गुरु नानक देव जी के अनुयायियो द्वारा तेरा तेरा को साकार कर दिखाया गया। दिल्ली में बेकाबू करोना और चरमराती स्वास्थ्य सेवाओ के बीच गुरुद्वारा साहिब अस्पताल में परिवर्तित।

550 साल पहले धन गुरु नानक देव जी ने 20 रुपए की पूंजी से लंगर सेवा शुरू की थी जिसका अनंत प्रभाव यह है कि आज तक न केवल भोजन का लंगर अटूट बाँटा जा रहा है अपितु मानव सेवा के लिए इसमें बहुत कुछ जुड़ गया है।। भारत की जनसंख्या में अल्पसंख्य्क में भी अल्प केवल 2% सिख़ समाज ने जो उदाहरण प्रस्तुत किये हैं उसकी दूसरी मिसाल अभी तक तो कहीं दूसरी नहीं है।। सरकार अथवा सिस्टम की नाकामी के कारण दिल्ली सहित देश भर में अस्पतालो की व्यवस्था चकना चूर हो चुकी हैं और हैवानियत की हद तो यहाँँ तक पसर चुकी हैं कि गुरुग्राम के कीर्ति अस्पताल में मरीजों को मरता छोड़कर डॉक्टर्स सहित समस्त स्टॉफ भाग गया जिसके कारण वहां केवल 6 लाशें ही रह गई।

जयपुर गोल्डन अस्पताल, बत्रा अस्पताल जैसे कई हॉस्पिटल्स में ओक्सिजन की कमी के कारण मरीजों को बे मौत अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।। मानव की जात एक ही पहचान बो और सेवा भावना की गुरु शिक्षा से ओतप्रोत दिल्ली सिख़ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी ने एतिहासिक गुरूद्वारा रकाब गंज साहिब के लक्खी सिंह बंजारा हाल को करोना अस्पताल में बदल दिया।। सिख़ संगत द्वारा यहां 250 बिस्तरो का इन्तजाम किया गया है तथा इसमें प्रत्येक मरीज को ओक्सिजन कंसन्ट्रेट र् मशीन उप्लब्ध कराई जाएगी।

एक ओर तो जरूरी दवाओं तथा सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग से पैसा कमाने वाले गैंग है जिनके लिए आपदा एक अवसर होता है तो दूसरी ओर गुरु सेवक समस्त सुविधाएं निशुल्क दे रहे हैं।। यदि ऐसा कोई उदाहरण दूसरा भी हो तो ज़रूर बताए। News Number ऐसे दरवेश समूह को सादर प्रणाम करता है।