राम गयो, रावण गयो जा के बहू परिवार। कह नानक जग कुछ नहीं, सपनो ज्यूं संसार।।

जमीं खा गई आसमां कैसे कैसे ! व्यक्ति की सोच कुछ ऐसी होती हैं जैसे वो अमरत्व प्राप्त करके आया हो या कभी कभी इंसान के मन में ऐतिहासिक पुरुष बनने की महत्वकांक्षा भी उसके सोच विचार की ताकत को समाप्त कर देती हैं।। कुछ इसी प्रकार के आरोप, प्रत्यारोप का सामना भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी को करना पड़ रहा है। देश में करोना महामारी के कारण हाहाकार मचा हुआ है और आवश्यक दवाओं के अभाव में निर्दोष नागरिक मर रहे है लेकिन मोदी जी अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना सेंट्रल विष्ठा के निर्माण की जिद पर अड़ गए हैं जिस पर जनता का बीस हजार करोड़ रुपया निवेश होगा।

इसका निर्माण तीव्र गति से चल रहा है और इसके लिए बड़ी संख्या में पुराने पेड़ काटे जा चुके है तथा नक्शा भी सार्वजनिक किया जा चुका है।। इससे पूर्व जो संसद भवन है उसका निर्माण ब्रिटिश साम्राज्य के समय हुआ था तथा यह भारत के प्रसिद्ध योगिनी मंदिर की अनुकृति थी लेकिन वर्तमान में जो सेंट्रल विस्ता बनाया जा रहा है इसकी प्रेरणा रोमन साम्राज्य से ली गई प्रतीत होती हैं।। ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर 27 या 49 ईसा पूर्व रोमन साम्राज्य पर अगस्टस नामक शासक का कब्ज़ा हुआ था। कहते है कि लगातार बीस साल से चल रहे आंतरिक कलह के बाद अगस्टस ने सेना के बल से तमाम शक्तियां अपने हाथ में ले ली थी।

क्योंकि यह ईसा मसीह के उपस्थित होने का युग था और समाज में व्यापक परिवर्तन आ रहे थे तो विवादों के बीच सुगमता से अगस्टस की तानाशाही कायम हो गई।। अन्य तथ्यों के अतिरिक्त उसने अपने लिए भव्य भवन का निर्माण कराया जिसकी झलक नई दिल्ली में बन रहे सेंट्रल विस्ता में साफ नजर आती है।। अगस्टस ने जिस शासन प्रणाली की स्थापना की थी उसमे जनता को कोई अधिकार नहीं थे तथा तमाम शक्तियां सम्राट, अभिजात्य वर्ग ( जिन्हे सीनेटर कहा जाता था ) एवम् सेना में समाहित थी।। कहते है कि अगस्टस का साम्राज्य चार महाद्वीपों तक फैला हुआ था और उसकी इच्छा थी कि सूर्य की गति एवम् प्रकाश पर भी उसका नियंत्रण हो जाए ।

लेकिन समय की गति के सामने उसकी इच्छाएं और स्वप्न पानी का बुलबुला साबित हुआ तथा आज उसके कथित महल के खंडहरों में चमगादड़ों का निवास है।। भारत के प्रसिद्ध काशी नरेश के सम्बन्ध में भी एक कहावत है कि उन्होंने बड़ी शान ओ शौकत से शिव मंदिर बनवाया तथा पहली पूजा के समय ही कीना बाबा नामक किसी औघड़ का अपमान कर दिया।। कीना बाबा के श्राप से आज भी उस मन्दिर में कबूतरों का निवास है और गंदगी का साम्राज्य व्याप्त रहता है, काशी नरेश के निरवंशी होने की कथा भी प्रचलित हैं।। इसलिए इतिहास से सबक लेकर किसी को भी अहंकारी तो नहीं ही होना चाहिए क्योंकि जब सिकंदर भी मरा था तो खाली हाथ था।।