विश्व राजनीति के बदलते समूह और दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति जिसे असफल विदेशनीति के कारण बैकफुट पर आना पड़ रहा है।

रेड कार्पेट वेलकम की परम्परा को सबसे पहले ऑस्कर अवॉर्ड में बदला गया जब वहां पिंक कार्पेट वेलकम हुआ और उसके बाद UAE के शेख ज़ायद ने लाल कालीन को सामंत शाही परम्परा बताते हुए उसके स्थान पर पर्पल कलर का कालीन सर्वोच्च सम्मान के लिए लगवाया।। सऊदी अरब ने भी इस बदलाव को स्वीकार किया और पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान के चल रहे सऊदी अरब के दौरे में पर्पल कार्पेट पर उनका स्वागत किया गया।। क्योंकि कूटनीति में संकेत बहुत मायने रखते हैं तो चंद महीने पहले सऊदी वली अहद की नाराजगी के बाद इस प्रकार इमरान खान का स्वागत भी किसी बड़े बदलाव की आहट देता है।

केवल चार महीने पहले पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान से नाराज़ होकर पाकिस्तान को दी जाने वाली सहुलते वापिस ले ली गई थी लेकिन अचानक यह बदलाव क्यो आया और इसका भारत पर क्या असर हो सकता है।। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अरब देश अकूत संपत्ति के मालिक हैं लेकिन अभी तक अरब देशों को इजरायल और ईरान का डर दिखा कर अमेरिका द्वारा उनसे आर्थिक लाभ लिया जाता रहा है।। पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण सऊदी अरब ने खुद को असुरक्षित महसूस करना शुरू कर दिया था फिर राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा खगोशी हत्याकांड में शहजादा एमबीएस के विरूद्ध बयान ने आग में घी का काम किया।। क्योंकि अमेरिका के विकल्प के रूप में चीन सामने आ गया और एमबीएस खुद भी तुलनात्मक रूप से वेस्टर्न कल्चर से वाकिफ है तो उसका झुकाव स्वतंत्र विदेश नीति की ओर अधिक हो गया।

इसके चलते उसने पहला कदम सुरक्षा तथा सैनिक क्षेत्र में उठाया एवम् यूएस पर निर्भरता कम कर दी जिसके लिए संयुक्त सेना कमांड बनाई एवम् उसका कमांडर पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल राहिल शरीफ़ को नियुक्त किया।। इमरान खान की यात्रा का प्रबन्ध भी राहिल शरीफ़ के प्रयत्नों से हुआ माना जा रहा है। इमरान खान के साथ उच्च प्रतिनिधि मंडल भी गया है जिसमे विदेश मंत्री, गृह मंत्री तथा सेना प्रमुख है। समझा जा रहा है कि इस अवसर पर निवेश तथा सहयोग के कई समझौते होंगे। इसके अतिरिक्त पारम्परिक शत्रु रहे ईरान एवम् तुर्की से भी अच्छे सम्बन्धों के संकेत सऊदी सल्तनत द्वारा दिए गए हैं।। तुर्की समाचार पत्र सबा ने ईरान, सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान तथा तुर्की के एक नए ब्लॉक के संकेत देते हुए आलेख प्रकाशित किया है तो तेहरान टाइम्स में भी ईरान एवम् सऊदी अरब के बीच अच्छे भविष्य की कामना की गई हैं।

इनका सीधा असर अमेरिका तथा भारत पर पड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इन बदलावों के पीछे चीन के प्रयत्न है बेशक वो इराक के माध्यम से सम्भव हुए हो।। लेकिन इस स्थिति में सबसे अधिक नुकसान यदि किसी को हो सकता है तो वह भारत है। पाकिस्तान में सऊदी अरब का प्रस्तावित निवेश अंततः भारत की ओर आने वाले निवेश को खत्म करके ही किया जाएगा। चीन द्वारा भी भारत पर बनाए जा रहे दबाव के चलते भारत आइसोलेशन की स्थिति में आ जाएगा और आज कोई भी देश अपने हितों के चलते चीन से सीधा टकराव नहीं लेना चाहता।

यद्धपि भारत को एक आशा ग्रुप 7 की लंदन सम्मिट से जरूर थी किन्तु वहां विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथियों के करोना पॉजिटिव होने के कारण अधिकांश मीटिंग्स स्थगित करनी पड़ी।। फिलहाल तो फिंगर क्रॉस करके बैठते है और किसी संयुक्त बयान की प्रतीक्षा करते है।।