इंसानियत या झूठे अहंकार के लिए खींची गई सरहदे ! एक बार फिर पलट कर सोचने का समय आ गया है।m

बहुत दावे किए जाते हैं कि समस्त दुनियां के इंसान एक है, इंसानियत पहले है। बेशक उन्हे वसुधैव कुटुंबकम् का नाम दिया गया हो या ग्लोबल विलेज की संज्ञा दी गई हो।। प्रथम विश्वयुद्ध से पहले अलग अलग साम्राज्य थे, प्राकृतिक सीमाएं थी व्यापारियों के काफिलों से चुंगी वसूली जाती थी लेकिन सरहदों में कैद इंसान नहीं थे, पासपोर्ट और वीजा नहीं थे।। फिर लीग ऑफ नेशन्स से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक की व्यवस्था हुई और उसी के साथ सरहदें तय हो गई तथा साथ ही उन सरहदों में कैद कर लिए इंसानों की भी सीमाएं तय हो गई।

सीमाएं, पासपोर्ट और वीजा के अतिरिक्त एक अनकही शर्त भी लागू कर दी गई जिसके अनुसार लकीर के इस ओर रहने वाला इंसान लकीर के उस ओर रहने वाले अपने भाई या बहन से अलग होगा और उसको प्राप्त सुविधाएं इसके लिए उपलब्ध नहीं होगी बेशक किसी के मरने जीने से कोई अंतर नही पड़ता।। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब वैश्विक शक्तियों ने दुनियां का बटवारा किया तो आमने सामने एक एक शत्रु भी तय कर दिए जैसे दो कोरिया, दो जर्मनी तथा भारत एवम् पाकिस्तान।

आजतक कोई स्पष्ट नहीं कर सका कि दोनों ओर के कोरियन नागरिकों ने क्या अपराध किया था जिसके कारण परिवार के सदस्य एक दूसरे के शत्रु देश के नागरिक कहलाने लगे।। ऐसा ही भारत तथा पाकिस्तान के बीच भी कहा जा सकता है जहां दो जुड़वा शहर लाहौर एवम् अमृतसर एक दूसरे से बहुत दूर बसा दिए गए।। शायद मौत के नंगे नाच या महामारी के आतंक से ही किसी की इंसानियत जिंदा हो जाए ऐसा ख्वाब तो देखा जा सकता है किन्तु हकीकत में ऐसा होना अभी तो असम्भव लगता है।। वर्तमान समय में करोना महामारी के कारण सबसे बड़ी चुनौती अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की है जिसके कारण लगातार हत्याएं ( अस्पतालों में लापरवाही से मरने वालों की मृत्यु को हत्या ही कहना चाहिए ) हो रही हैं।

गत दिनों अमृतसर में एक ही अस्पताल में छह मरीज़ अपनी जान की बाजी हार गए क्योंकि वक्त पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो सकी।। सीमावर्ती अमृतसर, गुरदासपुर तथा फिरोजपुर जिलों में ऑक्सीजन सप्लाई हरियाणा के पानीपत से होती हैं जिसकी दूरी अमृतसर से लगभग 350 किमी है।। इसके अतिरिक्त हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने घोषणा की है कि हरियाणा की आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद ही किसी अन्य राज्य को ऑक्सीजन भेजने की अनुमति दी जाएगी।

अमृतसर से चुने गए सांसद गुर तेज सिंह ने भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि अमृतसर को लाहौर से ऑक्सीजन आपूर्ति की अनुमति दी जाए तथा लाहौर से अमृतसर तक खुला कॉरिडोर बनाया जाए जिससे आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन मंगाई जा सके।। पानीपत से अमृतसर तक ट्रक पहुंचने में लगभग आठ घंटे लगते है जबकि लाहौर तथा अमृतसर के बीच की दूरी एक घंटे से अधिक की नहीं है।

कुछ ऐसी ही स्थिति उधर भी है क्योंकि पाकिस्तान में दवाओं का निर्माण भारत की तुलना में बहुत कम होता है तथा भारतीय दवाएं न केवल उन्हे सस्ती पड़ती हैं अपितु लाभकारी भी है और इमरजेंसी में कभी भी अमृतसर से भेजी जा सकती हैं।। लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में इंसानियत के आड़े सियासत और सरहद आ जाती हैं।। राजनीतिक तौर पर सांसद महोदय का सुझाव कितना स्वीकार्य होगा या आलोचना का कारण बनेगा यह तो सब जानते हुए भी अनजान हैं किन्तु इंसानियत के दृष्टिकोण से कितना कारगर है यह जरूर विचारणीय है और होना भी चाहिए।।

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