कलश समुदाय या आर्यन नस्ल को बचा कर रखने वाला समुदाय।

पेशावर ( पाकिस्तान ) से आगे खैबर पख्तुनख्वा राज्य और हिंदुकुश पर्वतमाला का स्वात शहर यहां से कुछ दूर बसी हुई है हुंजा वैली और उसके बाशिंदों को कहते है "कलश" समुदाय।। यद्धपि कई इतिहासकार मानते है कि 400 बीसी जब सिकंदर ने हिंदुस्तान में प्रवेश किया तो वापसी से पहले उसके कई सैनिक मलेरिया के कारण बीमार पड़ गए और बाकी सेना बीमार सैनिकों को छोड़कर आगे निकल गई। जो सैनिक यहां छूट गए थे उन्हीं से आगे बढ़ती पीढ़ी इसी घाटी में बस गई तथा कलश कहलाने लगी इसके पक्ष में उनका कहना है कि इनकी शारीरिक बनावट रोमन नस्ल से अधिक मिलती हैं।

किन्तु यूनेस्को सहित अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह नस्ल इस क्षेत्र में आर्यन सभ्यता की प्रतिनिधि है और किसी भी कारण से यह स्थानीय प्रजातियों से अलग रहे और इसीलिए इन्हे First Aryan's race का प्रतिनिधि माना जा सकता है।। इन्हीं की तरह का एक समुदाय अफगानिस्तान के नूरिस्तान या काफ़िर स्तान में भी था किन्तु जब तालिबान के शासन में इन्हे जबरदस्ती इस्लाम में लाने की कोशिश हुई तो अधिकांश यूरेशिया के देशों तथा उज़्बेकिस्तान चले गए।। उसी दौरान भारत के उपराष्ट्रपति रहे जनाब हामिद अंसारी साहब को इसकी जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने निजी रुचि लेकर इन्हे विश्व धरोहर तथा संरक्षित समाज का दर्जा दिलवाया।

दक्षिण एशिया में अंडमान निकोबार के आदिवासी तथा कलश समुदाय ये दो ही लुप्त हो सकने वाली मानव नस्ल मानी जाती है और संरक्षित है जिसके कारण यहां बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध है।। 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी आबादी केवल 4800 थी, यह समाज पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होता है, कृषि एवं पशुपालन इनका मुख्य एवम् एकमात्र जीवन जीने का माध्यम है। खुमानी की खेती तथा पहाड़ी गौ पालन इनकी विशेषता है।

J I Rodal लिखित The healthy hunjas एवम् डॉ जो क्लार्क की पुस्तक Lost Kingdom of Himalayas में भी इनका विवरण मिलता है और उनके अनुसार इस समाज में 120 वर्ष तक की आयु सामान्य है।। आस्था के नाम पर ये प्रकृति की पूजा करते हैं तथा इनकी अपनी भाषा है बुरुशा कहते है और जो वैघली/ दरद्रिका परिवार की मानी जा सकती है।। निसंदेह यदि प्राकृतिक सुंदरता और प्राकृतिक जीवन शैली देखनी हो तो एक बार इस क्षेत्र के निवासियों को जरूर देखना चाहिए यद्धपि सूर्यास्त के बाद वहां किसी भी बाहरी व्यक्ति को रुकने नहीं दिया जाता।।