पाकिस्तानी विदेशमंत्री द्वारा चौंकाने वाला इंटरव्यू जिससे कई आशंकाओं को जन्म मिलता है।

कश्मीर से धारा 370 का हटाया जाना भारत का आंतरिक मामला है! जैसे ही पाकिस्तान के चैनल सामा टीवी पर वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने इंटरव्यू में यह बोला तो इंटरव्यू ले रहे एंकर का भी मूंह खुला रह गया।। 5 अगस्त को 2019 को अचानक भारत सरकार ने कश्मीर की कानूनी स्थिति बदलते हुए धारा 370 निरस्त कर दी थी तथा धारा 35A के अंतर्गत जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेषाधिकार भी समाप्त कर दिए थे।। क्योंकि जम्मू कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का मुख्य कारण रहा है तो पाकिस्तान सरकार द्वारा तुरन्त इसका विरोध किया गया और अगले ही दिन 6 अगस्त को कोर कमांडर की बैठक में भी इस विषय पर विचार किया गया ।

इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में भी इसके विरूद्ध लंबा भाषण देते हुए धारा 370 तथा 35A के दोबारा लागू किए जाने की मांग की।। लगातार पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रत्येक मौके पर इस विषय को रेखांकित किया जाता रहा तथा भारत सरकार के इस कदम का विरोध भी किया जाता रहा।। इसी दौरान विश्व राजनीति में बदलाव महसूस किए गए तथा उथल पुथल के दौर में न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की भी चर्चा हुई एवम् नए ब्लॉक्स भी बनने शुरू हो गए।

कुछ महीने पहले पाकिस्तान तथा सऊदी अरब के सम्बन्धों में तल्खियां नोटिस की गई तो अरब देशों द्वारा इजरायल को मान्यता देना भी सामने आया।। फिर अचानक समाचार मिला कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री एक उच्च स्तरीय शिष्ट मंडल के साथ सऊदी अरब के दौरे पर गए हैं जहां उनके साथ सेना प्रमुख एवम् विदेश मंत्री भी गए थे।। वहां से वापस लौटने के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री अपने एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए बड़ा यू टर्न लेते हुए कहते है कि 370 हटाना भारत का अंदरुनी मामला है।

अलबत्ता 35A हटाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।। इससे पहले दोनों देशों के बीच सीज फायर पर सहमति बनी थी जिसके लिए UAE ने अपनी मध्यस्थता स्वीकार की थी, क्योंकि UAE को भी सऊदी सल्तनत का प्रतिनिधि समझा जा सकता है तो यकीनन सऊदी सल्तनत का भी प्रयास रहा होगा।। क्योंकि सऊदी वली अहद मोहम्मद बिन सलमान अपने 2030 एजेंडे पर काम कर रहे हैं तो वहां किसी भी बदलाव से इंकार नहीं किया जा सकता।। इसके अतिरिक्त सऊदी सहित कई अन्य अरब देशों का चीन से प्रभावित होना भी एक हकीकत है और कहा जा रहा है कि इमरान खान की रियाद यात्रा के पीछे चीन की भी कोई योजना है तो क्या विदेश मंत्री का यह बयान कुछ और भी मायने रखता है ?

सूत्रों के अनुसार इसी समय भारतीय अधिकारी भी रियाद यात्रा पर गए थे तो क्या सऊदी अरब की मध्यस्थता से भारत पाकिस्तान के बीच कश्मीर के सम्बन्ध मे कोई गोपनीय सहमति बनी है ? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर कुछ समय बाद मिलेंगे किन्तु इसमें कोई संदेह नहीं है कि कुछ न कुछ तो जरूर हुआ है और क्योंकि फिलहाल मोड़ी सरकार दिक्कत में है तो सम्भवतः चीन और पाकिस्तान के व्यापक हितो में दबाव बनाकर कोई सहमति या किसी बिंदु तक पहुंचने के लिए मजबूर किया गया हो ? कहते है कि यूं ही कोई बेवफा नहीं होता और शाह महमूद कुरैशी जैसा सुलझा हुआ नेता ऐसे ही कुछ बोल गया हो यह भी संभव नहीं है।

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