सिंह के निवासियों ने लाहौर में अपने मवेशियों के साथ प्रदर्शन किया क्योंकि मंटो द्वारा उनके कस्बे के नाम का अमरत्व वो छोड़ना नहीं चाहते थे।

लाहौर में ही सरहद पार की अपने जन्मस्थली की हवाओं के झोंको का अहसास करते हुए इन्होंने शरीर जरूर छोड़ दिया किन्तु कलम और शब्दो मे जीवित है और रहेंगे।। इनके जन्मदिन पर News Number परिवार मंटो को सिद्दत से याद करता है।।