करोना महामारी के कारण भारत के अंदर बिगड़ते हालात के साथ साथ विदेशनीति और विदेशो में भी भारत सरकार के लिए शर्मिंदगी का मौका !

भारत भर में करोना महामारी के कारण हाहाकार मचा हुआ है और इसी दौरान लंदन में जी 7 ग्रुप की बैठक चल रही हैं जिसमें भाग लेने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी पहुंचे हुए हैं।। जी 7 ग्रुप को कह सकते हैं कि यह पश्चमी रईस देशों का क्लब हे और डॉ मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में भारत की आर्थिक प्रगति को देखते हुए भारत को भी इसका सदस्य बनाया जाने वाला था।

अभी तक भारत इस समूह का पूर्ण सदस्य नहीं है और केवल आमंत्रित सदस्य के रूप में हिस्सा लेता है। फिर भी भारत के विदेशमंत्री इसमें भाग लेने के लिए चार दिवसीय दौरे पर ब्रिटैन गए। पहले दिन की वार्ता में केवल पूर्णकालिक सदस्यों ने ही हिस्सा लिया तो भारत को प्रतीक्षा करनी पड़ी किंतु अगले दिन भारत से गए प्रतिनिधि मंडल के दो सदस्यों को करोना पोजेटिव निकल आया जिसके कारण भारतीय विदेशमंत्री ने भी खुद को क्वारंटीन कर लिया और अपने होटल से वर्चुअल ही मीटिंग में हिस्सा लिया तथा अन्य नेताओं से मिलने के कार्यक्रम निरस्त करने पड़े।। इसके अतिरिक्त ब्रिटैन के मीडिया संगठन India Inc group से बात करते हुए तीखे सवालो का सामना करना पड़ा।

उनसे पूछा गया कि कोरोना की दूसरी भयावह लहर के बावजूद पाँच राज्यों में चुनाव क्यों कराये गये तो उन्होंने इसे लोकतंत्र की मज़बूरी बताया।। इसके साथ ही अमेरिकी मीडिया में भी भारत को भेजी गयी मदद के संबंध में सवाल खड़े किये जा रहे हैं और पूछा जा रहा है कि 300 टन राहत सामग्री भेजने के बावजूद भारत में करोना पर काबू क्यों नहीं पाया जा सका तथा अभी तक भेजी गयी मदद पीड़ितों तक क्यों नहीं पहूँची। वाशिंगटन स्थित भारतीय राजदुत तरन जीत सिंह सिद्धू ने डॉ फासी से बात करते हुए उनका धन्यवाद किया, डॉ फ़ासी ने भारत में करोना की स्थिती को गंभीर बताते हुए सुझाव दिया कि भारत सरकार को सेना की मदद लेकर हालात पर काबू करने के प्रयत्न करने चाहिए।

उल्लेखनीय हैं कि US, UK, Canada सहित गल्फ देशों ने भी भारत को ऑक्सिजन सिलेंडर सहित अन्य सहायता सामग्री भेजी है लेकिन सरकार द्वारा वितरण की निति निर्धारित न किये जाने के कारण अभी तक प्राप्त सामग्री दिल्ली हवाई अड्डे पर ही रखी हुई है।