भारत पाकिस्तान के सम्बन्धों में निकटता के लिए पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सफल होने की आशा से वार्ताओं के दौर सार्वजनिक करने की उम्मीद !

वैसे तो जब से मुल्क का या कहे तो पंजाब का बटवारा हुआ और दो देश वजूद में आए और जिन सपनो के साथ आबादियां इधर से उधर आई गई थी वो किसी स्काई वॉक की तरह सपनो का हकीकत में बदलता नहीं देख पाई।। वैसे तो 1965 के बाद से तल्खियां बढ़ी थी लेकिन 1972 के शिमला समझौते के बाद काफी हद तक बेशक दोस्ती न रही हो मगर दुश्मनी भी ऐसी नहीं रही कि नफरतों के तूफान जनता के दिलो में घर कर जाए।

2007 के समय सम्बन्ध सुधारने के लिए काफी प्रयत्न किए गए जो सफल भी हो रहे थे और 2012 - 13 में किसी समझौते तक पहुंचने भी वाले थे कि देश की सत्ता बदल गई और बीजेपी का शासन आ गया।। वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ ही सम्बन्धों में कड़वाहट बढ़ती गई तथा मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान के सम्बन्धों को नकारात्मक प्रभाव देने की हरदम कोशिश की जाती रही जिसका उदाहरण तीन वर्षो के विभिन्न भारतीय चैनल्स की डिबेट्स तथा हैड लाइन्स है।

गत दिनों यूएई एवम् सऊदी अरब ने अमेरिकी विदेश सचिव की उपस्थिति में घोषणा की थी कि उन्होंने मध्यस्थता की है और भारत पाकिस्तान के बीच LOC पर युद्ध विराम कराया है जिसका दोनों ओर की सरकारों ने न खंडन किया न समर्थन। News Number सम्भवतः सबसे पहले यह सूचना दे रहा है कि भारत - पाकिस्तान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की वार्ताओं एवम् ट्रैक टू डिप्लोमेसी को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया है।

इस सम्बन्ध मे आज पाकिस्तान GHQ में कुछ विशेष पत्रकारों को आमंत्रित किया गया तथा उन्हें जानकारी दी गई।। आशा करते हैं कि अगले कुछ घंटों में यह समाचार विश्व मीडिया तथा पाकिस्तानी मीडिया पर भी सार्वजनिक होगा और फिर भारतीय मीडिया किस मूंह से मजबूरी में इसकी घोषणा करेगा तथा कैसे अपने दर्शको से आंख मिलाकर अपनी फैलाई गई झूठी कहानियों के लिए माफी मांगेगा या नहीं।।

भारत पाकिस्तान सम्बन्धों में तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार करके हम परम्परागत स्थापित विदेश नीति को छोड़ चुके है !

भारत पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ होने की घोषणा से यूएई ने भारत सरकार को शर्मिंदा किया। ...

दक्षिण एशिया की शांति और समृद्धि का एक मजबूत स्तंभ जिसे कभी धर्म की आड़ में तो कभी सियासत के लिए तोड़ दिया गया।

दक्षिण एशिया को धीरे धीरे वैश्विक महाशक्तियों का अखाड़ा बनने की आशंका जताई जा रही हैं लेकिन भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध और शांति के झुलो के बीच एक संस्कृति ऐसी भी है जो क्षेत्र में शांति की गारंटी बन सकती हैं बशर्ते दोनों देश अपनी अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखकर भी पॉजिटिव सोच रख ले। ...

भारत पाक सम्बन्ध ! पत्थर की फुटबाल से खेला जाने वाला सोकर्स मैच ! गत 75 साल से उतार चढ़ाव के बीच आम जनता की समझ में न आ सके रिश्ते किसी सियासी मजबूरियों के बन्धक कहलाए जा सकते है।

1947 और ब्रिटिश साम्राज्य ने हिंदुस्तान को आज़ादी दे दी लेकिन साथ ही एक ऐसा जख्म भी दे दिया जिसको ठीक होने के लिए दोनों ओर की जनता विशेषकर पंजाबी समुदाय आज तक केवल इंतजार कर रहा है लेकिन शायद किन्हीं राजनीतिक मजबूरियों के चलते कभी आशा की किरण नजर आती हैं तो कभी घना अंधेरा। ...