बंगाल के चुनावी नतीजे और किसान आंदोलन क्या किसी नई राजनीतिक परिवर्तन की आहट लेकर आ रहा है ?

लंबे समय तक चलने वाले बंगाल चुनावों का दंगल समाप्त हुआ और एक बड़े महाभारत सरीखे युद्ध के नतीजों ने खुद को सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी के दावों को खोखला साबित कर दिया।। न जाने क्या कारण रहे थे कि एक राज्य के चुनावों को लेकर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इतना गंभीर हो गया कि स्वयं अतिरथी मोड़ी जी, अमित शाह, आदित्य नाथ योगी सहित न जाने कितने नेताओ और कार्यकर्ताओं को एक महिला मुख्यमंत्री के सामने उतरना पड़ा।

ममता बनर्जी ने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया अपितु अकेले ही दीदी ओ दीदी का भी जवाब दिया हालांकि कई विपक्षी नेता एवम् कुछ अन्य दल दीदी के समर्थन में साथ खड़े हुए किन्तु देखा जाए तो यह युद्ध उन्होंने अकेले ही लडा बेशक सामने कई समूहों में चुनौती मिल रही थी।। इन चुनावों में एक नई परिपाटी भी देखने को मिली जिसकी शुरुआत किसान आंदोलन के नेताओ ने विशेषकर राकेश टिकैत ने की। पहली बार किसी ने चुनावी रैलियों में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वो जिसे चाहे वोट करे लेकिन बीजेपी को जरूर पराजित करे।। एक प्रकार की नकारात्मक या विद्रोही जनसभाओं का कुछ असर हुआ या नहीं यह तो शोध का विषय हो सकता है किन्तु परिणाम स्वरूप बीजेपी को पराजय अवश्य मिली।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन में किसानों द्वारा मिठाई बांटी गई और खुशी व्यक्त की गई यद्धपि कुछ लोगो का कहना था कि यह किसान आंदोलन की दिशा भटका सकता है और इसे राजनीतिक स्वरूप दे सकता है जिसकी लाभ हानि का विश्लेषण फिलहाल तो सम्भव नहीं है।। इसके अतिरिक्त ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र नंदीग्राम का परिणाम भी बीजेपी के लिए सेल्फ गोल साबित हो सकता है। जैसा कि देखा गया था और वोटो की गिनती के बाद ममता बनर्जी की जीत घोषित कर दी गई थी लेकिन बाद मे उन्हे पराजित बता दिया गया एवम् दोबारा गिनती की मांग स्वीकार नहीं की गई जबकि आज ममता बनर्जी द्वारा चुनाव अधिकारी की बातचीत लीक कर दी गई है जिसमे वो कहते है कि उन्हें दोबारा गिनती करने पर जान का खतरा हो सकता है।

ममता बनर्जी का नंदीग्राम से हारना बीजेपी के लिए सेल्फ गोल कैसे हो सकता है ? क्योंकि फिलहाल देश करोना महामारी से जूझ रहा है और आर्थिक स्थिति भी संतोषजनक नहीं है तो यदि ऐसे में ममता दीदी अपने राज्य तक सीमित रहती तो मोड़ी सरकार की गिरती हुई साख को देश में चुनौती देने वाला कोई दूसरा नहीं था।। किसान आंदोलन से लेकर सार्वजनिक उपक्रमों के बेचने तथा क्रोनी कैप्टिलिज्म के आरोपों से घिरी सरकार को यदि ममता बनर्जी जैसी आंदोलनकारी नेता की ओर से चुनौती मिलती हैं तो उसका सामना करना बीजेपी के लिए सम्भव नहीं होगा।। अभी तक किसान आंदोलन सफलता पूर्वक चल जरूर रहा है किन्तु देखा जाए तो इतने लंबे आंदोलन के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकल सका जिसे असफलता भी माना जा सकता है।

यदि ममता दीदी जैसी आक्रमक नेता द्वारा इसे कोई दिशा मिलती हैं तो शायद यह आंदोलन एक नई ऊर्जा के साथ सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हो सकता है।। इसके अतिरिक्त पंजाब जैसे राज्य में जहां बीजेपी का कोई वर्चस्व ही नहीं है, अकाली दल बदनाम है तथा कांग्रेस अपने अंदरुनी झगड़ों एवम् कैप्टन अमरिंदर सिंह की हठधर्मिता से परेशान है साथ ही केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बीजेपी की बी टीम बताया जा रहा है तो ऐसे में किसान आंदोलन से ही किसी नए नेतृत्व की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता और यदि तृणमूल कांग्रेस या कोई अन्य नई पार्टी सामने आती हैं तथा सफल हो जाती हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

बाकी तो भविष्य के गर्भ में है किन्तु अपत्यशित जीत के बाद ममता बनर्जी का गुरुद्वारा साहिब में जाकर बोले सो निहाल की हुंकार भरना निसंदेह कुछ संकेत करता है और असफल मोड़ी एवम् शाह की जोड़ी के लिए चुनौती बनकर आने वाला है।।

सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल से हत्या के सम्बन्ध मे संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बीती रात दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित सिंघु बॉर्डर किसान मोर्चा स्थल से एक युवक का शव पुलिस बेरीकेट पर लटका हुआ पाया गया जिसे धारदार हथियारों से मारे जाने के साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्राप्त हुए है। ...

खाप व्यवस्था और किसान आंदोलन ! बाबा बन्दा सिंह बहादुर को दहिया खाप का प्रणाम।।

किसान आंदोलन और सरकार की साजिशें दोनों आमने सामने अपनी अपनी चाले चल रही है लेकिन हरियाणा के जाट समुदाय की दहिया खाप ने बीजेपी द्वारा फुट डालो राज करो की नीति का उत्तर अनाज से भरी ट्रॉलियां भेज कर दिया।। ...

किसान आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा हरियाणा सरकार को खुली चुनौती। सरकार बैकफुट पर।

हरियाणा के विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को गालियां दिए जाने और तीन किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में आज हरियाणा के टोहाना में महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। ...

भारत सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के विरूद्ध आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा विरोध दिवस।

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के साथ ही सरकार की उदासीनता से एक बार फिर आंदोलन को नई ऊर्जा देने की कवायत

छह महीने से दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आंदोलन को फिर से नई ऊर्जा देने की तैयारी ...

हमे भूल तो नहीं गए ? बेशक बच्चे भूल जाए लेकिन मां बाप दुख सहकर भी बच्चो के लिए कुर्बानियां करते हैं।

बेमौसम बरसात के कारण किसान आंदोलन स्थल पर परेशानियां बढ़ी लेकिन उससे ज्यादा दुखद सरकार, मीडिया और दिल्ली वासियों द्वारा नजरंदाज किया जाना है। ...

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...

किसान आंदोलन कारियो द्वारा भारत बन्द के कारण देश भर से बन्द की सफलता या आंशिक प्रभाव !

26 मार्च संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद का आहवान किया गया जिसे जनता के अतिरिक्त विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया। इसके परिणाम स्वरूप देश के अधिकांश हिस्सों में शांति पूर्वक बन्द रखा गया। रास्ते जाम किए गए तथा रेले हैं गई। ...

किसान आंदोलन का बदलता स्वरूप और लगातार चलता डेडलॉक क्या किसी आने वाले तूफान की आशंका हो सकता है ?

दिल्ली की सरहदों पर किसानों का धरना फिर सरकार से बातचीत और ट्रेक्टर परेड से लेकर लाल किला तथा अब राज्यो मे होने वाले चुनावों में किसान नेताओ की महापंचायत। इन सब के साथ बातचीत टूटे हुए भी दो महीने बीत चुके हैं और सरकार खामोश हैं। क्या यह खामोशी किसी तूफान का संकेत है ? ...

क्या दिल्ली की सरहदों पर चल रहा किसान आंदोलन अपनी समाप्ति की ओर है ? क्या लगातार चार महीने से मोर्चा लगाकर बैठे किसानों की थककर वापसी हो रही है ? क्या सरकार इस विश्व प्रसिद्ध आंदोलन को समाप्त करने की चालों में कामयाब हो रही हैं?

भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसमे से अधिकांश चैनल गोदी मीडिया का खिताब प्राप्त कर चुके है लगातार किसान आंदोलन को असफल और समाप्ति की ओर बता रहा है। News Number की टीम ने हालात का विश्लेषण किया जिसकी रिपोर्ट प्रस्तुत है। ...